'मरना ही है तो लड़ते हुए मरेंगे'

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लातिन अमरीकी देश कोलंबिया के शहर बुएनावेंतुरा में महिला अधिकारों के लिए लड़ना बेहद जोख़िम भरा काम है. और ग्लोरिया अम्पारो अरबोलेंदा इसे अच्छी तरह जानती हैं.
फिर भी उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर ‘बटरफ्लाइज़ विद न न्यू विंग्स’ नामक संगठन बनाया. 2010 में बना यह संगठन हिंसा, यौन उत्पीड़न और बेघर महिलाओं के लिए काम कर रहा है.
अरबोलेंदा कहती हैं, “यहां हिंसा के ख़िलाफ़ बोलना बहुत जोख़िम भरा काम है लेकिन किसी को तो बोलना होगा. यहां जान जाने का जोख़िम तो हमेशा रहेगा, आप लड़ो या मत लड़ो. तो बेहतर है कि लड़ते हुए मरें.”
पढ़ें बीबीसी मुंडो में आरतुरो वैलेस की रिपोर्ट
120 महिलाओं से चलने वाले इस संगठन की कोशिशों को संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहा और उसे प्रतिष्ठित नानसेन शरणार्थी अवॉर्ड से सम्मानित किया है.

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संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, “ये महिलाएं बहुत सी महिलाओं और बच्चों के ज़ख़्मों को सहलाती हैं और अपना जीवन जोख़िम में डालती हैं.”
कोलंबिया में पिछले पांच दशक से आतंरिक सशस्त्र संघर्ष चल रहा है और इसका असर बुएनावेंतुरा पर भी है. शहरों के आसपास वाले ग्रामीण इलाक़ों में वामपंथी चरमपंथी गुट फ़ार्क की अच्छी ख़ासी मौजूदगी है.
इसके अलावा ज़मीन, नशीली दवाओं की तस्करी और फ़िरौती के लिए होने वाला संघर्ष स्थिति को और जटिल बना देता है.
‘बटरफ्लाइज़ विद न न्यू विंग्स’ से जुड़ीं मैरी मेदीना कहती हैं, “यहां कई हत्याएं होती हैं, लोग उठा लिए जाते हैं, उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाते हैं.”

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वह कहती हैं, “ऐसे मामलों में महिलाएं हमेशा शिकार बनती हैं. या तो वो ख़ुद पीड़ित होती हैं या फिर उनके पति, बेटे और नाती-पोतों को निशाना बनाया जाता है.”
इससे निपटने के लिए सरकार ने एक विशेष बल बनाया पर स्थानीय लोग कहते हैं कि इससे कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा.
'यौन हिंसा हथियार'
अरबोलेंदा बताती हैं, “यौन हिंसा का इस्तेमाल स्थानीय लोगों को डराने और उन पर नियंत्रण के लिए किया जाता है.”

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ऐसे में बहुत सी महिलाओं और लड़कियों को बलात्कार झेलना पड़ता है.
‘बटरफ्लाइज़ विद न न्यू विंग्स’ की योजना है कि अब संयुक्त राष्ट्र से पुरस्कार के बतौर मिलने वाली एक लाख डॉलर की इनामी राशि का इस्तेमाल पीड़ित महिलाओं के लिए आसरा बनाने में किया जाएगा.
संगठन से जुड़ी मारित्जा अस्परीला कहती हैं, “यह पुरस्कार सिर्फ़ बुएनावेंतुरा की महिलाओं की कोशिशों का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की महिलाओं का सम्मान है.”
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