अफ़गानिस्तान में तालिबानी लड़ाकों का हमला

अफ़गानिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार बदख़्शाँ प्रांत में तालिबानी लड़ाकों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में 18 अफगान पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई और 13 अन्य घायल हो गए.
उस समय ये अधिकारी प्रांत की राजधानी से घुसपैठियों के ख़िलाफ़ कारर्वाई करने के बाद वारदूज ज़िले के रास्ते से वापस लौट रहे थे.
हालांकि पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाके अपेक्षाकृत शांत रहते हैं, लेकिन वारदूज ज़िला काफी अस्थिर हो गया है.
इस हमले की जिम्मेदारी तालिबानने ली है.
तालिबान ने एक वक्तव्य जारी करके कहा कि हमले के बाद उन्होंने हथियार और गाड़ियां ज़ब्त कर ली हैं और कुछ मृतकों के शवों को इलाक़े के वरिष्ठ लोगों को सौंप दिया गया है.
इस वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि इस सप्ताह क्षेत्र में पुलिस ऑपरेशन में 47 विद्रोही मारे गए.
गृह मंत्रालय ने पुलिस अधिकारियों की मौत के जाँच का आदेश दे दिया है.
दुर्गम क्षेत्र
इसी साल मार्च महीने में वारदूज ज़िले में 16 सैनिकों की हत्या कर दी गई थी, जबकि 2010 में ब्रिटिश डॉक्टर कारेन वू की बदख़्शाँ प्रांत में छह अमरीकी, एक जर्मन और दो अफ़गान अनुवादकों के साथ हत्या कर दी गई थी.
बदख़्शाँ पामीर और हिंदुकुश पहाड़ियों की पर्वत श्रंखला में स्थित है.
काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी ने बताया कि यह इलाक़ा काफी दुर्गम होने के कारण विद्रोहियों के लिए बहत सुरक्षित है.
2014 के पहले अफ़गानिस्तान से विदेशी सेनाओं की वापसीहोनी है. बहुत से लोगों को आशंका है कि इससे तालिबान और उनके समर्थकों को मजबूती मिलेगी.
नेटो सेनाएं धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारी अफ़गानिस्तान के सैनिकों को सौंप रही हैं, जो वर्तमान में 90 फीसदी सुरक्षा ऑपरेशनों के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
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