सुनहरी खदानों में स्याह बचपन

ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ तंज़ानिया में सोने की खदानो में काम करने वाले हज़ारों बच्चों की ज़िंदगी पर बीमारियों और मौत का ख़तरा मंडरा रहा है.देखिए तस्वीरों की ज़ुबानी

तंज़ानिया अफ्रीका का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है.ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ यहां की छोटी सोना खदानों में हज़ारों बच्चे काम करते हैं. कुछ की उम्र तो आठ साल तक है.15 वर्षीय एज़ेकेल एस का कहना है कि वो कई बार सोना निकालते हुए मर्करी यानी पारे का धुआं अंदर खींच लेते हैं.
इमेज कैप्शन, तंज़ानिया अफ्रीका का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है.ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ यहां की छोटी सोना खदानों में हज़ारों बच्चे काम करते हैं. कुछ की उम्र तो आठ साल तक है.15 वर्षीय एज़ेकेल एस का कहना है कि वो कई बार सोना निकालते हुए मर्करी यानी पारे का धुआं अंदर खींच लेते हैं.
13 वर्षीय रिचर्ड का कहना है कि उसने पैसों के लिए खदान में काम करना शुरू किया.जिस खदान में वो काम करता था एक दिन वो ढह गई जिससे वो सीने तक दब गया औऱ एक हफ़्ता अस्पताल में गुज़रा.अब भी उसे कभी-कभी दर्द होता है.वह खदान में लौटना नहीं चाहता, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर जाना पड़ता है.
इमेज कैप्शन, 13 वर्षीय रिचर्ड का कहना है कि उसने पैसों के लिए खदान में काम करना शुरू किया.जिस खदान में वो काम करता था एक दिन वो ढह गई जिससे वो सीने तक दब गया औऱ एक हफ़्ता अस्पताल में गुज़रा.अब भी उसे कभी-कभी दर्द होता है.वह खदान में लौटना नहीं चाहता, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर जाना पड़ता है.
रिचर्ड कहता है कि ''मुझे खनन का काम बिल्कुल अच्छा नहीं लगता. मैं स्कूल जाना चाहता हूं लेकिन अपनी किताबों औऱ यूनिफॉर्म के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं. मैं खनन करता हूं ताकि ये चीज़े ख़रीद सकूं वरना कभी ना करूं. मैं एक टीचर बनना चाहता हूं.''
इमेज कैप्शन, रिचर्ड कहता है कि ''मुझे खनन का काम बिल्कुल अच्छा नहीं लगता. मैं स्कूल जाना चाहता हूं लेकिन अपनी किताबों औऱ यूनिफॉर्म के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं. मैं खनन करता हूं ताकि ये चीज़े ख़रीद सकूं वरना कभी ना करूं. मैं एक टीचर बनना चाहता हूं.''
रिपोर्ट के मुताबिक़ बच्चे ज़मीन के नीचे काफ़ी गहराई तक खुदाई करते हैं, असुरक्षित गड्ढों के भीतर काम करते हैं. ज़मीन के काफ़ी नीचे तक काम के घंटे 24 घंटों तक खिंच जाते हैं और सोने के भारी बोरों को भी उठाते हैं.
इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के मुताबिक़ बच्चे ज़मीन के नीचे काफ़ी गहराई तक खुदाई करते हैं, असुरक्षित गड्ढों के भीतर काम करते हैं. ज़मीन के काफ़ी नीचे तक काम के घंटे 24 घंटों तक खिंच जाते हैं और सोने के भारी बोरों को भी उठाते हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच में रिसर्च फ़ेलो जेनाइन मौरिना का कहना है, ''तंज़ानिया में बच्चे खदानों की तरफ़ जाते हैं बेहतर भविष्य की चाह में, लेकिन हाथ आती है सिर्फ़ ख़तरे और निराशा से भरी ज़िंदगी.
