पाकिस्तान के 117 साल पुराने मंदिर में होली की धूम

रावलपिंडी होली

इमेज स्रोत, Shiraz Hassan

    • Author, शीराज़ हसन
    • पदनाम, रावलपिंडी से बीबीसी हिंदी के लिए

पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी की होली कराची, लाहौर और भारत के शहरों की होलियों से अलग है और छोटी भी, मगर इससे होली के त्योहार का जोश फीका नहीं पड़ता. हिंदू परिवार यहां जोशो-खरोश के साथ होली मनाते हैं.

रावलपिंडी के कृष्णा मंदिर में रविवार शाम होली का आयोजन हुआ. इसका मतलब मौज मस्ती और रंग गुलाल ही नहीं, बल्कि आरती-कीर्तन भी था.

कृष्णा मंदिर में होने वाली होली के दौरान भजन हुए और पूजा की गई.

इस दौरान होलिका भी जलाई गई और मटकी भी फोड़ी गई. लोगों ने एक-दूसरे पर रंग फेंका और इसके बाद प्रसाद दिया गया.

इस दौरान जगमोहन अरोड़ा ने बताया कृष्णा मंदिर 1897 में बना था और विभाजन के बाद हिंदुओं के लिए 1949 में फिर से खोला गया.

उन्होंने बताया कि उस समय से लेकर आज तक शहर के तमाम हिंदू परिवार यहां अपने त्योहार मनाने आते हैं.

मंदिर में होली

रावलपिंडी होली

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कृष्णा मंदिर के अलावा रावलपिंडी में दो और मंदिर भी हैं जहां हिंदू होली मनाने के लिए जुटते हैं. सड़कों, मोहल्लों और गलियों में सुरक्षा की वजह से वे खुलकर होली नहीं खेल पाते.

40 लाख लोगों की आबादी वाले रावलपिंडी में हिंदुओं की तादाद सिर्फ़ तीन हज़ार है.

जगमोहन अरोड़ा का कहा था, ''एक तो शहर में हिंदू बहुत कम हैं और सुरक्षा स्थिति के कारण हम सिंध या भारत की तरह घरों से बाहर होली नहीं मना सकते, लेकिन हमें खुशी है कि हम मंदिर में होली और दूसरे त्योहार उत्साह के साथ मनाते हैं.

कृष्णा मंदिर के पुजारी जयराम का कहना था, ''होली रंगों का त्योहार है. यह हमें संदेश देता है कि हम अपने जीवन में बदलाव लेकर आएं. अपनी सोच में बदलाव लेकर आएं. अगर हमारी सोच कल्याणकारी होगी तो समाज में सुधार आएगा.''

जोश

रावलपिंडी होली

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कविता अरोड़ा का कहना था कि यह खुशी का दिन है. हम हर साल यहां होली मनाते आ रहे हैं. होली के मौक़े पर हम रंग गुलाल लगाने के अलावा अपने देश की सुरक्षा के लिए भी प्रार्थना करते हैं.

सिंध से आए जगदीश कुमार का कहना था कि उन्होंने पहली बार रावलपिंडी में होली मनाई है और उन्हें आश्चर्य है कि रावलपिंडी में हिंदू इतने जोश से होली मनाते हैं.

उन्होंने कहा, ''होली का त्योहार हम सबको शांति का संदेश देता है. दर्द और दुख का सामना करके और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का सबक़ देता है.''

होली के आयोजन के दौरान हिंदू परिवारों के अलावा भी कुछ लोग होली मनाने पहुंचे थे. एक एनजीओ की महिला रदा आरिफ़ ने कहा कि आज वह हिंदू परिवारों के साथ होली का त्योहार मनाने आई हैं और उनकी खुशियों में शामिल हैं. हम सबको ऐसे ही मिल-जुलकर रहना चाहिए.

ज़्यादातर हिंदू परिवारों का कहना था कि पाकिस्तान में शांति की स्थिति बने रहने होली का रंग और भी गहरा होगा, जो भाईचारे की बुनियाद को और मज़बूत करेगा.

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