एके एंटनी का चीन दौरा, वार्ता से पहले चेतावनी

भारत के रक्षामंत्री एके एंटनी चार दिवसीय दौरे पर चीन पहुंच गए हैं. इसी बीच चीन की सेना के मेजर जनरल लुवो युवान का वक्तव्य आया है कि भारत पहले से चले आ रहे <link type="page"><caption> सीमा विवाद </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130520_manmohan_li_ml.shtml" platform="highweb"/></link>में नई मुश्किलें खड़ी न करे.
सात साल बाद भारत का कोई रक्षामंत्री चीन के दौरे पर है. शुक्रवार को एके एंटनी की चीन के रक्षामंत्री जनरल चांग वैंकुआन के साथ सीमा पर शांति बहाली और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर बात होने की संभावना है.
इस दौरे पर दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और समन्वय के समझौता पत्र पर बात होनी है. चीन चाहता है कि भारत इस पर हस्ताक्षर करे. भारत समझौते के मसौदे से पूरी तरह सहमत नहीं है.
पीएलए की चेतावनी
बीजिंग में वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता ने बीबीसी को बताया कि चीनी सेना में भारत के प्रति बहुत गुस्सा है. विदेश मंत्रालय अपनी कोशिशों के बावज़ूद इस गुस्से को कम नहीं कर पाई है. यह गुस्सा बहुत पुराना है.
सेना के उच्चाधिकारी की चेतावनी से पता चलता है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानि पीएलए <link type="page"><caption> बातचीत की दिशा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130519_indiachina_relations_analysis_akd.shtml" platform="highweb"/></link> को तय करने की भूमिका बना रहा है.
चीन के बड़े अफसर ने पहली बार 90,000 वर्ग किलोमीटर की बात की है कि इतनी ज़मीन पर भारत बैठा हुआ है, जो हमारी ज़मीन है.
भारत पर दबाव

चीन ने भारत को सीमा समझौते का जो ड्राफ्ट दिया था, उस पर भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं क्योंकि भारत को कई बिंदुओं पर आपत्ति है.
शिव शंकर मेनन ने चीन के दौरे पर कहा था कि भारत इस समझौते की बातों से सहमत नहीं है. लेकिन उन्होनें ये नहीं बताया था कि समझौते के किन बिंदुओं पर सहमति है.
सैबल दास गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि एंटनी के चीन दौरे पर उस ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करने की बात हो रही है और दबाव डाला जा रहा है. चीन ने आपको जिस तरह ड्राफ्ट दिया है, उस पर हस्ताक्षर करके आपको दुनिया को बताना है कि हम लोगों ने सीमा विवाद को सुलझा लिया है.
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