चीन में महिलाएं मां बनने से इनकार क्यों कर रही हैं?

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- Author, सिल्विया चैंग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
तीस साल की शादीशुदा ग्लोरिया कहती हैं, "मैं बच्चों का ख़र्च नहीं उठा सकती हूं."
ग्लोरिया ने जो अनुमान लगाया है उसके मुताबिक़ अगर वो बच्चा पैदा करती हैं तो चीन में जिस जगह वो रह रही हैं, वहां उन्हें अपने मौजूदा ख़र्चों के अतिरिक्त प्रति महीना 2400 डॉलर बच्चे के पालन-पोषण पर ख़र्च करने होंगे.
वो कहती हैं, "रोज़मर्रा की ज़रूरतों पर 3000 युआन (लगग 436 डॉलर), किंडरगार्टन की पढ़ाई पर 2000 युआन (291 डॉलर), पार्ट टाइम चाइल्डकेयर पर 1 हज़ार युआन (145 डॉलर) और स्कूल की पढ़ाई पर कम से कम 10,000 युआन (1456 डॉलर) ख़र्च करने होंगे."
ग्लोरिया दक्षिणी चीन के ग्वांगडांग प्रांत में एक प्राइमरी स्कूल में पार्ट-टाइम टीचर हैं.
देश के जिस हिस्से में वो रहती हैं वहां निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की औसत आय 6 हज़ार युआन (873 डॉलर) महीना है.
वो अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. ग्लोरिया जब पैदा हुईं तब चीन में 'एक बच्चे की नीति' (वन चाइल्ड पॉलिसी) सख़्ती से लागू थी. ग्लोरिया कहती हैं कि उन्होंने जो लोन लिया है उसे चुकाना और बूढ़े हो रहे अपने माता-पिता की देखभाल के लिए पैसा जमा करना उनकी प्राथमिकता है.
कम होती आबादी
चीन की आबादी में बड़ा बदलाव हो रहा है. छह दशकों में ये पहली बार है जब चीन की आबादी कम हो रही है.
नए डाटा के मुताबिक़ चीन की अधिकतर महिलाएं या तो एक बच्चा चाहती हैं या बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहती हैं.
चाइना पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर के डेटा के मुताबिक़, चीन में बिना बच्चे वाली औरतों की तादाद साल 2015 में 6 प्रतिशत थी जो 2020 में बढ़कर 10 प्रतिशत पहुंच गई.
10%of women were childless in 2020, up 4% in five years
1.64was the average desired number of children in 2021, dropping from 1.76 in 2017.
26is the average age of first marriage, four years older than in 1980s.
इस डेटा के मुताबिक़ चीन में बच्चा पैदा करने की उम्र वाली महिलाओं में भी बच्चा पैदा करने की इच्छा कम हो रही है. चीन की महिलाओं में साल 2017 में बच्चे पैदा करने की औसत इच्छा संख्या 1.76 थी जो 2021 में कम होकर 1.64 हो गई है.
हालांकि सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में भी प्रजनन दर 2 के नीचे है. वहां अधिकतर लोग ये कहते हैं कि वो दो बच्चे पैदा करना चाहते हैं. लेकिन चीन में बात इससे अलग है.
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में इंटरनेशनल एंड सोशल पॉलिसी विषय के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉक्टर शुआंग चेन कहते हैं, "इस मामले में चीन अलग है क्योंकि यहां सिर्फ़ वास्तविक प्रजनन दर ही कम नहीं है बल्कि प्रजनन करने की इच्छा भी कम है."
चीन में 4 मार्च से साल का सबसे अहम राजनीतिक सत्र शुरू हुआ है. राजनीतिक सलाहकारों ने प्रजनन दर बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव पेश किए हैं. दिए गए सुझावों में कुंवारी महिलाओं के एग फ़्रीज़ करने को बढ़ावा देना और किंडरगार्टन से लेकर कॉलेज तक किताबें फ़्री देना और ट्यूशन फ़ीस माफ़ करना भी शामिल है.
एक अन्य विचार ये है कि शादी के बिना पैदा हुए बच्चों को भी बराबर अधिकार दिए जाएं. चीन में शादी के बाहर पैदा हुए बच्चों को पारिवारिक पंजीकरण (हूकोऊ) हासिल करने में दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है.
