चांग सोंग की फांसी और उत्तर कोरिया का भविष्य?

उत्तर कोरिया के युवा नेता किम जोंग के फूफा और संरक्षक से रातोंरात चांग सोंग थाएकएक विद्रोही बन गए. लिहाज़ा उन्हें सभी आधिकारिक पदों से हटा दिया गया.
यहां तक कि आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री फुटेज को एडिट कर उनकी हर मौजूदगी को मिटाने की कोशिश करते हुए सरकारी मीडिया पर उनके कथित गलत कामों को खूब प्रचारित किया गया.
<link type="page"><caption> उत्तर कोरिया के नेता ने अपने फूफा को दी फांसी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131213_north_korea_kim_uncle_executed_aa.shtml" platform="highweb"/></link>
इन आरोपों की फेहरिस्त से कई लोग भौंचक्का हो गए.
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह अद्भुत है. हमने इससे पहले ऐसी आधिकारिक घोषणाओं के बारे में नहीं सुना था. ऐसा लग रहा है कि सत्ता पक्ष फैसले को वैध साबित करने की कोशिश कर रहा है.
विद्रोही होने का आरोप

चांग पर देश के नेतृत्व को चुनौती देने, देश के आर्थिक, न्यायिक और सुरक्षा से जुड़े मसलों पर कब्जा जमाने और सत्ताधारी वर्कर्स पार्टीके अंदर एक विद्रोही धड़ा बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे. उन्हें पहले ही सभी आधिकारिक पदों से हटाकर पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था.
दो साल पहले पूर्व शासक किम जोंग-ईल के निधन के बाद यह देश की राजनीति में हुआ सबसे बड़ा बदलाव था. लेकिन उत्तर कोरिया की राजनीतिक रिपोर्टिंग अपने आप में अपारदर्शी है. ऐसे में इस मसले को इतनी मुखरता से रखने के वास्तविक मायने क्या हैं.
कुछ जानकारों का मानना है कि यह सत्ताधारी दल में व्याप्त अस्थिरता का परिचायक है. चांग का मामला सामने आने के बाद जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विक्टर चा ने चेताया कि मीडिया में उत्तर कोरिया की व्यवस्था के बारे जो तस्वीर दिखाई जा रही है उसमें उससे कहीं ज्यादा उथल-पुथल चल रही है.
उत्तर कोरिया की सत्ता में अंदर तक पैठ रखने वाली दक्षिण कोरिया की ऑनलाइन न्यूज़ साइट डेलेएनके का मानना है कि चांग को हटाना इस बात का परिचायक है कि देश की विकास दर को कैसे बढ़ाया जाए. इसको लेकर शीर्ष स्तर पर जबर्दस्त विवाद है. संभवतः चीन में हुए आर्थिक सुधारों के कारण ऐसा हुआ है.
इस साइट का कहना है कि चांग सोंग थाई चीन जैसे सुधार के हिमायती थे जबकि किम जोंग उन आंशिक सुधार चाहते हैं. इस मुद्दे पर दोनों में मतभेद की शुरुआत हुई.
नीतिगत मसले

अन्य जानकारों का मानना है कि सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के बीच नीतिगत मसले पर कोई खास मतभेद नहीं है.
सियोल के सेजोंग इंस्टीट्यूट के डॉ. पैक हाकसून का कहना है कि अगर प्योंगयांग के शीर्ष स्तर पर विचारों में मतभेद होते तो सत्तापक्ष इस मसले को इस तरह से प्रचारित नहीं करता और न ही इतनी जल्दी कार्रवाई करता.
इसके बजाय उनका कहना है कि चांग के निष्कासन से इस बात की पुष्टि हो जाती है कि युवा किम जोंग अब अपने गुरु से बड़े हो गए हैं. उनका कहना है कि पुराने और नए नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में चांग सोंग की भूमिका अब खत्म हो गई थी.
इस बारे में योनसेई यूनिवसिर्टी के डॉ. जॉन डेलुरी का कहना है कि आश्चर्य होता है कि उत्तर कोरिया ने यह माना है कि उच्च पदों पर बैठे पार्टी और किम परिवार के सदस्य भ्रष्ट होने के साथ-साथ निष्ठाहीन भी हैं.
करीब एक माह पहले तक सत्ता पक्ष के खास रहे इंसान के साथ ऐसा बर्ताव चौंकाने के साथ-साथ दूसरों के लिए चेतावनी भी है. उनका मानना है कि चांग के साथ ऐसा बर्ताव सत्ता पर किम जोंग की मजबूत पकड़ के बारे में बताता है.
उन्होंने कहा कि कुछ हद तक हम इस पूरे मामले को उत्तर कोरिया के दुनिया के दूसरे देशों के साथ संबंध की दृष्टि से भी देख सकते हैं.
दक्षिण कोरिया के एक अधिकारी ने कहा कि उत्तर कोरिया की आधिकारिक घोषणा काफी अहम है. उसकी घोषणा में ही कुछ ऐसे शब्द हैं जिस पर हमें ध्यान देना होगा. हालांकि हमारे पास सूचना इकट्ठा करने के अन्य उपाय भी हैं.
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