'नींबू का शरबत बना डालेंगे मोदी'

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, न्यू यॉर्क से
न्यूयॉर्क में मेडिसन स्क्वेयर गार्डन के हाई-वोल्टेज समारोह के कुछ ही घंटों बाद नरेंद्र मोदी अपने चिर-परिचित अंदाज़ में एक बार फिर अमरीका को रिझाने में जुट गए.
भारतीय दूतावास ने न्यूयॉर्क में उनके सम्मान में एक रात्रिभोज का आयोजन किया था और वहां भारत में रुचि रखने वाले अमरीकी कांग्रेस के कई जानेमाने सीनेटर, इंदिरा नूई समेत कॉर्पोरेट जगत के बड़े-बड़े सीईओ, सहायक विदेश मंत्री निशा बिस्वाल, और जानीमानी हस्तियां मौजूद थीं.
जिस टेबल पर मैं बैठा था उससे दो तीन टेबल दूर बैठे थे मुकेश अंबानी, और मेरे बगल के टेबल पर बैठे थे एक स्वामीजी जिन्हें मैं नहीं पहचानता था.
अंबानी अभिभूत

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प्रधानमंत्री मोदी तब तक वहां पहुंचे नहीं थे.
अचानक से मैंने देखा कि मुकेश अंबानी अपनी टेबल छोड़कर स्वामीजी की तरफ़ आए और गहन बातचीत में लग गए.
मेरा कौतूहल जागा और मैं भी वहां पहुंचा और मुकेश अंबानी से पूछा--'आपको मोदीजी का भाषण कैसा लगा?'
उनका जवाब था--'सुपर'.

दो तीन रोज़ पहले मेरी बातचीत हुई थी मोदीजी के करीबी समझे जानेवाले भारत बराई से और उन्होंने मुझसे कहा था कि धीरूभाई अंबानी ने युवा नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था, 'ये लंबी रेस का घोड़ो छे' यानि ये लंबी रेस का घोड़ा है.
मैने मुकेश अंबानी से पूछा कि आपके पिताजी ने ये बात कही थी नरेंद्र मोदी के बारे में, आप क्या कहते हैं?
मुस्कराते हुए उन्होंने कहा कि इसका जवाब आप स्वामीजी से पूछ लें और ये कहकर अपने टेबल पर लौट गए.
मोदीमय माहौल

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स्वामी जी से मैंने उनका परिचय पूछा तो उन्होंने अपना नाम बताया चिदानंद सरस्वती और बताया कि नरेंद्र मोदी और मुकेश अंबानी दोनों ही उनके काफ़ी क़रीबी हैं.
उन्होंने मोदी के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाईं.
मोदी के भाषण के बारे में उन्होंने कहा "आज भारत हुआ और वो भी अमरीका में."
मैने थोड़ा और कुरेदा कि अगर मोदी को जानते हैं तो ये बताएं कि राष्ट्रपति ओबामा से उनकी मुलाक़ात में वो किस तरह से पेश आएँगे?

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जवाब था, "खुद भी नींबू पानी पिएंगे और ओबामा को भी नींबू पानी पिलाएंगे. ये बड़ी बात है."
उन्होंने समझाते हुए उस अमरीकी कहावत की तरफ़ इशारा किया जिसका निचोड़ है कि जिंदगी, अगर आपके नसीब में नींबू ही दे तो उसे भी एक मौके की तरह लीजिए और उस नींबू का शरबत बना डालिए.
मोदी सोमवार की शाम वाशिंगटन पहुंच रहे हैं. वहां उनका जादू कितना चलता है, ये देखना अभी बाकी है क्योंकि वहां "लेमन से लेमॉनेड" बनाने का रास्ता काफ़ी पेचीदगियों से भरा हुआ है.
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