कितनी हैसियत है ट्विटर की?

- Author, साराह ट्रीनर
- पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़
एक तरफ़ शेयर मार्केट में ट्विटर की बहुप्रतीक्षित लॉन्चिंग हो रही है, दूसरी तरफ इस पर बहस तेज़ हो गई है कि कैसे एक घाटे में चलने वाली माइक्रोब्लॉगिंग साइट की क़ीमत 18 अरब डॉलर तय की गई है.
तथ्य अपने आप में विरोधाभासी लगते हैं. ट्विटर की विकास दर धीमी है और मुनाफ़े के कोई संकेत भी नहीं दिख रहे. यह लगातार घाटे में है.
2013 की तीसरी तिमाही में ट्विटर का घाटा बढ़कर 646 लाख डॉलर हो गया, जो पिछले साल 216 लाख डॉलर तक था.
यही नहीं, इसके कुल 50 करोड़ पंजीकृत यूजर्स में आधे इसे इस्तेमाल तक नहीं करते.
ऐसे में सवाल यह है कि सोशल मीडिया की इन कंपनियों का मूल्य कैसे तय होता है?
मूल्य बनाम कुल कीमत
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में महज सात साल पुरानी इस कंपनी की बाज़ार क़ीमत 20 अरब डॉलर के पार हो जाएगी.
यह क़ीमत 9.3 अरब डॉलर की पूंजी वाली बहुराष्ट्रीय कार निर्माता कंपनी फिएट के दुगने के बराबर है.
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में फाइनेंस के प्रोफेसर अस्वथ दामोदरन ने बीबीसी को बताया कि यह घर खरीदने जैसा है.
उनका मानना है कि ट्विटर की क़ीमत असल में बैंकरों और ब्रोकरों का आंकलन भर है, न कि वास्तविक मूल्यांकन. यह कीमत तुलनात्मक है.
इसका मतलब है कि मूल्य निर्धारण कहीं ज़्यादा जटिल और भावनात्मक प्रक्रिया है जबकि क़ीमत का आंकलन अब तक की तुलनाओं पर आधारित होता है.
ट्विटर और फेसबुक

प्रोफेसर अस्वथ दामोदरन के अनुसार, ''फ़ेसबुक और ट्विटर में सबसे बड़ा अंतर यह है कि जब 2012 में फ़ेसबुक ने अपना आईपीओ लॉन्च किया, तो वह मुनाफा बना रही थी जबकि ट्विटर घाटा उठा रही है.''
जब फ़ेसबुक ने अपने शेयर बाज़ार में उतारे, तो इसके एक अरब सक्रिय यूज़र थे, जबकि ट्विटर की कुल यूज़र संख्या 50 करोड़ है. उसमें भी केवल 23.2 करोड़ ही सक्रिय हैं. हालांकि इस मामले में पिछले साल उसकी विकास दर 39 प्रतिशत रही.
विश्लेषक प्यू इंटरनेट की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अमरीका के कुल इंटरनेट यूज़र्स में 72 प्रतिशत सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन केवल 18 प्रतिशत ही ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं.
कम शब्दों में अभिव्यक्ति के कारण बहुत से लोग इसे इस्तेमाल नहीं करते, जबकि बहुत से यूज़र्स केवल ख़बरों और सेलेब्रिटीज़ को ही फ़ॉलो करते हैं.
इससे होता यह है कि साइट पर यूज़र-समय में और कमी आ जाती है. नतीजा यह कि विज्ञापनदाताओं के लिए यूज़र्स का ध्यान आकर्षित कर पाना ज़्यादा चुनौती भरा हो जाता है.
'लॉन्ग शॉट'
दामोदरन का कहना है कि ट्विटर का मूल्य 10 से 15 अरब डॉलर के बीच होना चाहिए. हाल ही में उन्होंने लिखा कि 20 अरब डॉलर की क़ीमत आंकना 'लॉन्ग शॉट' है.
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की बदलती हुई पसंद के अनुरूप सोशल मीडिया कंपनियों की संवेदनशीलता भी इन कंपनियों के मूल्यांकन को और चुनौतीपूर्ण बना देती है.
ट्रैवल वेबसाइट लास्टमिनटडॉटकॉम की सह संस्थापिका मार्था लेन फॉक्स ने बीबीसी को बताया कि ट्विटर के मुनाफे के बारे में वे निश्चिंत हैं.
चूंकि इंटरनेट विज्ञापन की कुल आमदनी का 70 फ़ीसदी मोबाइल से आता है, इसलिए लेन फॉक्स और दूसरे कई लोगों को भरोसा है कि ट्विटर आने वाले समय में तेज़ी से विकसित होगा.
फेल भी हुए हैं आंकलन

दरअसल, इन कंपनियों का मूल्य निर्धारण भविष्य में उनकी सेवा की मांग और विज्ञापन की संभावना के आधार पर किया जाता है लेकिन भविष्य का कोई ठिकाना नहीं.
प्रसिद्ध आईटीवी ने 2005 में फ्रेंड्स यूनाइटेड वेबसाइट को 17.5 करोड़ डॉलर में खरीदा था, लेकिन 2009 में ब्राइटसॉलिड ने इसे महज़ 2.5 करोड़ डॉलर में खरीदा.
इसी तरह की समस्या से शुरुआती सोशल मीडिया कंपनियों को भी दो-चार होना पड़ा.
2005 में न्यूज़ कॉर्पोरेशन ने मायस्पेस को 58 करोड़ डॉलर में ख़रीदा था. जब 2011 में इसे फिर बेचा गया, तो इसकी क़ीमत 3.5 करोड़ डॉलर आंकी गई.
मायस्पेस के सबक़
सेनफ्रांसिस्को स्थित सीबीएस टेक्नोलॉजी विश्लेषक लैरी मैगिड कहते हैं, ''मायस्पेस की घटना हमेशा याद दिलाती है कि बहुत समृद्ध सेवा भी अपनी चमक खो देती है. हालांकि यह सबक़ फ़ेसबुक जैसी वेबसाइटों के लिए काम नहीं आया.''
वे कहते हैं, ''सफल होने के लिए ट्विटर को अलग-अलग किस्म के उन यूज़र्स में पैठ बनाने की ज़रूरत है, जिनकी जनसांख्यिकी एक जैसी हो. मायस्पेस ने अपना पूरा ज़ोर युवाओं पर दे रखा था. वह ऐसा वर्ग है, जिसकी प्रकृति बहुत अस्थायी होती है.''
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