आख़िर सोने का इतना भाव क्यों है?

सोने से बना मगरमच्छ
    • Author, जस्टिन रौलेट
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

सोने से इंसान का लगाव दिलचस्प है. रसायन विज्ञान की नज़र से देखें तो यह उतना दिलचस्प नहीं है क्योंकि यह शायद ही किसी धातु से अभिक्रिया करता हो.

पीरियोडिक टेबल या आवर्त सारणी के 118 तत्वों में केवल सोना ही एक ऐसा तत्व है, जिसे इंसान मुद्रा के रूप में चुनना पसंद करता है. लेकिन क्यों?

इंसान ओसमियम, क्रोमियम या हीलियम के प्रति ऐसा प्रेम क्यों नहीं दिखाता है?

मैं ऐसा पहला इंसान नहीं हूँ, जो यह सवाल पूछ रहा है. मुझे लगता है कि मैं यह सवाल सही जगह पर पूछ रहा हूं. ब्रिटिश संग्रहालय में आयोजित <itemMeta>hindi/india/2013/06/130621_gold_prices_coming_down_vs</itemMeta> की <link type="page"><caption> प्री कोलंबियन </caption><url href="http://www.britishmuseum.org/whats_on/exhibitions/beyond_el_dorado.aspx" platform="highweb"/></link>कलाकृतियों की <itemMeta>hindi/multimedia/2013/11/131106_columbia_art_gallery_akd</itemMeta> में मैं प्रोफ़ेसर एंड्रिया सीला से मिला. वो यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रसायन विज्ञान पढ़ाती हैं.

आवर्त सारणी

उन्होंने मुझे एक <link type="page"><caption> आवर्त सारणी</caption><url href="http://www.npr.org/blogs/money/2011/02/15/131430755/a-chemist-explains-why-gold-beat-out-lithium-osmium-einsteinium" platform="highweb"/></link> दिखाई. इस सारणी के दाहिने हिस्से पर उंगली रखते हुए प्रो. एंड्रिया मुझसे कहती हैं, "कुछ तत्व खारिज करने के लिए बहुत आसान होते हैं."

वो कहती हैं, "यहां आप महत्वपूर्ण गैसें और रासायनिक पदार्थ पा सकते हैं. एक गैस किसी मुद्रा से अच्छी नहीं हो सकती है. किसी गैस को एक शीशी में भरकर इधर-उधर ले जाना बहुत व्यावहारिक नहीं होगा."

गैसों के बारे में एक सत्य यह भी है कि वे रंगहीन होती हैं, ऐसे में आप यह कैसे पहचानेंगे कि वे क्या हैं?

इसी तरह दो तरल तत्व, पारा और ब्रोमाइन भी अव्यवहारिक हो सकते हैं. ये दोनों ज़हरीले भी होते हैं, यानी इनका गुण ऐसा नहीं होता है, जिसे आप मुद्रा के रूप में उपयोग कर सकें.

इसी तरह आर्सेनिक और कुछ अन्य तत्वों को भी बाहर किया जा सकता है.

इतना बताने के बाद प्रोफ़ेसर एंड्रिया हमारा ध्यान आवर्त सारणी के बाएं हिस्से की ओर ले जाती हैं.

वो कहती हैं, "क्षारीय धातुएं और भू धातुएं अति-क्रियाशील हैं. बहुत से लोगों को अपने स्कूल के दिनों में पानी से भरी एक प्याली में सोडियम या पोटैशियम डालना याद होगा. इसमें सनसनाहट के साथ आवाज़ होती है. ऐसे में एक विस्फोटक मुद्रा लेकर चलना अच्छा विचार नहीं होगा."

रेडियोधर्मी पदार्थ

कुछ इसी तरह की बात तत्वों के एक और वर्ग पर लागू होती है. ये हैं रेडियोधर्मी पदार्थ, आप कभी यह नहीं चाहेंगे आपकी मुद्रा आपको कैंसर की मरीज बनाए.

