पाकिस्तानी रुपया गिर रहा है औंधे मुँह, क्या होगा आगे

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- Author, बिलाल करीब मुग़ल
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद
पाकिस्तान में सोशल मीडिया यूज़र्स मंगलवार की रात ये पूछते नज़र आए कि देश में डॉलर का नया रेट क्या होगा, अमेरिकी करेंसी की क़ीमत पाकिस्तानी रुपये के मुक़ाबले घटेगी या और मज़बूत होगी?
असल में मंगलवार की रात विदेशी मुद्रा कंपनियों ने कहा कि डॉलर की क़ीमत पर लगाया जाने वाला 'कैप' बुधवार से हटा दिया गया है.
ध्यान रहे कि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज़ी से आयी गिरावट के बाद, एक्सचेंज कंपनीज़ एसोसिएशन ऑफ़ पाकिस्तान की तरफ़ से डॉलर की क़ीमतों को स्थिर रखा गया था. जबकि सरकार भी इंटरबैंक रेट को स्थिर रख रही थी ताकि बाज़ार में अराजकता की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके.
एक्सचेंज कंपनियों की तरफ़ से यह कहा गया है कि इसका उद्देश्य ब्लैक मार्केट, इंटरबैंक और ओपन मार्केट में मौजूद डॉलर की क़ीमतों के बीच अंतर को ख़त्म करना है.
मंगलवार की रात, पाकिस्तान के फ़ॉरेक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, मलिक बोस्तान ने घोषणा की कि "डॉलर की क़ीमत पर लगाया गया कैप नकारात्मक साबित हुआ है और इससे डॉलर की क़ीमत कम होने के बजाय बढ़ गई है."
उन्होंने कहा कि इसके नतीजे में "एक ब्लैक मार्केट बन गई है जिसकी वजह से बाज़ार में अफ़रातफ़री पैदा हो रही थी और एक्सचेंज कंपनियों की बदनामी हो रही थी".

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'कैप सरकार और देश के हित में लगाया'
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के वर्तमान वित्त मंत्री इसहाक़ डार ने अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद बयान दिया था कि डॉलर की वास्तविक क़ीमत 200 रुपये से कम है और अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान में डॉलर अपने मूल स्तर पर आ जाएगा.
हालांकि उन्होंने उस वक्त कहा था कि सरकार इस मामले में दख़ल नहीं देगी.
पाकिस्तान के फ़ॉरेक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक बोस्तान ने मंगलवार को कहा कि 'यह कैप सरकार और देश के हित में लगाया गया था, लेकिन अब एक्सचेंज कंपनियों की सामूहिक मांग है कि इस कैप को हटाया जाए.
उन्होंने कहा कि 'डॉलर की कमी के कारण एक्सचेंज कंपनियों को कहीं से भी डॉलर नहीं मिल रहे हैं, जबकि स्टेट बैंक का कहना है कि डॉलर पहले आयातकों को दिए जाने चाहिए.
इसलिए विदेश में रह रहे पाकिस्तानियों से जो भी पैसा आ रहा है, वो सभी इंटरबैंक मार्केट को दिया जा रहा है जबकि उनके मुताबिक़ पहले ये 80 फ़ीसदी जनता को और 20 फ़ीसदी बैंकों को दिया जाता था.
उन्होंने आगे कहा कि 'स्टेट बैंक को यह अंदाज़ा था कि लोग डॉलर बेचेंगे, लेकिन कोई बेच नहीं रहा है, केवल ख़रीद हो रही है.'
उन्होंने उम्मीद जताई है कि जैसे ही लोगों को डॉलर मिलना शुरू होगा, क़ीमत में कमी आएगी.
"रेमिटेंस भी इसी वजह से कम हो गया है और यह तीन अरब डॉलर से घटकर दो अरब डॉलर पर आ गया है, क्योंकि बाज़ार में 20 से 30 रुपये का अंतर बहुत ज़्यादा है, उसी तरह निर्यातकों ने भी पैसा होल्ड कर लिया है क्योंकि ओपन मार्केट, इंटरबैंक और ब्लैक मार्केट के बीच का अंतर बहुत बड़ा है, इसे कम करने की ज़रूरत है.'
बीबीसी से बात करते हुए मलिक बोस्तान ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद "डॉलर की क़ीमत 250 रुपये या उससे ऊपर पहुंच सकती है."
बुधवार को बाज़ार से मिली ख़बरों के मुताबिक़, ओपन मार्केट में डॉलर का भाव 252 रुपये पर पहुंच गया है.
बुधवार को कारोबार की शुरुआत में ओपन मार्केट में डॉलर 12 रुपये मज़बूत हुआ था और फ़िलहाल 252 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.

