'मूर्खों का शहर' कहने पर हुई गिरफ़्तारी

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कभी-कभी पेट्रोल के लिए लंबी क़तार में खड़ा होना भी काफ़ी गुस्सा दिलाने वाला होता है.
इंडोनेशिया में पेट्रोल की क़तार में खड़ी एक महिला की नाराज़गी भरी शिकायत से शुरू हुआ मामला उसकी गिरफ़्तारी पर समाप्त हुआ.
योग्याकार्ता शहर में फ्लोरेंस सिहोमबिंग अपनी मोटरसाइकिल में तेल भरवाने के लिए पहुंचीं.
सब्सिडी वाली लंबी कतार के बचने के लिए वह छोटी कतार में शामिल हो गई, जहां कारों के लिए ज़्यादा महंगा तेल मिल रहा था.
लेकिन यहां मौजूद कर्मचारियों ने उनसे ज़ोर देकर मोटरसाइकिल वाली पंक्ति में फिर से शामिल होने के लिए कहा.
'जोग्जा में मत रहो'
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट 'पाथ' पर सिहोमबिंग ने लिखा, "जोग्जा ग़रीब, मूर्खों और असभ्य लोगों का शहर है. जकार्ता और बानडुंग के दोस्तों, जोग्जा में मत रहो."
योग्याकार्ता को जोग्जा के नाम से भी जाना जाता है.
उनके पोस्ट की तस्वीर ट्विटर और फ़ेसबुक पर साझा की गई, पिछले बुधवार से अब तक ट्विटर पर 55,000 से भी अधिक बार इस्तेमाल किया गया.

इसके लिए <link type="page"><caption> #florencje</caption><url href="https://twitter.com/search?q=%23florencje&src=typd" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> #UsirFlorenceDariJogja</caption><url href="https://twitter.com/ndorokakung" platform="highweb"/></link> (फ्लोरेंस को बाहर निकालो) जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया.
शिकायत के समय का उनका वीडियो भी ऑनलाइन पोस्ट कर दिया गया, जिसके नीच हज़ारों लोगों ने टिप्पणी की है.
हो गई रिहाई
स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद 30 अगस्त को उनके ख़िलाफ़ पूछताछ के लिए समन जारी किया गया.
सिहोमबिंग के वक़ीलों ने उनकी गिरफ़्तारी ग़ैरक़ानूनी बताया. तो वहीं विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर, ट्विटर यूजर्स और एनजीओ की तरफ़ से उनको रिहा करने की मांग की गई.
एक सोशल मीडिया विश्लेषक विकासोनो ने बीबीसी से कहा, "सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों को कुछ लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए."
हालांकि अब सिहोमबिंग को रिहा कर दिया गया है. लेकिन उनके ख़िलाफ़ मामला चल रहा है, जिसकी सुनवाई होनी है.
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