परिवारों को मिलाने के लिए कोरियाई देशों में वार्ता

कोरियाई युद्ध के दौरान बिखरे परिवारों को मिलाने के लिए उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच वार्ता शुरू हो गई है. सन 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान दोनों देशों के हज़ारों परिवार बिखर गए थे.
दोनों देशों के रेड क्रॉस अधिकारियों ने फिर से बातचीत शुरू करने के लिए सीमा पर स्थित पानमुंजोम गांव में मुलाकात की. अक्तूबर 2010 में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर वार्ता रूक गई थी.
वैसे तकनीकी रूप से अब भी दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है.
पिछले सप्ताह एक ज्वाइंट इंडस्ट्रियल ज़ोन पर दोनों देशों के बीच बनी सहमति के बाद यह वार्ता शुरू हुई है.
दरअसल, 1950 के दशक में कोरियाई प्रायद्वीप के बंटवारे के साथ हज़ारों परिवार भी बंट गए थे. पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क जेयून-हाय ने बातचीत शुरू करने के लिए उत्तर कोरिया से हाथ बढ़ाने को कहा था.
इस वार्ता का लक्ष्य सितंबर में एक त्योहार के मौके पर कुछ बिखरे परिवारों को मिलाना है. हालांकि, दोनों पक्षों को अभी परिवारों के मिलने की जगह, उनकी संख्या और तारीख़ के बारे में फ़ैसला करना है.
पंजीकरण
दक्षिण कोरिया में अपनों से मिलने के इच्छुक 70 हज़ार लोगों ने इसके लिए पंजीकरण करवाया है.

दक्षिण कोरिया की एक महिला किम क्यूंग-रयून का कहना है कि वह उत्तर कोरिया में रहने वाले अपने माता-पिता और भाई-बहनों से मिलने के लिए दशकों से कोशिश कर रहीं हैं.
उनका कहना है, "परिवारों के मिलने के कई कार्यक्रम ख़त्म हो गए लेकिन मेरी बारी कभी नहीं आई. ऐसे में मुझे मौका मिलता है तो मुझे आश्चर्य होगा. अब मैं इससे दुखी होकर थक गई हूं."
इस ताज़ा वार्ता को दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. इसी साल अप्रैल में उत्तर कोरिया ने काइसोंग ज्वाइंट इंडस्ट्रियल ज़ोन से अपने कामगारों को वापस बुला लिया था.
उत्तर कोरिया ने 12 फरवरी के अपने परमाणु परीक्षण पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और अमरीका-दक्षिण कोरिया के बीच हुए वार्षिक युद्धाभ्यास के विरोध में यह कदम उठाया था. छह दौर की असफल वार्ता के बाद पिछले सप्ताह दोनों पक्षों के बीच कामगारों के मसले पर समझौता हुआ.
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