इस आवर्त सारणी में एक और समूह है, जिसे दुर्लभ धातु के नाम से जाना जाता है. इनमें से बहुत से तत्व सोने की तुलना में कम दुर्लभ हैं.

दुर्भाग्य से रासायनिक रूप से उनमें भेद कर पाना बहुत कठिन होता है. ऐसे में आपको यह नहीं पता चलेगा कि आपके जेब में क्या है.

आवर्त सारणी के ट्रांजीशन और पोस्ट ट्रांजीशन समूह में 49 तत्व हैं. इनमें से आयरन, एल्युमीनियम, कॉपर, लेड और सिल्वर जैसे धातुओं से हम परिचित भी हैं.

सोने के सिक्के

लेकिन अगर आप इनका विस्तृत परीक्षण करेंगे तो पाएंगे कि इन सब में कुछ गंभीर कमियां हैं.

इस आवर्त सारणी के बाएं तरफ वाले हिस्से में हमें सबसे ठोस और टिकाऊ तत्व टाइटेनियम और ज़िरकोनियम जैसी धातुएं मिलती हैं.

इन धातुओं से साथ समस्या यह है कि इन्हें पिघलाना बहुत कठिन काम है. इन धातुओं को इनके खनिजों से निकालने के लिए भट्टी को एक हज़ार सेंटीग्रेट के ऊपर तक ले जाना पड़ता है. इस तरह के विशेष उपकरण प्राचीन समय में लोगों के पास उपलब्ध नहीं थे.

लोहे की मज़बूरी

लोहा मुद्रा के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. यह आकर्षक होता है और इसे चमकाया जा सकता है. लेकिन इसकी समयस्या है, इसमें लगने वाली जंग, जब तक आप इसे पूरी तरह सूखा नहीं रखते, इसे सुरक्षित रख पाना एक कठिन काम है.

प्रो. एंड्रिया कहती हैं कि आपने आप में खोट वाली मुद्रा एक अच्छा विचार नहीं हो सकता.

इसी आधार पर लेड और कॉपर को बाहर कर दिया जाता है. लेकिन उनका क्षय होने लगता है. लोगों ने इन दोनों से मुद्राएं बनाईं, लेकिन वो ज़्यादा समय तक नहीं चल पाईं.

अब इस आवर्त सारणी के 118 तत्वों में से केवल आठ ही मुक़ाबले में रह गए हैं. ये हैं, प्लैटिनम, पैलाडियम, रोडियम, इरिडियम, आस्मिनम, रूथीनियम, गोल्ड और सिल्वर. इन्हें महत्वपूर्ण धातुओं के रूप में जाना जाता है. ये महत्वपूर्ण इसलिए हैं कि ये अकेले रहते हैं और शायद ही किसी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं.

ये तत्व भी बहुत अधिक दुर्लभ हैं, जो किसी मुद्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मापदंड है.

आवर्त सारणी

अगर लोहे में जंग न भी लगे, तो वह मुद्रा के लिए अच्छा आधार नहीं होगा, क्यों वो आपको आसपास अत्यधिक मात्रा में मिल जाता है.

सोने और चांदी को छोड़कर अन्य उत्कृष्ट धातुओं के साथ अलग तरह की समस्या है कि वो बहुत अधिक दुर्लभ हैं. इनसे बहुत छोटे सिक्के ढलेंगे, जिनके खोने का ख़तरा अधिक होगा.

दुर्लभतम

इन्हें परिष्कृत करना भी काफी कठिन होता है, प्लैटिनम 1768 डिग्री सेंटीग्रेट के तापमान पर पिघलता है. ऐसे में बचते हैं सिर्फ दो तत्व, सोना और चांदी.

दोनों बहुतायत में तो नहीं होते हैं. लेकिन वे दुर्लभ भी नहीं हैं. ये कम तामपान पर पिघल जाते हैं और इन्हें सिक्कों या आभूषणों में ढालना भी आसान होता है.

