पाकिस्तान: 'ख़रगोश ने छुड़ाए शेर के पसीने'

नवाज़ शरीफ़

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इमेज कैप्शन, नवाज़ शरीफ़ की सरकार के लिए इमरान ख़ान के लॉन्ग मार्च को एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है
    • Author, अशोक कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान में आजकल नवाज़ शरीफ़ सरकार के ख़िलाफ़ 14 अगस्त को प्रस्तावित इमरान ख़ान के लॉन्ग मार्च को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है.

इस पर नवाए वक़्त का संपादकीय है कि अलग-अलग धड़ों की हठधर्मिता देश के लिए ख़तरनाक हो सकती है.

अख़बार कहता है कि ये बात सही है कि सियासी समस्याएं धरने और प्रदर्शनों से नहीं बल्कि बातचीत और समझबूझ से ही हल हो सकती हैं, लेकिन सरकार ये बताएं कि पिछले सवा साल में उसने क्या कारनामे अंजाम दिए हैं.

अख़बार कहता है कि अगर पीएमएल (एन) को जनता का साथ और समर्थन प्राप्त होता, तो उसकी सरकार को न तो इमरान ख़ान से कोई ख़तरा था और न ही ताहिरउल कादरी से.

औसाफ़ का इस पर कार्टून है जिसमें एक खरगोश एक शेर के पीछे भाग रहा है, और शेर के पसीने के छूट रहे हैं. शेर यानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ की पार्टी का चुनाव चिह्न.

'अमरीकी दुष्प्रचार'

इसके अलावा औसाफ़ ने अपने संपादकीय में अमरीका के उस हालिया बयान का ज़िक्र भी किया है जिसमें भारत और पाकिस्तान से कश्मीर मुद्दे को हल करने की दिशा में क़दम उठाने को कहा गया है.

पाकिस्तान भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाता है.

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाता है.

अख़बार कहता है कि दुनिया भर का थानेदार होने के नाते अमरीका कश्मीर मुद्दे के हल पर तो ज़ोर देता है लेकिन उसका पलड़ा हमेशा भारत की तरफ़ झुका रहता है, बल्कि हक़ीक़त तो ये है कि भारत और अमरीका के गठजोड़ के कारण कश्मीर समस्या हल नहीं हुई है.

वहीं इंसाफ़ ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ के इस बयान पर संपादकीय लिखा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर पश्चिमी देशों की नज़र है.

अख़बार कहता है कि पहले तो अमरीका पाकिस्तान में दहशतगर्दी को बढ़ावा देता है और फिर ख़ुद यह दुष्प्रचार करता है कि परमाणु हथियार चरमपंथियों के क़ब्ज़े में जा सकते हैं.

इंसाफ़ लिखता है कि अमरीका हर मुमकिन कोशिश कर रहा है कि दहशतगर्दी की आड़ में वह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपनी निगरानी में ले ले.

जंग ने भारत के नए सेना प्रमुख दलबीर सिंह के इस बयान को अफ़सोसनाक बताया है कि सीमा उल्लंघन हुआ तो पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाएगा.

मोदी और कमला बेनीवाल

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इमेज कैप्शन, मोदी से बेनीवाल के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं

नीयत पर सवाल

रुख़ भारत का करें तो हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने अफ़सरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से दी गई हिदायतों पर लिखा है कि इससे पहले मोदी अपने मंत्रियों को भी नसीहतें दे चुके हैं.

अख़बार कहता है कि मोदी सरकार अभी नई है और वो चाहती है कि देश भर में लोग उसकी कोशिशों और क़दमों को सराहें, लेकिन फ़िलहाल तो ये मुश्किल है.

वहीं हमारा समाज ने मिज़ोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल को बर्ख़ास्त किए जाने पर लिखा है कि उन पर लगने वाले आरोप कितने सच हैं, ये तो जांच में पता चलेगा लेकिन जिस तरह उन्हें बर्ख़ास्त किया गया है, उससे सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं.

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