तालिबान का अफ़ग़ान सरकार के साथ सीधी बातचीत से इंकार

अफ़ग़ान तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के साथ सीधी बातचीत की ख़बर से इंकार किया है.

एक तालिबान प्रवक्ता के वक्तव्य में कहा गया है कि ये ख़बर महज़ पश्चिमी प्रचार है जिसका मक़सद अफ़ग़ान सरकार और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के सामने आ रही अड़चनों पर पर्दा डालना है.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान से आ रही ख़बरों में कहा गया था कि पहली बार तालिबान और अफ़ग़ान सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले एक गुट के बीच सीधी बातचीत हुई है.

अमरीका और पाकिस्तान भी शामिल?

बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवारी ने वरिष्ठ अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले से बताया कि ये मुलाक़ात दुबई में अफ़ग़ानिस्तान शांति परिषद, हाई पीस काउंसिल के सचिव मासूम स्तानकज़ई और क़तर में तालिबान के दफ़्तर के सदस्यों के बीच हुई.

माना जा रहा है कि बैठक की तैयारी अमरीका ने की थी और इसमें अमरीका के कहने पर पाकिस्तान भी शामिल था.

अफ़ग़ान सरकार और अमरीका कहते रहे हैं कि तालिबान के साथ बातचीत तभी होगी जब संगठन हिंसा का रास्ता छोड़े, अल-क़ायदा के साथ रिश्ते तोड़े और अफ़ग़ानिस्तान के संविधान को सम्मान दे. अफ़ग़ान संविधान को मान्यता देने में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करना भी शामिल है.

इस साल के शुरुआत में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अफ़ग़ान सरकार से बिना सलाह-मशविरा किए अमरीका और तालिबान के शांति वार्ता करने की कोशिश पर नाराज़गी जताई थी.

मंगलवार को जारी एक वक्तव्य में तालिबान नेता मुल्ला उमर ने कहा कि उनका संगठन, ''इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक सम्मिलित सरकार'' के लिए अफ़ग़ान लोगों के साथ एक समझौते पर पहुंचना चाहता है.

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