तुर्की पर अर्दोआन की पकड़ को चुनौती कैसे दे रहे हैं 'कमाल गांधी'

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- Author, एस गोक्सेदेफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
74 वर्षीय कमाल कलचदारलू अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं.
उन्होंने तुर्की के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को सबसे मज़बूत चुनौती दी है. अर्दोआन ने पिछले 20 सालों तुर्की की सत्ता संभाली हुई है. उनको चुनौती दे पाना अपने आप में एक उपलब्धि है.
तुर्की में हुए पहले चरण के चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को 50% से अधिक मत न मिलने के कारण अब 28 मई को पहले और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवारों के बीच चुनाव होगा.
ये सीधा मुकाबला अर्दोआन और कमाल कलचदारलू के बीच है. निर्णायक मतदान में उनकी संभावनाएं कम दिख रही हैं, लेकिन सौम्य व्यवहार के विपक्षी नेता ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया है कि जीत उनकी मुट्ठी में है.
उन्होंने जोर देकर कहा है, "समाज में बदलाव की इच्छा 50 प्रतिशत से अधिक है." पूर्व ब्यूरोक्रेट कमाल तुर्की के ताक़तवर राष्ट्रपति के विरोधी हैं. हाथों को दिल के आकार का बनाना चुनाव में उनका ट्रेडमार्क चिन्ह था.
उन्होंने अर्दोआन पर तुर्की में एक करोड़ शरणार्थियों के आने की अनुमति देने का आरोप लगाया और दो साल के भीतर 35 लाख सीरियाई शरणार्थियों को घर भेजने का वादा करते हुए मतदाताओं को साधने की कोशिश की है.
2010 में रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के अध्यक्ष के विवाहेतर संबंध की वजह से बाहर होने के बाद कमाल ने पार्टी की कमान संभाली. लेकिन इसके बाद से वे कई चुनाव हार चुके हैं. इसके बावजूद कमाल एक अनुभवी राजनेता हैं. वह 2002 में निर्वाचित हुए थे, ठीक उसी साल अर्दोआन की ए.के पार्टी सत्ता में आई थी.
तुर्की के सबसे ज़्यादा निशाने पर आने वाले राजनेता होने की वजह से उन्होंने कई हिंसक हमले झेलें हैं. कमाल ने 14 मई के मतदान से पहले अपनी अंतिम रैलियों में बुलेट-प्रूफ जैकेट पहनी थी.
एक नेता के तौर पर उन्होंने 13 सालों में अपनी पार्टी की अपील को और व्यापक बनाया है और जैसा कि वे कहते हैं उन्होंने, 'तुर्की के सभी तरह के लोगों को गले लगाया है'.
सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी साधारण रसोई से वीडियो की एक सिरीज़ पोस्ट की है, वीडियो में अक्सर वो कुर्द या अल्पसंख्यक अलेवी होने जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर युवा मतदाताओं को संबोधित करते हैं.
सोशल मीडिया पर उन्होंने अपने साधारण किचन से वीडियो की एक सिरीज़ पोस्ट की है. उन्होंने नरम लहजे में यह कहकर मतदाताओं तक पहुंच बनाई कि वे तुर्की के समाज के अलग-अलग पहलुओं को एकजुट करेंगे.

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कमाल की पार्टी सीएचपी वापस अपने मूल को पार्टी के धर्मनिरपेक्ष संस्थापक कमाल अतातुर्क के सिद्धांतो की ले जाने का वादा करती है.
सीएचपी को लंबे वक़्त तक सेना का करीबी माना जाता रहा है. ये पार्टी तुर्की में धर्मनिरपेक्ष राजनीति के पैरोकार है और इसे एक धर्म और राजनीति को बिल्कुल अलग रखने का सबसे बड़ा हिमायती माना जाता है.
उदाहरण के लिए, 1980 में सैन्य तख़्तापलट के बाद सीएचपी ने स्कूलों और सार्वजनिक सेवाओं में हिजाब पर प्रतिबंध का समर्थन किया.
दिसंबर 1948 में जन्मे कमाल कलचदारलू की माता गृहिणी थी और उनके पिता ब्यूरोक्रेट थे. उनका पालन पोषण तुर्की के पूर्वी शहर तुनसेली में हुआ. वे अपने सात भाई-बहनों में चौथे बच्चे थे.
वह एक अलेवी परिवार से आते हैं. ये एक अलग इस्लामी संप्रदाय और ज्यादातर सुन्नी तुर्की में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है.
पिता की नौकरी की वजह से उनका परिवार तुर्की के कई हिस्सों में रहा, जिसकी वजह से उन्हें कई स्कूलों में दाख़िला लेना पड़ा लेकिन वह हर जगह मेधावी छात्र साबित हुए. बाद में उन्होंने अंकारा विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की.
उन्होंने तुर्की के वित्तीय निकायों में एक सिविल सेवक के तौर पर सालों तक काम किया और सामाजिक सुरक्षा संस्थान के निदेशक के तौर पर भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की ख्याति हासिल की.
संसद में सात सालों के बाद उन्होंने तुर्की की सबसे ताक़तवर और प्रतिष्ठित भूमिकाओं में से एक इस्तांबुल के मेयर के लिए चुनाव लड़ा.
हालांकि वह चुनाव हार गए. लेकिन अपने चुनाव अभियान के लिए उन्हें काफी तारीफ़ मिली. 37% वोट के साथ सीएचपी के लिए एक बहुत ही भरोसेमंद उप-विजेता बन गए.
इसके एक साल के बाद ही सीएचपी के नेता ने एक सीक्रेट वीडियो टेप आने के बाद इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कमाल ने अप्रत्याशित रूप से खु़द को इस पद के लिए प्रमुख उम्मीदवार के तौर पर पेश किया.