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'सही दिशा में सही क़दम'
बीबीसी से बात करते हुए, अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक में डायरेक्टर पाकिस्तान इनिशिएटिव और आर्थिक विश्लेषक, उज़ैर यूनुस ने कहा कि यह सही दिशा में एक क़दम है, क्योंकि इससे मुद्रा बाज़ार में हवाला हुंडी में कमी आएगी और ओपन मार्केट में डॉलर के रेट के अंतर में भी कमी आएगी.
उन्होंने कहा कि यह नाकाफ़ी होगा क्योंकि इंटरबैंक में डॉलर की दर निर्धारित करने की भी ज़रूरत है, ताकि डॉलर का वो मूल्य सामने आ सके जो होना चाहिए.
उनका कहना है कि इसे लेकर डर यह है कि अगर इस मामले पर इंटरबैंक रेट में देरी हुई तो मार्केट में डॉलर फिर से ब्लैक होगा और हवाला हुंडी का बाज़ार गर्म हो जाएगा.
जब उज़ैर यूनुस से पूछा गया कि क्या इस फ़ैसले के बाद जिन लोगों ने डॉलर जमा किये हुए हैं, क्या वे अपने डॉलर बेचेंगे?
इसके जवाब में उनका कहना था कि कुछ हद तक डॉलर की ख़रीद-फ़रोख्त हो सकती है, लेकिन यह बहुत ज़्यादा नहीं होगी क्योंकि इस समय देश में विनिमय दर को लेकर अनिश्चितता की जो स्थिति है वो एक्सचेंज रेट से ऊपर है.
और जब तक आईएमएफ़ से बातचीत तय नहीं हो जाती और वे सहायता राशि जारी नहीं करते, तब तक यह स्थिति बनी रहेगी क्योंकि उन लोगों की राय में देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर है.
विश्लेषक उज़ैर यूनुस ने ट्विटर पर भी लिखा है कि "यह स्पष्ट है कि अब एक्सचेंज कंपनियां उसी दर पर डॉलर का व्यापार करेंगी जो बाज़ार में चल रहा है."
उन्होंने सवाल किया कि 'क्या यह घोषणा डॉलर की इंटरबैंक दर के एडजस्टमेंट की दिशा में पहला क़दम है?'
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'डॉलर का सरकारी मूल्य 250 पार कर जाएगा'
एक तरफ़ जहां मलिक बोस्तान को उम्मीद है कि ब्लैक मार्केट में डॉलर की क़ीमत घटेगी, वहीं दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया पर यह आशंका भी ज़ाहिर की गई है कि मामला उल्टा भी हो सकता है.
अक्सर लोग इस बात से सहमत दिखाई दिए कि डॉलर का सरकारी मूल्य बढ़ जायेगा.
पत्रकार कामरान ख़ान ने ट्विटर पर लिखा कि "शायद स्टेट बैंक के गवर्नर को कल रात सपना आया हैं कि डॉलर का सरकारी मूल्य 230 और ओपन मार्केट में 240 है, केवल 10 रुपये का अंतर है और जल्द ही यह भी ख़त्म हो जाएगा."
कामरान ख़ान ने लिखा कि "जी हां, कल यह अंतर दूर हो जाएगा, एकदम से रुपये का मूल्य कम से कम 10 प्रतिशत गिर जाएगा और ओपन मार्केट में डॉलर का सरकारी मूल्य 250 पार कर जाएगा."
आर्थिक विश्लेषक और पत्रकार ख़ुर्रम हुसैन ने भी ट्वीट किया कि 'एक्सचेंज कंपनियों ने डॉलर कैप ख़त्म करने का एलान कर दिया है, देखते हैं कि इसके बाद डॉलर कहां तक जाता है.'
वहीं एक अन्य यूज़र ने ट्वीट किया, कि 'मलिक बोस्तान के एलान के बाद जो भी डॉलर के मूल्य के बारे में बात कर रहा है, पर कल ऐसा कुछ नहीं होगा.'
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