जापान पर भारी पड़ रहे हैं अमरीकी कछुए!

स्नैपिंग कछुआ

इमेज स्रोत, Getty

जापान में स्नैपिंग कछुओं की आबादी में भारी बढ़ोत्तरी से देश के नाज़ुक पारिस्थितिकीय तंत्र को ख़तरा पैदा हो गया है.

क्योदो समाचार एजेंसी के अनुसार मूलतः अमरीका से आए इन कछुओं को 1960 के दशक में पालतू जानवरों के रूप में पाला जाने लगा.

एक अनुमान के अनुसार दस साल पहले करीब 10,000 कछुए चिबा प्रांत में थे.

इन कछुओं को जापान में हमलावर नस्ल की श्रेणी में रखा गया है. ये वहां मछलिओं, पक्षियों और घास के भंडारों को खा रहे हैं और मछुआरों के जालों को काट देते हैं.

शिज़ोको विश्वविद्यालय के जीवविज्ञानी हिदियाकी कातो कहते हैं, "संभव है कि जब तक स्नैपिंग कछुओं की आबादी में वृद्धि को देखा गया, तब तक वे पारिस्थितिकी तंत्र को पर्याप्त नुक़सान कर चुके थे."

ये कछुए एक मीटर तक लंबे और 35 किलो तक वजनी हो सकते हैं. इनके बच्चों को काटे जाने की ख़बरें भी मिलने लगी हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>