बिना पासपोर्ट भी यात्रा संभव, मगर कैसे?

लोगों की इंटरनेट और फ़ोन गतिविधियों पर नज़र रखे जाने के अमरीकी कार्यक्रम की जानकारी लीक करने वाले एडवर्ड स्नोडेन अमरीका प्रत्यर्पण से बचने का प्रयास कर रहे हैं और उन्होंने लातिन अमरीकी देश इक्वाडोर से राजनीतिक शरण मांगी है.
जासूसी का आरोप झेल रहे अमरीकी नागरिक स्नोडेन 23 जून को हॉन्गकॉन्ग से मॉस्को चले गए जिसमें उन्होंने अमरीकी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था.
स्नोडेन के वकील के अनुसार अब उन्होंने <link type="page"><caption> इक्वाडोर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130624_edward_snowden_row_aa.shtml" platform="highweb"/></link> से राजनीतिक शरण मांगी है.
लेकिन स्नोडेन के पास फ़िलहाल कोई वैध पासपोर्ट नहीं हैं. अमरीकी विदेश मंत्रालय ने स्नोडेने का पासपोर्ट रद्द कर दिया है और दूसरे देशों से कहा है कि वो स्नोडेन को यात्रा करने से रोकें.
सोमवार को क्यूबा जाने वाली एक फ़्लाइट में उनके नाम से एक सीट बुक की गई थी लेकिन वो विमान में नहीं देखे गए.
ऐसे में सवाल उठता है कि बिना <link type="page"><caption> पासपोर्ट</caption><url href="Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/07/120725_flying_boy_england_jk.shtml" platform="highweb"/></link> के आप किन हालात में क़ानूनी तौर पर यात्रा कर सकते हैं?
'विशेष पहचान पत्र'
विकीलीक्स के संस्थापक <link type="page"><caption> जूलियन असांज</caption><url href=" Details Setup & Layout Main Promotion Social Media Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120820_asaange_support_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> के अनुसार स्नोडेन के पास 'स्पेशल रिफ़्यूजी ट्रैवेल डॉक्यूमेंट' है जो इक्वाडोर ने दिया है.
लाख़ों शरणार्थी हर रोज़ बिना पासपोर्ट के एक देश से दूसरे देश जाते हैं.

शरणार्थियों की देखभाल के लिए बनी संस्था यूएनएचसीआर के एक अधिकारी लैरी यंग के अनुसार पासपोर्ट नहीं होने की स्थिति में शरणार्थियों को अपनी पहचान के कई सुबूत देने पड़ते हैं.
अमरीका हर साल लगभग 60 हज़ार लोगों को अपने यहां शरण देता है और उनमें से बहुत कम लोगों के पास वैध पासपोर्ट होता है.
अमरीका के होमलैंड सिक्यूरिटी विभाग के अधिकारी शरण मांगने वालों से सीधी बातचीत करते हैं और पता लगाने की कोशिश करते हैं कि वे सचमुच में शरणार्थी हैं या नहीं और उन्हें अमरीका में आने की इजाज़त दी जानी चाहिए या नहीं.
पासपोर्ट की जगह पर आई-94 नाम का दस्तावेज़ उन्हें दिया जाता है और उनके अमरीका जाने का प्रबंध किया जाता है.
ब्रिटेन और कनाडा भी इसी तरह के दस्तावेज़ जारी करता है.
अमरीका में शरणार्थियों की समिति की अध्यक्ष लैविनिया लिमोन के अनुसार ये देश के ऊपर निर्भर करता है कि वो बिना पासपोर्ट के किसी को अपने यहां आने देना चाहता है या नहीं.
प्रत्यर्पण मामलों के वकील डगलस मैक्नैब के अनुसार अगर कोई देश किसी शरणार्थी को सरकारी विमान में यात्रा करने की इजाज़त देता है तो फिर किसी भी दस्तावेज़ की ज़रूरत नहीं.

एक ब्रितानी अख़बार इंडिपेन्डेंट के पत्रकार साइमन कॉलडर के अनुसार विदेश में पासपोर्ट खो जाने या चोरी हो जाने की स्थिति में भी बिना पासपोर्ट के यात्रा की जा सकती है.
इसके अलावा कई देशों के बीच विशेष संबंध होते हैं जिनके तहत वे अपने नागरिकों को एक दूसरे के यहां बिना पासपोर्ट के आने जाने की इजाज़त देते हैं.
मिसाल के तौर पर अमरीकी नागरिक प्यूर्तो रिको और गुआम जैसे अमरीकी क्षेत्रों में बिना पासपोर्ट के सिर्फ़ फ़ोटो पहचान पत्र के ज़रिए यात्रा कर सकते हैं.
इसके अलावा अमरीका और कनाडा के नागरिक एक दूसरे के देश में पहले से स्वीकृत नेक्सस कार्ड के ज़रिए भी आ जा सकते हैं.
अमरीकी नागरिक अगर उत्तरी अमरीकी देशों में ज़मीन या पानी के रास्ते जाना चाहते हैं तो उन्हें पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं.
'विशेष संबंध'
मिसाल के तौर पर अमरीकी नागरिक अगर कैरेबियाई देश या बरमूडा जा रहे हैं तो पासपोर्ट की जगह पर केवल पासपोर्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या मिलिट्री पहचान पत्र से काम चल सकता है.
ब्रिटेन और आयरलैंड के नागरिक भी एक दूसरे के यहां केवल फ़ोटो पहचान पत्र के साथ आ जा सकते हैं.
1995 में 26 यूरोपीय देशों ने एक दूसरे के यहां बिना सीमा नियंत्रण के आने-जाने संबंधी समझौता किया था. लेकिन एयरलाइंस कंपनी चाहे तो यात्रियों की पहचान के लिए पासपोर्ट की मांग कर सकती है.
कुछ क्षेत्रीय समूह जैसे दक्षिण अफ़्रीक़ी देशों का समूह, यूरोपीय संघ, खाड़ी के देशों का समूह गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल और दक्षिण अमरीकी देशों का समूह मर्कोसर, अपने सदस्य देशों के नागरिकों को केवल पहचान पत्र के आधार पर यात्रा करने की अनुमति देते हैं.
ब्रिटेन की महारानी को भी पासपोर्ट की चिंता करने की ज़रूरत नहीं क्योंकि वो अकेली ऐसी ब्रितानी हैं जिन्हें पासपोर्ट की कोई ज़रूरत नहीं होती है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