चांदी गंदी होती है, यह सल्फर के साथ हवा में प्रतिक्रिया करती है. इसलिए सोने को बहुत अहमियत दी जाती है.

सोने के बिस्कुट

यही गुण हैं, जो रासायनिक रूप से अरुचिकर होने के बाद भी सोने को मूल्यवान बनाता है.

आप सोने का एक तेंदुआ बनवा सकते हैं, इसके बाद आप यह उम्मीद कर सकते हैं कि एक हज़ार साल बाद भी वह सेंट्रल लंदन के संग्रहालय के शो केस में अपनी मूल अवस्था में पाया जा सकता है.

पहली बात यह कि इसका कोई स्वभाविक मूल्य नहीं होता है. किसी मुद्रा का वही मूल्य होता है, जो एक समाज के रूप में हम उसे देते हैं. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि दुनिया में कितनी कम मात्रा में सोना उपलब्ध है.

अगर हम सोने की बनी सभी कान की बालियों, कंप्यूटर चिप में लगे सोने, प्री कोलंबिया की सभी सोने की मूर्तियों, सगाई की सभी अंगूठियों को जमा कर उसे पिघला दें तो जितना सोना मिलेगा, वह अनुमानत, 20 मीटर के घनाकार के बराबर या उसके आसपास होगा.

सुनहरा रंग

लेकिन केवल इसकी कमी और इसकी स्थिरता ही ऐसे गुण नहीं हैं. इसका एक और गुण है जो इसे मुद्रा के लिए आवर्त सारणी के तत्वों में से इसे अकेला दावेदार बनाता है, वह है इसका सुनहरा रंग.

तांबे को छोड़कर आवर्त सारणी की अन्य धातुएं चांदी के रंग की है. हम यह जानते हैं कि हवा के संपर्क में आकर तांबे का रंग हरा हो जाता है. सोने का सुनहरा रंग उसे विशिष्ट बनाता है.

प्रो. एंड्रिया कहती हैं, "मुद्रा के रूप में सोने की सफलता का एक और रहस्य है कि सोना अविश्वसनीय रूप से सुंदर है."

लेकिन वास्तव में अब मुद्रा के रूप में कोई भी सोने का प्रयोग नहीं करता है. अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन ने वर्ष 1973 में अमरीकी डॉलर और सोने के संबंध को तोड़ने का फैसला किया.

निक्सन ने यह फैसला बहुत ही साधारण कारणों से लिया, वह यह कि अमरीका के पास डॉलर छापने के जरूरी सोना नहीं था.

यहां सोने के साथ समस्या यह है कि अर्थव्यवस्था और इसकी आपूर्ति में कोई संबंध नहीं है. सोने की आपूर्ति इस बात पर निर्भर करती है कि इसका खनन कितना हो रहा है.

दक्षिण अमरीका में 16वीं शताब्दी में सोने की खानों की खोज के बाद सोने की क़ीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आई. वहीं बाकी चीजों की क़ीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई.

अमरीका में वर्ष 1930 में आई महामंदी के समय बहुत से देशों की अर्थव्यवस्था इसलिए बच गई क्योंकि उन्होंने अपनी मुद्रा को सोने से नहीं जोड़ा. इससे वे और मुद्रा छापने के लिए स्वतंत्र थे और उनकी अर्थव्यवस्था बच गई.

सोने की मांग में भारी अंतर हो सकता है. एक निश्चित आपूर्ति की दशा में इसकी क़ीमतों में भारी बढ़ोतरी भी हो सकती है.

इसे उदाहरण के रूप में ऐसे समझ सकते हैं, वर्ष 2001 में सोने की क़ीमत 260 डॉलर प्रति औंस थी. यह सितंबर 2011 में बढ़कर 1921 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गई. अभी इसकी क़ीमत गिरकर 1230 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गई है.

इस सबके बावजदू चर्चिल ने इसकी व्याख्या सबसे अधिक संभावना वाली मुद्रा के रूप में की थी.

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