वैटिकन: पोप फ्रांसिस की पहली प्रार्थना सभा

रोम के सेंट पीटर्स स्कवेयर में पोप फ्रांसिस के कार्यकाल की पहली प्रार्थना सभा शुरु हुई. इस सभा के आयोजन के साथ ही पोप फ्रांसिस के कार्यकाल की आधिकारिक शुरुआत हो गई.
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले <link type="page"><caption> पोप फ्रांसिस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130314_new_pope_warning_aa.shtml" platform="highweb"/></link> एक खुली गाड़ी पर सेंट पीटर्स स्कवेयर के चारों तरफ घूमे और अपने अनुयायियों को आशीर्वाद दिया.
सभा में दुनिया भर से लाखों लोग शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने अपने सैकड़ों अनुयायियों का अभिवादन हाथ हिला कर किया. वहां हर तरफ से, ''लॉन्ग लिव द पोप यानि पोप की लंबी उम्र हो'' जैसे नारे लग रहें थे.

उन्हें ख़ासतौर पर भेड़ के ऊन से बनाया गया पवित्र लबादा पहनाया गया. इस पवित्र वस्त्र का सांकेतिक मतलब पोप को उस झुंड के नेता का दर्जा देना होता है जो सेंट पीटर्स में इकट्ठा हुए हैं.
इसके बाद पोप को 'फिशरमैन्स रिंग' पहनाई गई जिसमें सेंट पीटर को दो चाबियों को पकड़े हुए दिखाया गया है.
इस समारोह में करीब 180 पादरियों ने हिस्सा लिया जिसमें एडोल्फो निकोलस भी शामिल हैं. एडोल्फो निकोलस जेस्यूईट ऑर्डर में पोप फ्रांसिस से वरिष्ठ हैं.
अमरीकी उप-राष्ट्रपति जो-बाइडन भी समारोह में शामिल हुए.
वैटिकन के अनुसार इस सभा में पूरी दुनिया के विभिन्न चर्चों से 33 समूहों में मेहमान आए. इनमें 16 मेहमानों का एक प्रतिनिधि दल यहूदी समुदाय से होंगे.
पोप फ्रांसिस अपना उपदेश इतालवी भाषा में दिया.
अर्जेंटिना के प्रतिनिधि

इस समारोह में अर्जेंटिना की राष्ट्रपति क्रिस्टिना फर्नांडिस डे-किर्चनर भी शामिल हुई. पोप चुने जाने से पहले पोप फ्रांसिस अर्जेंटिना के ब्यूनस एयर्स चर्च के पादरी थे.
सोमवार को पोप फ्रांसिस ने अर्जेंटिना की राष्ट्रपति का <link type="page"><caption> वैटिकन </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130314_sistine_seagull_skj.shtml" platform="highweb"/></link>में स्वागत किया था. फर्नांडिस ने दौरान कहा कि उन्होंने पोप से फाल्कलैंड मुद्दे पर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच चल रहे विवाद पर हस्तक्षेप करने को कहा है.
इस बीच मंगलवार को ब्यूनस एयर्स के प्रमुख चौराहे पर लगे बड़े टीवी स्क्रीन पर हज़ारों की संख्या में लोग इस प्रार्थणा सभा को देखने के लिए इकट्ठा हुए.
पोप ने इससे पहले के अपने संबोधनों में बार-बार कहा है कि वे ग़रीबों की मदद करने वाला चर्च चाहते हैं.












