ब्लॉकबस्टर के दीवालिया होने की कहानी!

- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
बात 17 साल पुरानी है. सॉफ़्टवेयर इंजीनियर रीड हेस्टिंग्स 'अपोलो 13' फ़िल्म की वीडियो कैसेट लेकर अपने पड़ोस में मौजूद अमरीका की सबसे बड़ी वीडियो चेन 'ब्लॉकबस्टर' के काउंटर पर पहुंचे.
कैसेट का किराया था पांच डॉलर, देर से लौटाने के लिए उन्हें जो जुर्माना भरना पड़ा वो था 40 डॉलर!
बात चुभ गई. पत्नी तक को नहीं बताया क्योंकि डांट पड़ती, ग़ुस्से को पी गए और ठीक दो साल बाद एक कंपनी खोल दी जिसका नाम रखा नेटफ़्लिक्स.
ये कंपनी पहले सिर्फ़ डा़क के ज़रिए लोगों के घरों तक वीडियो कैसेट पहुंचाती थी, फिर इंटरनेट पर स्ट्रीमिंग की भी शुरूआत कर दी.
इस हफ़्ते 'ब्लॉकबस्टर' ने अमरीका के कोने-कोने मे मौजूद अपने 300 स्टोर्स बंद करने का एलान कर दिया. 3,000 लोगों की नौकरियां गईं.
साल 2004 में पूरे अमरीका में 9,000 'ब्लॉकबस्टर' स्टोर थे, अब सिर्फ़ 30 या 40 रह जाएंगे जो 'ब्लॉकबस्टर' का नाम इस्तेमाल करते हैं.
दीवालिया
कहा जा रहा है कि 'ब्लॉकबस्टर' को दीवालिया कर दिया उसी इंटरनेट कंपनी 'नेटफ़्लिक्स' ने जिसके मालिक ने 17 साल पहले एक वीडियो कैसेट देर से लौटाने पर 40 डॉलर का जुर्माना भरा था.
आखिर स्टोर तक जाने की ज़हमत कोई क्यों उठाए, जब घर बैठे ही अपनी मनपसंद फ़िल्म मिल रही हो और जुर्माना भी नहीं हो.
'ब्लॉकबस्टर' अमरीकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी थी.
हर शुक्रवार की शाम लोग अपने पसंद की कैसेट और फिर बाद में डीवीडी लेने इन विशाल स्टोर में आते थे, बिल्कुल अनजान चेहरे किसी कोने में खड़े होकर फ़िल्म की समीक्षा कर रहे होते थे और कुछ फ़िल्मों में इस तरह की मुलाक़ातों को प्रेम कहानियों के सेट-अप शॉट की तरह भी इस्तेमाल किया गया.
लेकिन आज 'ब्लॉकबस्टर' की मौत पर आंसू बहाने वाले गिने-चुने ही हैं. वैसे भी अब ईंट और गारे की दीवारों के अंदर मिलने-मिलाने का ज़माना लद रहा है. अब तो मुलाक़ातें हों या प्रेमालाप--सबकुछ बादलों यानी क्लाउड पर बसी ट्विटर और फ़ेसबुक पर ही हो रहा है.
विडंबना
विडंबना ये भी है कि जब 'ब्लॉकबस्टर' के बंद होने की ख़बर आ रही थी, उसी समय ट्विटर कंपनी बाज़ार में अपने शेयर लॉन्च कर रही थी और कमाई अरबों डॉलर की हुई. और उससे भी बड़ी विडंबना ये कि उसी ट्विटर पर किसी 'ब्लॉकबस्टर' प्रेमी ने एक कड़ी शुरू की #BlockbusterMemories यानी 'ब्लॉकबस्टर' से जुड़ी अपनी यादें ट्विटर पर भेजिए.

जिस तरह से मकड़ी धीरे-धीरे अपना जाल फैलाकर शिकार को अपने शिकंजे में कसती जाती है कि वो फिर हिल-डुल न सके, कभी-कभी लगता है इंटरनेट का ये जाल भी दुनिया को कुछ उसी तरह कस रहा है.
कभी ये शिकंजा लगता है तो कभी आलिंगन, अगले दस बरसों में इसका रूप क्या होगा ये देख पाने की दूरदृष्टि कम से कम मुझ में तो नहीं है. बादलों का देश रूमानी ज़रूर लगता है लेकिन वहां बसना कुछ अजीब सा है.
ऐसी कई चीज़ें जिन्हें हम छू सकते थे, टटोल सकते थे, सूंघ सकते थे वो अदृश्य रूप ले चुकी हैं. उनका डिजिटाइज़ेशन हो चुका है. वो गोल हैं या चौकोर, गर्म है या ठंडी नहीं मालूम.
धीरे-धीरे हम सब भी डिजिटाइज़ हो रहे हैं. शायद वो वक्त भी आएगा जब हाथों में हाथ डालने का एहसास, सांसों की गर्मी का एहसास, जाड़े की धूप का एहसास, बारिश की फुहार का एहसास--सब डिजिटाइज़ हो जाएंगे.
'ब्लॉकबस्टर' किराए पर दी जाने वाली वीडियो कैसेट पर लिखता थी--"बी काइंड, प्लीज़ रीवाइंड"--यानी लौटाने से पहले कैसेट को रीवाइंड करके लौटाएं.
अफ़सोस कि 'ब्लॉकबस्टर' अपनी किस्मत को रीवाइंड नहीं कर सकता, और न ही हम.
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