मोलोतोव कॉकटेल क्या है जो कभी सोवियत टैंकों की तबाही की वजह बना था

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हाल ही में जब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस पहुंची तो उसका पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं से आमना-सामना हुआ. पंजाब पुलिस के आईजी डॉक्टर उस्मान अनवर ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पेट्रोल बमों से हमला किया.
आईजी पंजाब उस्मान अनवर ने लाहौर के ज़मान पार्क इलाक़े में पुलिस के ऑपरेशन पर प्रेसवार्ता के दौरान टेबल पर रखी प्लास्टिक की बोतलों की तरफ़ इशारा करते हुए दावा किया कि, "पुलिस ने इमरान ख़ान के घर पर वो जगहें भी देखी हैं जहां पेट्रोल बम तैयार किए जाते थे."
एक प्लास्टिक की बोतल को हाथ में लेते हुए आईजी पंजाब ने पत्रकारों से कहा, "इस पेट्रोल बम में इस जगह पर आग लगाई जाती है, जहां से थोड़ी देर बाद धमाका होता है. इसे आग लगा कर फेंक दिया जाता है."
पुलिस के इन दावों को तहरीक एक इंसाफ़ पार्टी ख़ारिज कर चुकी है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इसे ख़ारिज करते हुए अपने वीडियो संदेश में कहा कि, "ये टीवी पर बैठ कर झूठ बोलते हैं, इन्हें शर्म नहीं आती है."
इमरान ख़ान का कहना था कि, "अहमकों, पेट्रोल बम कोई रॉकेट साइंस नहीं हैं. कभी प्लास्टिक की बोतल में भी पेट्रोल बम आया है? नक़ल के लिए भी अक़ल चाहिए. तुम्हारा सारी दुनिया में मज़ाक उड़ेगा."
इमरान ख़ान ने सोमवार को दिए अपने भाषण में भी पुलिस के इन दावों को ख़ारिज किया.
इन परस्पर विरोधी दावों ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दिया है. कुछ पाकिस्तानियों को ये जान कर हैरानी हो रही है कि पेट्रोल बम नाम की वाक़ई कोई चीज़ होती है क्योंकि इससे पहले वो इस शब्द को सिर्फ़ टीवी चैनलों पर सुनते रहे हैं, ख़ासकर जब सरकार पेट्रोल की क़ीमतें बढ़ाती है और टीवी चैनल जुमला इस्तेमाल करते हैं, 'गिर गया पेट्रोल बम.'

