अफ़गानिस्तान में सत्ता पर क़ब्ज़ा नहीं: मुल्ला उमर

अफगानिस्तान में तालिबान के नेता मुल्ला उमर ने कहा है कि विदेशी सेनाओं के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद उनके लड़ाके सत्ता पर एकाधिकार स्थापित नहीं करेंगे.
ईद से पहले दिए एक भाषण में उमर ने कहा है कि तालिबान “इस्लामिक सिद्धांतों पर आधारित एक समावेशी सरकार” के लिए अफगानिस्तान के लोगों से सहमति कायम की कोशिश करेगा.
पढ़िए : <link type="page"><caption> अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान की चिंता</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130620_afghan_pak_america_taliban_vr.shtml" platform="highweb"/></link>
मुल्ला उमर 2001 से छिपे हुए हैं और उन पर एक करोड़ अमरीकी डॉलर यानी करीब 60 करोड़ रुपए का इनाम है.
काबुल में बीबीसी संवाददाता कारेन एलेन का कहना है कि विश्लेषकों ने मुल्ला उमर के बयान को ‘असली’ बताया है.
'चुनाव नहीं छल'
मुल्ला उमर ने अगले साल होने वाले चुनावों की भी आलोचना की है.
अपने बयान में मुल्ला उमर ने कहा है, “जहां तक 2014 में चुनाव के नाम पर होने वाले छल भरे नाटक का सवाल है, हमारे धर्मनिष्ठ लोग ख़ुद को थकाएंगे नहीं और न ही इसमें हिस्सा लेंगे.”
मुल्ला उमर ने कहा, “चुनाव में कौन जीतेगा, इस बात का असल फैसला तो वॉशिंगटन में होता है. ऐसे चुनावों में हिस्सा लेना वक़्त की बर्बादी से ज़्यादा कुछ नहीं है.”
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन चुनाव को 2001 में तालिबान के पतन के बाद अफगानिस्तान के विकास की असली परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

पिछले चुनावों में तालिबान ने अफगानिस्तान के लोगों से वोट न देने को कहा था. तालिबान लड़ाकों ने मतदान केंद्रों के रास्ते रोके थे और उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया था.
मुल्ला उमर ने हाल के कुछ बरसों में हर साल ईद से पहले अफगान लोगों को संबोधित करते हुए संदेश दिया है.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा माना जाता है कि मुल्ला उमर पाकिस्तान में रहते हैं. वो 2001 में अफगानिस्तान से भागने के बाद से कभी भी सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई दिए हैं और न ही उन्होंने कोई सार्वजनिक भाषण दिया है.
अमरीका की अगुवाई वाली सेनाओं ने अमरीका में 11 सितंबर 2001 को हुए हमले के बाद अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता से हटा दिया था.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