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की योजनाओं का फ़ायदा उठाने के लिए ये ज़रूरी होता है. ये पंजीकरण ना होने पर भारी प्रशासनिक फ़ीस भी चुकानी पड़ती है.
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प्रतिद्वंद्विता की दौड़
चीन में महिलाओं के बच्चे ना पैदा करने की इच्छा के पीछे सबसे बड़ा कारण है बच्चा पालने पर होने वाले ख़र्च का बहुत ज़्यादा होना.
चीन में बच्चे के पैदा होते ही उसकी दूसरों से प्रतिद्वंद्विता शुरू हो जाती है- परिजन बच्चों को अच्छे स्कूल में दाख़िला दिलाने की कोशिश करते हैं और इसके लिए अच्छे स्कूलों के पास घर ख़रीदने तक की कोशिश करते हैं. यही नहीं अभिभावक बच्चों को कई तरह की सांस्कृतिक और एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों में भी पंजीकृत करवा देते हैं.
22 वर्षीय कॉलेज छात्रा मिया कहती हैं, "मैं अपने बच्चों को ऐसे माहौल में पैदा करना नहीं चाहूंगी जहां ऐसी गलाकाट प्रतिद्वंद्विता हो."
मिया उत्तरी चीन के एक छोटे क़स्बे में पैदा हुई हैं. मिया की समूची शिक्षा परीक्षाओं के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रही है. मिया ने चीन का चर्चित नेशनल कॉलेज एग्ज़ाम दिया. गाओकाओ नाम से जानी जाने वाली ये परीक्षा ही तय करती है कि किसी छात्र को उच्च शिक्षा किस स्तर की मिलेगी. मिया इस परीक्षा को पास करने के बाद बीजिंग की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाख़िला ले सकीं.
लेकिन मिया का कहना है कि अधिकतर समय वो तनाव में ही रहती हैं.
वो कहती हैं कि आज के दौर के स्नातक छात्रों को उन छात्रों के साथ भी प्रतिद्वंद्विता का मौका मिलना चाहिए जो विदेशों में पढ़ रहे हैं.
मिया कहती हैं, "इस तरह की शिक्षा के लिए जो अतिरिक्त ख़र्च होता है, उसके लिए पैसा चाहिए."
मिया को लगता है कि वो भविष्य में इतना पैसा कभी नहीं कमा पाएंगी कि अपने बच्चों को ऐसी उच्च शिक्षा दे सकें.
"अगर मैं किसी बच्चे को आगे बढ़ने के लिए इस तरह की सहूलतें नहीं दे सकती तो मैं किसी नई ज़िंदगी को इस दुनिया में क्यों लेकर आऊं?"

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जीवन और काम में संतुलन
चीन की जिन महिलाओं से बीबीसी ने बात की उनका ये भी कहना था कि करियर में नकारात्मक प्रभाव की वजह से भी वो बच्चे पैदा करना नहीं चाहती हैं.
महिलाओं का कहना था कि नौकरी के लिए साक्षात्कार के दौरान उनसे पूछा गया था कि क्या वो अगले कुछ साल में बच्चा पैदा करने के बारे में तो नहीं सोच रही हैं.
इन महिलाओं का कहना था कि अगर वो ये कहती हैं कि 'हां वो ऐसा सोच रही हैं' तो उनके नौकरी पर रखे जाने की संभावना कम हो जाती. उनका ये भी कहना था कि बच्चा पैदा करने की स्थिति में उनके प्रोमोशन की संभावना भी कम हो जाती.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉक्टर युन झाऊ कहते हैं, "उच्च शिक्षा लेने वाली चीन की महिलाएं जब इस बारे में सोचती हैं कि वो बच्चा पैदा करने के लिए तैयार हैं या नहीं, तब वो काम और परिवार में संतुलन पर बहुत ज़ोर देती हैं."
प्रोफ़ेसर युन कहती हैं, "काम उनके लिए आत्म-साक्षात्कार जैसा है. चीन में नौकरियों में लैंगिक भेदभाव है और महिलाओं के लिए बच्चे और करियर में से किसी एक को चुनना मुश्किल फ़ैसला होता है."