इमेज कैप्शन, ह्यूमन राइट्स वॉच में रिसर्च फ़ेलो जेनाइन मौरिना का कहना है, ''तंज़ानिया में बच्चे खदानों की तरफ़ जाते हैं बेहतर भविष्य की चाह में, लेकिन हाथ आती है सिर्फ़ ख़तरे और निराशा से भरी ज़िंदगी.
सोना खदानों में काम कर रहे बच्चों को पारे से होने वाले ज़हरीले प्रभाव का ख़तरा. काम ना करने वाले बच्चे भी अक्सर इन जगहों पर मौजूद होते हैं जैसे ये चार साल की बच्ची एक पारा युक्त तालाब के पास बैठी है.
इमेज कैप्शन, सोना खदानों में काम कर रहे बच्चों को पारे से होने वाले ज़हरीले प्रभाव का ख़तरा. काम ना करने वाले बच्चे भी अक्सर इन जगहों पर मौजूद होते हैं जैसे ये चार साल की बच्ची एक पारा युक्त तालाब के पास बैठी है.
12 वर्षीय ये लड़की हथौड़े की मदद से अयस्क से सोना निकालती है. वो बताती है'' एक दिन हथौड़ा का कोना मुझे लग गया. बहुत सारा ख़ून निकला था.''कई घंटों तक पैदल चल कर खदान तक पहुंचने वाली इस बच्ची को दिन भर में एक या दो डॉलर मिलते हैं.
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ज़्यादातर बच्चे और वयस्क भी इन ख़तरों से अनजान हैं. स्वास्थ्यकर्मी ना तो प्रशिक्षित हैं और ना पारे के ज़हरीले प्रभाव से होने वाले ख़तरों से बचने के लिए उनके पास कोई उपाय हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पारे से संबंधित क़ानून उसके इस्तेमाल को रोक नहीं पाए हैं.
इमेज कैप्शन, ज़्यादातर बच्चे और वयस्क भी इन ख़तरों से अनजान हैं. स्वास्थ्यकर्मी ना तो प्रशिक्षित हैं और ना पारे के ज़हरीले प्रभाव से होने वाले ख़तरों से बचने के लिए उनके पास कोई उपाय हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पारे से संबंधित क़ानून उसके इस्तेमाल को रोक नहीं पाए हैं.
इस मानवाधिकार समूह का ये भी कहना है कि इन खनन क्षेत्रों में और आसपास, लड़कियों का यौन शोषण भी होता है और यौन कर्म के लिए मजबूर हो जाती हैं.व्यावसायिक यौन शोषण का शिकार होने वाली लड़कियों में एचआईवी संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है.
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ह्यूमन राइट्स वॉच ने जितने भी सोना व्यापारियों से बातचीत की उनमें से ज़्यादातर ये मानते हैं कि बच्चों को इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखना लगभग नामुमकिन है.
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ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि तंज़ानिया सरकार को इन छोटी सोना खदानो में बच्चों के इस्तेमाल को कम करना चाहिए और विश्व बैंक व दूसरे दानदाता देशों को इसमें मदद करनी चाहिए.
इमेज कैप्शन, ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि तंज़ानिया सरकार को इन छोटी सोना खदानो में बच्चों के इस्तेमाल को कम करना चाहिए और विश्व बैंक व दूसरे दानदाता देशों को इसमें मदद करनी चाहिए.
शोधकर्ता जेनाइन मोरना कहती हैं कि तंज़ानिया औऱ दानकर्ता देशों को इन बच्चों को स्कूल या व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र भेजना चाहिए.इनमें से कुछ बच्चें कक्षाओं में जाते हैं लेकिन काम उसके आड़े आता है.
इमेज कैप्शन, शोधकर्ता जेनाइन मोरना कहती हैं कि तंज़ानिया औऱ दानकर्ता देशों को इन बच्चों को स्कूल या व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र भेजना चाहिए.इनमें से कुछ बच्चें कक्षाओं में जाते हैं लेकिन काम उसके आड़े आता है.