'वीज़ा मुद्दा कहां, मोदी का साथ देंगे'

- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, न्यू यॉर्क से
अमरीका की सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडिसन स्क्वेयर गार्डन के अपने भाषण में भारत के भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी और साहसी एजेंडा पेश किया है.
बीबीसी हिंदी के साथ एक ख़ास बातचीत में बिस्वाल का कहना था उनके इस भाषण से वहीं बैठे अमरीकी कांग्रेस के सदस्य भी काफ़ी प्रभावित थे.
उनका कहना है कि अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों को भी भारत के बारे में जो मोदी का नज़रिया है उसे समझने में काफ़ी मदद मिली है.
बिस्वाल का कहना था,"भारत के लिए जो प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है उसमें हम उनका साथ तो देना चाहते ही हैं, साथ ही अमरीका उनके साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी साझेदारी का इच्छुक है."
मतभेद

अमरीकी सहायक विदेश मंत्री ने ये बात ऐसे वक्त पर कही है जब भारत और अमरीका रिश्तों को बेहतर करने की बात तो कर रहे हैं लेकिन कई मामलों पर एक दूसरे के साथ उलझ भी रहे हैं.
विश्व व्यापार संगठन यानि डब्ल्यूटीओ में खाद्य सब्सिडी पर दोनों के बीच अभी भी किसी तरह के समझौते के आसार नहीं नज़र आ रहे और उसकी समय सीमा सोमवार यानि 29 सितंबर को खत्म हो रही है.
वैसे समय सीमा पहले कई मामलों में बढाई जा चुकी है लेकिन इस मामले पर पूछे जाने पर निशा बिस्वाल का कहना था कि कोशिशें जारी हैं कि कोई समझौता हो जाए और इससे आगे वो इस पर और कुछ नहीं कहना चाहेंगी.
'दबाव की मांग'

इमेज स्रोत, Reuters
अमरीका के कई लॉबी ग्रुप ज़ोर लगा रहे हैं कि भारत पर दबाव डाला जाए कि वो डब्लयूटीओ पर समझौते के लिए राज़ी हो जाए.
इसके अलावा अमरीकी कांग्रेस में कुछ सांसदों ने एक दस्तावेज़ पर दस्तखत करके पेटेंट कानून, कॉपीराइट नियम जैसे कूछ मामलों पर मोदी पर दबाव डालने की कोशिश की है.
सहायक विदेश मंत्री बिस्वाल ने कहा, "ये दोनों ही देशों के फ़ायदे में है कि आर्थिक साझेदारी के रास्ते में जो भी रुकावटें आएँ उन्हें मिटाने की हर संभव कोशिश करें."
नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में अमरीकी नागरिकों के लिए भारत पहुंचकर वीज़ा दिए जाने के प्रस्ताव का भी ऐलान किया. और उसके पहले उन्होंने हल्की सी चुटकी भी ली कि "वीज़ा नहीं मिलने का दर्द क्या होता है ये मैं समझता हूं."
इसके बारे में पूछे जाने पर निशा बिस्वाल ने हंसते हुए कहा कि "उनका मज़ाक मैं समझ गई थी लेकिन इस पूरे मामले को हम पीछे छोड़ चुके हैं."
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