चीन में बहुत से युवा अपने जीवन के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पसंद करते हैं. मिया ने भी ऐसा ही किया. उन्होंने ये समझाते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया कि वो बच्चा क्यों नहीं पैदा करना चाहती हैं.
मिया इस बात से हैरान थीं कि उन्हें सैकड़ों नकारात्मक संदेश मिले.
कई लोगों ने उन पर स्वार्थी होने का आरोप लगाया. कई का ये भी कहना था कि अभी उन्हें बहुत समझ नहीं है क्योंकि वो अभी बीस साल के आसपास की ही हैं.
एक यूज़र ने टिप्पणी की, "आप जो कह रही हैं वो कहने की समझ अभी आपमें नहीं हैं. जब आप चालीस की हो जाएं तब देखना कि क्या आप ऐसा ही सोचती हैं."
एक अन्य यूज़र ने लिखा, "मैं एक हज़ार डॉलर की शर्त लगाता हूं. तुम्हें अपनी बातों पर अफ़सोस होगा."
कुछ लोगों ने तो उन्होंने विदेशी ताक़तों से प्रभावित बताते हुए यह तक कह दिया कि वो लोगों को बच्चे पैदा ना करने के लिए उकसा रही हैं.
2020 की जनसंख्या के आंकड़े जारी होने के बाद चीन की सरकार ने मई 2021 में अपनी तीन बच्चों की नीति जारी की थी. उस साल ये पता चला था कि चीन में महिलाओं ने सिर्फ़ 1 करोड़ 20 लाख बच्चों को ही जन्म दिया है. ये साल 1961 के बाद से सबसे कम जन्मदर थी.
हाल के सालों में चीन की सरकार ने लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने की कई योजनाएं लागू की हैं.
लेकिन चीन की कम जन्मदर की वजह से, देश के कुछ लोगों को लगता है कि जो महिलाएं बच्चा पैदा नहीं करना चाह रही हैं वो देश को नीचे ले जा रही हैं.
मिया कहती हैं, "ये मेरी व्यक्तिगत पसंद है. मैं बच्चे पैदा ना करने के विचार को बढ़ावा नहीं दे रही हूं. मैं उन लोगों का सम्मान करती हूं जो बच्चे पैदा करना चाहते हैं."
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'मैंने मुश्किल लड़ाई लड़ी'
परिवार की बच्चों को लेकर अपनी उम्मीदें होती हैं और उनसे लड़ना कई महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल हो गया है.
34 वर्षीय युआन शेपिंग कहती हैं, "मैंने एक मुश्किल लड़ाई लड़ी है."
युआन चीन के ऐसे ग्रामीण इलाक़े में पली-बढ़ी हैं जहां लड़का पैदा करना और परिवार के वंश को चलाए रखना महिलाओं की पहली ज़िम्मेदारी माना जाता है. उनके लिए बच्चा पैदा करने को ना कहना बहुत मुश्किल था.
युआन और उनकी बड़ी बहन कॉलेज नहीं जा सकी थीं. हालांकि वो अपने हाई स्कूल के टॉप तीन छात्रों में थीं.
उनके परिजनों ने आगे की पढ़ाई के लिए सिर्फ़ उनके छोटे भाई का ख़र्च ही उठाया.
युआन कहती हैं, "मेरे अभिभावक हमेशा कहा करते थे कि किसी लड़की को आगे पढ़ाने का क्या ही मतलब है. आज नहीं तो कल तुम्हारी शादी हो ही जाएगी और तुम्हें भी बच्चे पैदा करने होंगे और परिवार चलाना होगा."
जब उनकी एक रिश्तेदार लगभग उनकी ही उम्र में तलाक़शुदा हो गईं और उन्हें दो बच्चों को अपने आप अकेले ही पालना पड़ा तो युआन बच्चे पैदा करने को लेकर और भी हतोत्साहित हो गईं.
वो कहती हैं, "अब मुझे शादी की व्यवस्था ही में विश्वास नहीं है."
युआन ने अब अपना गांव छोड़ दिया है और वो एक शहर में स्वतंत्र जीवन जी रही हैं.
वो कहती हैं, "अपने खाली वक़्त में मैं पढ़ती हूं, दोस्तों के साथ घूमती हैं और अपनी आज़ादी का आनंद लेती हूं."
इस रिपोर्ट मे लॉरा ओवेन ने सहयोग किया.
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