500 दिन गुफा में रही महिला एथलीट ने बाहर निकलकर क्या बताया

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- Author, जॉर्ज राइट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
स्पेन की एथलीट, 500 दिन एक गुफा में बिताकर बाहर आई हैं. इस दौरान उन्होंने बाहरी दुनिया के लोगों के साथ संपर्क नहीं किया. यह एक विश्व रिकॉर्ड हो सकता है.
एथलीट बिट्रिज़ फ्लेमिनी ने जब गुफा में प्रवेश लिया था, उस वक्त रूस ने यूक्रेन पर हमला नहीं किया था और दुनिया तब कोविड महामारी की चपेट में थी.
एथलीट का गुफा में रहना एक प्रयोग का हिस्सा था. इस दौरान वैज्ञानिक उन पर बारीक नज़र रखे हुए थे.
गुफा से बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा, "मैं अभी भी 21 नवंबर, 2021 में अटकी हुई हूं. इसके बाद दुनिया में क्या हुआ, मुझे कुछ नहीं पता."
50 साल की फ्लेमिनी ने जब गुफा में प्रवेश किया था तब उनकी उम्र 48 साल थी. उन्होंने अपना समय 70 मीटर गहरी गुफा में बिताया. गुफा में रहकर वे अक्सर व्यायाम और ऊनी टोपियां बुनने का काम करती थीं.
उनकी सपोर्ट टीम के मुताबिक उनके साथ गुफा में 60 किताबें और एक हज़ार लीटर पानी मौजूद था.
उनकी निगरानी टीम में मनोवैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्पीलेलॉजिस्ट्स शामिल थे, लेकिन किसी भी एक्सपर्ट ने उनके साथ संपर्क नहीं किया.

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क्या था गुफा में रहना?
स्पेनिश टीवीई स्टेशन की एक फुटेज में वे मुस्कुराते हुए गुफा से बाहर निकलती हैं और अपनी टीम से गले मिलती हैं.
गुफा से बाहर निकलने के थोड़ी देर उन्होंने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि ये बहुत शानदार और अपराजेय था.
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं डेढ़ साल से चुप हूं. मैं किसी से नहीं बल्कि खुद से बात कर रही हूं."
उन्होंने बाहर निकलकर काफी कम बात की, लेकिन पत्रकारों से उनसे और अधिक अनुभव साझा करने के लिए दबाव डाला.
उन्होंने कहा, "मैंने अपना संतुलन खो दिया है, इसलिए मुझे पकड़ा हुआ है. क्या आप मुझे नहाने की इजाज़त देंगे, मैंने डेढ़ साल से पानी को छुआ नहीं है. मैं आपसे थोड़ी देर में मिलूंगी. क्या यह आपके लिए ठीक रहेगा?"
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि करीब दो महीने के बाद उन्हें समय का पता नहीं चला.
उन्होंने कहा, "एक समय था जब मुझे दिनों को गिनना बंद करना पड़ा. मुझे लगता है कि मैं 160 से 170 दिनों के लिए गुफा में थी."

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सबसे मुश्किल पल
फ्लेमिनी ने सबसे कठिन क्षण की बात करते हुए कहा कि एक बार गुफा के अंदर मक्खियों का हमला हुआ था और वे पूरी तरह उससे ढक गई थीं.
उन्हें कई बार भ्रम का भी सामना करना पड़ा. इसमें उन्हें कई बार वैसी आवाज़ें सुनाई देती थी जो असल में होती ही नहीं थी.
उन्होंने कहा कि जब आप चुप होते हैं तब दिमाग इस तरह की आवाज़ें खुद में बनाने का काम करता है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है.
इस एक्सपेरिमेंट से वैज्ञानिक यह पता करने की कोशिश में हैं कि इस तरह से गुफा में अकेले रहने पर किसी व्यक्ति पर सोशल आइसोलेशन और समय की धारणा से भटकाव का क्या प्रभाव पड़ता है.
फ्लेमिनी की सपोर्ट टीम का कहना है कि उन्होंने एक गुफा में सबसे लंबे समय तक रहने का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा है, लेकिन गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है कि गुफा में खुद से रहने का ऐसा कोई रिकॉर्ड किसी व्यक्ति ने बनाया है या नहीं.
गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में ऐसे रिकॉर्ड ज़रूर दर्ज हैं जिसमें किसी दुर्घटना के बाद लोग काफी दिनों तक रहने के बाद ज़िंदा बाहर आए हैं.
ऐसा ही एक रिकॉर्ड, 33 चिली और बोलिवियाई मज़दूरों के नाम है. 2010 में चिली में एक तांबे और सोने की खदान ढहने के बाद खदान में काम करने वाले मज़दूर 688 मीटर गहरे फंस गए थे और वे 69 दिनों के बाद बाहर निकल पाए थे.
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