तेल कंपनियों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफ़ा, बाइडेन बोले- लगाएंगे भारी टैक्स

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अगर भारी मुनाफ़ा कमा रही तेल कंपनियां लोगों के रोज़मर्रा के ख़र्च को कम करने के लिए निवेश नहीं करेंगी तो वो उन पर भारी टैक्स लगाएंगे.
रविवार को ही अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन ने रिकॉर्ड मुनाफ़े की जानकारी दी थी.
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं जिससे तेल कंपनियों का मुनाफ़ा भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है.
रूस के यूरोप के लिए गैस सप्लाई बंद करने के बाद से प्राकृतिक गैस के दामों में भी भारी उछाल आया है.
बाइडेन की चेतावनी
सोमवार (अमेरिकी समय के अनुसार) किए ट्वीट में राष्ट्रपति बाइडेन ने तेल कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि तेल कंपनियां या तो अमेरिका में ग्राहकों के लिए दाम कम करें और उत्पादन और रिफ़ाइनरी क्षमता बढ़ाएं या फिर अधिक मुनाफ़े पर ऊंचा कर चुकाएं और अन्य प्रतिबंधों का सामना करें.
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राष्ट्रपति बाइडेन ने एक और ट्वीट में कहा है कि पिछले छह महीनों में सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने सौ अरब डॉलर से अधिक मुनाफ़ा कमाया है.
बाइडेन ने ट्वीट में कहा, "पिछले छह महीनों में सबसे बड़ी छह तेल कंपनियों ने 100 अरब डॉलर से अधिक कमाए. 200 दिन से भी कम में 100 अरब डॉलर. अगर ये तेल कंपनियां कच्चे तेल को रिफ़ाइन करने पर औसत मुनाफ़ा कमा रही होतीं तो आज तेल के दाम 50 सेंट तक कम हो गए होते."
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, बाइडेन के बयान से पहले व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि "राष्ट्रपति कांग्रेस से तेल कंपनियों पर टैक्स लगाने और अन्य प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे."
पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि तेल कंपनियों को युद्ध की वजह से 'भारी भरकम फ़ायदा' मिल रहा है.
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तेल कंपनियों को याद दिलाई ज़िम्मेदारी
राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि तेल कंपनियों की ज़िम्मेदारी है कि वो अपने अधिकारियों और शेयर धारकों के हितों से आगे बढ़ते हुए ग्राहकों को फ़ायदा पहुंचाएं और अपनी उत्पादन और रिफ़ायनरी क्षमता बढ़ाएं.
हालांकि हाल के दिनों में तेल और गैस के दामों में कुछ कमी आई है, लेकिन फ़रवरी में यूक्रेन में युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से तेल के दाम अब भी बहुत ज़्यादा हैं.
उधर यूरोप में शेल और टोटल एनर्जी कंपनियों ने भी भारी मुनाफ़ा दर्ज किया है. यूरोप में भी अचानक से तेल कंपनियों को मिल रहे फ़ायदे पर चर्चा शुरू हो रही है.
बाइडेन ने कहा, "अब समय आ गया है जब ये कंपनियां युद्ध से फ़ायदा उठाना बंद करें. अमेरिकी लोगों को बढ़ते दामों से थोड़ी राहत दें."
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के अलावा पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन में कमी के और कारण भी हैं, जैसे कुछ फै़क्ट्रियों में कामकाज की समस्याओं की वजह से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है.
तेल उत्पादन कम होने की वजह से भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़े हैं.
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मध्यावधि चुनाव में मुद्दा
तेल के दामों का बढ़ना अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान और भी संवेदनशील मुद्दा हो गया है.
अमेरिका में आठ नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं.
राष्ट्रपति बाइडेन ये संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि वो तेल के दामों को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
शनिवार को ही उन्होंने ट्वीट किया था कि इस तिमाही में तेल कंपनियों ने अरबों डॉलर कमाए हैं और वो इस रिकॉर्ड मुनाफ़े को उत्पादन क्षमता बढ़ाने में निवेश करने के बजाए अपने शेयर धारकों को पहुंचा रही हैं.
बाइडेन ने कहा था कि ये अस्वीकार्य है और अब समय आ गया है जब तेल कंपनियां ग्राहकों के लिए दाम कम करें.
अमेरिका में इस समय बढ़ती हुई महंगाई मध्यावधि चुनावों के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा है. आम लोग महंगाई से परेशान हैं और बाइडेन प्रशासन इस दिशा में क़दम उठाते हुए दिखने की कोशिश कर रहा है.
एक तरफ़ आम लोग महंगाई से परेशान हैं और दूसरी तरफ़ तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफ़ा कमा रही हैं.
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तेल कंपनियों को कितना हुआ मुनाफ़ा
तीसरी तिमाही में एक्सॉनमोबिल ने 19.7 अरब डॉलर कमाए. ये कंपनी के लिए नया रिकॉर्ड है. वहीं दूसरी बड़ी तेल कंपनी शेवरॉन का मुनाफ़ा इस दौरान 84 फ़ीसदी बढ़कर 11.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
तेल कंपनियों की महंगाई से मुनाफ़ा कमाने की आलोचना के जवाब में एक्सॉनमोबिल के सीईओ डेरेन वुड्स ने शुक्रवार को कहा था कि कंपनी अपने शेयरधारकों को लाभांश दे रही है.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा है कि शेयरधारकों को लाभांश देना अमेरिकी परिवारों के लिए क़ीमतें कम करने के बराबर नहीं है.
अमेरिका में जून में एक गैलन पेट्रोल पांच डॉलर का था. ये अभी तक के सबसे उच्च स्तर पर था. फ़िलहाल एक गैलन पेट्रोल की क़ीमत चार डॉलर के क़रीब है, लेकिन ये भी युद्ध से पहले की क़ीमतों से ज़्यादा है.
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