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शुरुआत में उन्होंने इस घोटाले का फ़ायदा नहीं उठाने की इच्छा रखते हुए उन्होंने पार्टी में नेतृत्व की उम्मीदवारी से इनकार कर दिया. लेकिन बाद में उनका रुख नरम पड़ गया और पार्टी के नेतृत्व के चुनाव में उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल की.
तब तक रेचेप तैयप अर्दोआन सत्ता के शीर्ष पर थे. वे 2011 के चुनावों में अपने एके पार्टी के लिए लगभग आधा वोट जीतकर तुर्की के सबसे सफल प्रधान मंत्री बन गए थे.
चुनाव में सीएचपी दूसरे स्थान पर थी और पार्टी ने वोट में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की. तब से ही सीएचपी के नेता पार्टी की राजनीति में उलझे हैं और एक चौथाई वोट से आगे जाने की जद्दोजहद में लगे हैं.
उन्होंने रमज़ान के दौरान रोज़ा तोड़ने के लिए इफ़्तार डिनर में शामिल होने जैसे इशारों के जरिए धार्मिक लोगों में पैठ बनाने की कोशिश की है.
सीएचपी में कमाल की पूर्व सहयोगी मेल्दा ओनूर ने कहती हैं, "जब मैं पहली बार उनसे मिली, तो मुझे लगा कि वे एक क्रांतिकारी नहीं बल्कि विकासवादी नेता हैं."
मेल्दा ओनूर का मानना है कि यही वजह है कि कमाल को अपनी पार्टी को नया रूप देने और राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन हासिल करने में 13 साल लग गए.
वित्तीय निकायों में काम करने की वजह से ही वे सख़्त वित्तीय अनुशासन के बारे में जानते-समझते हैं.
उनके करीबी सहयोगी ओकन कोनूरलप ने कहते हैं, "वह किसी भी अनावश्यक चीज़ के लिए कोई अतिरिक्त खर्च करने में बहुत सावधान है."
उन्होंने वक़्त के साथ धार्मिक हस्तियों, कुर्द कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल किया.
ओनूर कहती हैं, "सीएचपी में मर्दों का दबदबा है. कमाल उस दीवार को पूरी तरह से नहीं गिरा सकते हैं लेकिन उन्हें महिलाओं के साथ काम करना पसंद है."

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पार्टी के एक सहयोगी ने बीबीसी को बताया कि कमाल कलचदारलू कभी ऊंची आवाज़ में बात नहीं करते.
वे कहते हैं, "कभी-कभी चीजें हमें परेशान कर देती हैं और हम चिल्लाए बिना नहीं रह पाते. फिर भी कमाल कलचदारलू शांत रहते हैं."
कमाल के सहयोगी कहते हैं कि जैसे ही कोई कमरे में दाखिल होता है तो कमाल खड़े हो जाते हैं और हाथ मिलाते हैं.
इस मृदुभाषी स्वभाव और महात्मा गांधी जैसा दिखने के कारण ही उन्हें कमाल गांधी जैसा उपनाम मिला है.
साल 2014 में जब कमाल अपनी पार्टी के सांसदों को भाषण देने जा रहे थे तब उन्हें एक व्यक्ति ने दो बार घूंसा मारा था. लेकिन गाल और आंख में चोट लगने के बावजूद उन्होंने अपने सहयोगियों से शांत रहने का गुज़ारिश की थी.
तब उन्होंने कहा था, "लोकतंत्र का मार्ग बाधाओं से भरा है."
2016 में उनके काफ़िले पर कुर्द चरमपंथी समूह पीकेके ने एक मिसाइल से हमला किया था और फिर अगले वर्ष वह मिलिटेंट इस्लामिक स्टेट ग्रूप के बमबारी की कोशिश से बचे थे.

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इसके अलावा वह 2019 में एक सैनिक के अंतिम संस्कार में लिंचिंग में बच गए थे. जैसे ही उस पर हमला हुआ, उन्हें पास के एक घर में ले जाया गया, जहां एक महिला ने भीड़ से कमाल को जलाने के लिए कहा था.
जब पुलिस उन्हें सुरक्षा के लिए वहां से ले गई तब बाद में उन्होंने कहा, "ये प्रयास हमें रोक नहीं सकते."
लेकिन 2016 में तुर्की में अर्दोआन का तख़्ता पलटने की असफल कोशिश की गई थी. राष्ट्रपति अर्दोआन ने तख्तापलट की साजिश रचने वालों से जुड़े हजारों तुर्कों को गिरफ्तार किया था.
इसके बाद विपक्षी नेता कमाल कलचदारलू ने अंकारा से इस्तांबुल तक 450 कि.मी (280 मील) पैदल चलकर "मार्च फॉर जस्टिस" की शुरूआत की थी.
अपने मार्च की सफलता के बावजूद, उन्होंने अगले साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनौती नहीं देने का फै़सला किया.
ओकन कोनूरलप कहते हैं, "मैंने कभी कमाल के मुंह से नफ़रत का एक शब्द नहीं सुना. वह किसी से नाराज़ हो सकते हैं लेकिन शांत रहते हैं और फिर उस व्यक्ति को आसानी से माफ़ कर देते हैं."
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