जल्द रिहा होंगे अफ़ग़ानिस्तान में बिना सबूत क़ैदी

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई का कहना है कि ऐसे क़ैदियों को जल्द रिहा किया जाएगा जिनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सुबूत नहीं है, भले ही अमरीका उन्हें सुरक्षा के लिहाज़ से ख़तरा मानता है.
एक बयान में कहा गया है कि अमरीका ने जिन 88 लोगों को क़ैदी बनाया था, उनमें से 72 के ख़िलाफ़ पर्याप्त सुबूत नहीं हैं.
संवाददाताओं का कहना है कि इस क़दम से अमरीका के साथ अफ़ग़ानिस्तान के संबंधों में और अधिक तनाव आएगा.
राष्ट्रपति करज़ई अमरीका के साथ सुरक्षा समझौते पर दस्तख़त करने से इंक़ार कर चुके हैं जिसकी वजह से दोनों देशों के संबंधों में पहले से ही तनाव बना हुआ है.
अमरीका इन क़ैदियों की रिहाई का ये कहकर पुरज़ोर विरोध करता रहा है कि वे अमरीकी और नैटो सैनिकों को ज़ख़्मी करने या उनकी हत्या में शामिल रहे हैं.
चर्चित बगराम जेल का मार्च 2013 में ज़िम्मा संभालने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान सरकार सैकड़ों क़ैदियों को रिहा कर चुकी है.
'क्षति जिसकी भरपाई नहीं'
राष्ट्रपति करज़ई के प्रवक्ता ऐमल फ़ैज़ी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, ''हम इसकी मंज़ूरी नहीं दे सकते कि निर्दोष अफ़ग़ान नागरिकों को बिना किसी वजह के, बिना किसी मुक़दमे के महीनों तक, वर्षों तक जेल में बंद रखा जाए.''

उनका कहना है, ''हम जानते हैं कि दुर्भाग्यवश बगराम में ये होता रहा है, लेकिन ये ग़ैर-कानूनी है और अफ़ग़ानिस्तान की सम्प्रभुता का उल्लंघन है, हम इसकी और अनुमति नहीं दे सकते हैं.''
हालांकि पिछले हफ़्ते अमरीका ने एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि ''अफ़ग़ानिस्तान ने अब किसी और क़ैदी को रिहा किया तो इससे संबंधों को ऐसी क्षति पहुंचेगी जिसकी भरपाई नहीं हो सकती.''
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मिले जनादेश के मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अमरीका के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय फ़ौज को साल 2014 के आख़िर तक सुरक्षा संबंधी तमाम ज़िम्मेदारियां अफ़ग़ान सुरक्षा-बलों को सौंप देना है.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका के बीच समझौते पर दस्तख़त होने की सूरत में लगभग दस हज़ार अमरीकी सैनिक और अगले दस वर्षों के लिए अफ़ग़ानिस्तान में रुक सकेंगे.
राष्ट्रपति करज़ई इस समझौते पर दस्तख़त नहीं करना चाहते हैं.
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