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मोलोतोव कॉकटेल या पेट्रोल बम क्या है और ये कैसे बना?
चाहे आप इसे विरोध के प्रतीक के रूप में देखें या अराजकता फैलाने के हथियार के रूप में, मोलोतोव कॉकटेल या पेट्रोल बम को दुनियाभर में संघर्षों के दौरान आम आदमी के हथियार के रूप में देखा जाता है. ये सस्ता होता है और बड़ा नुक़सान पहुंचाने में सक्षम होता है.
पेट्रोल बम बनाने के लिए आम तौर पर शीशे की बोतल, कपड़ा और पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है. कपड़े की जगह आसानी से आग पकड़ने वाले दूसरे पदार्थ भी इस्तेमाल कर लिए जाते हैं. पेट्रोल के अलावा इसमें अल्कोहल भी इस्तेमाल किया जाता है.
पेट्रोल और अन्य ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी की वजह से जब मोलोतोव कॉकटेल को फेंका जाता है तो ये आग का गोला बन जाता है और घरों, वाहनों या सरकारी दफ़्तरों को नुक़सान पहुंचाने की क्षमता रखता है. इसकी चपेट में आने से गंभीर रूप से चोटिल होने का ख़तरा भी होता है.
बीबीसी हिस्ट्री मैगज़ीन में प्रकाशित एक लेख में लेखिका एम्मा मेसन बताती हैं कि 'मोलोतोव कॉकटेल का इस्तेमाल सबसे पहले स्पैनिश गृहयुद्ध के दौरान 1936 से 1939 के बीच हुआ था. तब स्पैनिश जनरल फ़्रांसिस्को फ़्रैंको, जो बाद में स्पेन के तानाशाह भी बने, ने अपने सैनिकों को मोलोतोव कॉकटेल का इस्तेमाल सोवियत संघ के टैंकों को निशाना बनाने के लिए करने का आदेश दिया था.
लेकिन इस हथियार का नाम मोलोतोव कॉकटेल तब पड़ा जब साल 1939-40 में सोवियत-फ़िनलैंड युद्ध के दौरान इसे अपनाया गया था. सोवियत संघ ने फ़िनलैंड में दख़ल दी थी.
सोवियत संघ के इस हस्तक्षेप का वैश्विक स्तर पर विरोध हुआ था. इसके जवाब में सोवियत विदेशी मंत्री वियाचेस्लाव मोलोतोव ने दावा किया था कि रूस के विमान फ़िनलैंड पर बम नहीं बरसा रहे हैं बल्कि खाने-पीने व अन्य ज़रूरी सामान मदद के रूप में गिरा रहे हैं.
रूसी विदेश मंत्री मोलोतोव के इस बयान के बाद फ़िनलैंड के नागरिकों ने सोवियत बमों को मोलोतोव ब्रेडबास्केट कह कर मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया था. वहीं फ़िनलैंड के लोग घर पर बनाए गए बमों को मोलोतोव कॉकटेल कहने लगे. यानी मोलोतोव के भेजे गए खाने के साथ घर में पी जाने वाली शराब (कॉकटेल). इस तरह इस रक्षात्मक हथियार का नाम मोलोतोव कॉकटेल पड़ गया.

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कब-कब किया गया इस्तेमाल
1940 के दशक के दौरान ब्रिटेन में ये चिंता थी कि नाज़ी जर्मनी ब्रिटेन पर हमला कर सकता है. इस हमले से निबटने की तैयारी में ब्रितानी लोगों ने घरों में मोलोतोव कॉकटेल बनाना शुरू कर दिया था.
इसके कुछ साल बाद जब आयरलैंड में विद्रोहियों और ब्रितानी सैनिकों के आक्रामकता बढ़ी तब भी पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया गया.
मोलोतोव कॉकटेल की संरचना समय-समय पर आग की तीव्रता और ज़रूरत के आधार पर बदलती रही है. कभी इसमें ईंधन में मिलावट की गई तो कभी कांच की अलग-अलग तरह की बोतलों को आज़माया गया.
हाल ही में अक्तूबर 2022 के दौरान एक एक व्यक्ति ने ब्रिटेन के बंदरगाह शहर डोवर में प्रवासी केंद्र पर प्लास्टिक की केन से बना पेट्रोल बम फेंका था. इस बम को फोड़ने के लिए उस पर पटाखे लगे हुए थे. धमाके बाद आग लग गई थी और इस घटना में दो लोग घायल हुए थे, आग पर जल्द ही क़ाबू पा लिया गया था.
कुछ जगहों पर पेट्रोल बम को विरोध का प्रतीक भी माना जाता है. इसका इस्तेमाल दुनियाभर में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान होता रहा है.
पिछले साल फ़रवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो पूर्वी यूक्रेन के ख़ार्किएव और राजधानी कीएव सहित अन्य शहरों में यूक्रेन के लोगों ने रूसी सेना पर हमला करने के लिए अपने घरों में ही मोलोतोव कॉकटेल बनाने शुरू कर दिए थे.
यूक्रेन के आम लोगों की मोलोतोव कॉकटेल बनाते हुए तस्वीरें दुनियाभर के मीडिया में छा गई थीं.
वहीं मोलोतोव कॉकटेल और पेट्रोल बम विस्फोटकों की वैश्विक सूची में शामिल हैं और उन्हें बनाने या घर पर रखने पर दंड के प्रावधान हैं.
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