अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन की एक टिप्पणी से पाकिस्तान में उबाल

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के उस बयान पर कड़ा एतराज जाहिर किया है, जिनमें उन्होंने 'पाकिस्तान को दुनिया के सबसे ख़तरनाक़ देशों में से एक बताया है.'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान एक 'ज़िम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश है. इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए.'
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान 'अमेरिकी राजदूत से आधिकारिक बयान को जानना चाहेगा.'
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के प्रमुख इमरान ख़ान ने सवाल किया कि पाकिस्तान ने परमाणु ताक़त हासिल करने के बाद पूरी दुनिया में अपना आक्रामक रवैया कब दिखाया है?
उधर, विदेश मामलों के कई जानकार भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि बाइडन प्रशासन की 'कथनी और करनी में अंतर दिख रहा है.' एक तरफ जो 'बाइडन ये बयान दे रहे हैं और दूसरी तरफ हाल में पाकिस्तान पर अमेरिकी डॉलर की बरसात हो रही है.'
जानकारों की राय में बाइडन के बयान को 'भारत अपने हक़ में इस्तेमाल कर सकता है' और पाकिस्तान को मिल रही मदद को लेकर अमेरिका से सवाल कर सकता है.
साथ ही उनका ये भी कहना है कि बराक ओबामा जब अमेरिका के राष्ट्रपति थे तब भी अमेरिका को फ़िक्र रहती थी कि कहीं पाकिस्तान के परमाणु हथियार 'नॉन स्टेट एक्टर्स' के हाथ न लग जाएं.

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पाकिस्तान ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो से पत्रकारों ने सवाल पूछे तो उन्होंने पाकिस्तान स्थित अमेरिकी राजदूत को इस बाबत तलब करने की बात की.
उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अमेरिका से उसका आधिकारिक बयान जानना चाहता है.
बिलावल ने कहा, "प्रधानमंत्री से बात कर के अमेरिकी राजदूत को तलब किया जाएगा और पाकिस्तान उनसे आधिकारिक बयान को जानना चाहेगा."
वे बोले, "अलग मसलों पर हमारा अपना नज़रिया है. अमेरिका का भी अपना नज़रिया है. लेकिन जब आप एक समझदार और ज़िम्मेदार देश होते हैं तो कुछ मसलों पर आप सहमत होते हैं कुछ पर असहमत. मुझे नहीं लगता कि ये देश के नाम उनका संदेश था बल्कि ये अनौपचारिक बातचीत थी."
उन्होंने ये स्पष्ट किया कि, "पाकिस्तान अमेरिकी राजदूत को तलब करेगा. उन्हें ये मौका दिया जा रहा है कि वो अपने देश की ओर से आए इस बयान की व्याख्या करें."
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने ट्वीट किया, "मैं साफ़ तौर पर ये दोहराता हूं कि पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार परमाणु संपन्न मुल्क है और हमें फ़ख़्र है कि हमारे जो परमाणु संसाधन हैं वो आईएईए (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के तय मानको के मुताबिक सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा घेरे में हैं. हम सुरक्षा के इन प्रावधानों को बेहद गंभीरता से लेते हैं. इसे लेकर किसी को शंका नहीं होनी चाहिए."
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देर शाम पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि कार्यवाहक विदेश सचिव जौहर सलीम ने अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम को अमेरिकी राष्ट्रपति के 14 अक्टूबर को दिए गए बयान पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देने को कहा.
क्या कहते हैं जानकार?
अमेरिकी प्रोफ़ेसर और भारतीय उपमहाद्वीप के साथ अमेरिका के संबंधों पर क़रीबी नज़र रखने वाले मुक्तदर ख़ान बीबीसी से कहते हैं, "इसके (बयान के) मायने तो बड़े अज़ीब लग रहे हैं. एक ही मुल्क है जिसने परमाणु हथियार बार-बार इस्तेमाल किए हैं और वो है अमेरिका."
बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में मुक़्तदर ख़ान ने कहा, "बाइडन जब इस तरह की बात करते हैं तो उन्हें इस तरह की चीज़ों को नज़र में रखना चाहिए."
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के पास 20-25 साल से न्यूक्लियर वेपन (परमाणु हथियार) हैं पाकिस्तान ने ऐसी कोई हरकत नहीं की. किसी को धमकी नहीं दी. बस बात ये की है कि ये डिटरेंस (बचाव तय करने वाले हथियार) हैं भारत के ख़िलाफ़."
मुक़्तदर ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान सोचता है, "भारत बहुत बड़ा मुल्क है. भारत की इकॉनमी पाकिस्तान से कई गुना ज़्यादा है. वे मानते हैं कि कन्वेंशन एडवान्टेज (पारंपरिक तौर पर बढ़त) भारत के पास है. 1971 में भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए."
मुक़्तदर ख़ान के मुताबिक़ परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में पाकिस्तान भारत से आगे है.
वे कहते हैं, "पाकिस्तान के पास भारत से ज़्यादा परमाणु हथियार हैं. लोग कहते हैं कि भारत के पास 170 के करीब परमाणु हथियार हैं. पाकिस्तान के पास क़रीब 200 परमाणु हथियार हैं."

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पाकिस्तान पर डॉलर की बारिश
मुक़्तदर ख़ान पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के इस बयान और उनके प्रशासन के फ़ैसलों में बड़ा अंतर देखते हैं.
वो कहते हैं, "ताज्जुब की बात है कि पिछले तीन चार हफ़्तों में अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने खुद 45 करोड़ डॉलर दिए हैं पाकिस्तान को. इसने पाकिस्तान की जो परमाणु हथियारों की डिलिवरी की क्षमता है, उसको बढ़ा दिया."
वो कहते हैं, " कई लोग बाइडन की उम्र पर सवाल उठा रहे हैं. इनमें डेमोक्रेट भी शामिल हैं लेकिन याद रखिए कि 30 साल तक जो बाइडन सीनेट की फॉरेन रिलेशन कमेटी में रहे हैं. कई साल तक वो इसके चेयरमैन भी रहे हैं. पिछले तीस चालीस साल से अमेरिकी की फॉरेन पॉलिसी में बाइडन का बहुत बड़ा हाथ है. उसके बाद भी उनके ऐसे बयान आते हैं."
वो कहते हैं कि हाल फिलहाल बाइडन ने ऐसे कई बयान दिए हैं जिन्हें लेकर उनका प्रशासन मुश्किल में दिखा है.
मुक्तदर ख़ान कहते हैं, "आपको याद होगा, उन्होंने कहा था कि रूस में रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) लेकर आएंगे और (राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन को जाना होगा. उसके बाद बाइडन ने वो बयान वापस ले लिया."
वो याद दिलाते हैं, "फिर बाइडन ने कहा कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है तो हम पूरी ताक़त से उसका जवाब देंगे. फिर व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो कहा उसके मायने अलग थे. तो ऐसे कई बयान बाइडन ने दिए हैं."
मुक्तदर ख़ान ने कहा, "पाकिस्तान के लिए तो ये बड़ा कूटनीतिक झटका है. भारत इसका फ़ायदा उठाएगा. आप देखना (भारतीय विदेश मंत्री एस) जयशंकर इसे बार बार कोट करेंगे. वो पूछेंगे कि जब राष्ट्रपति कह रहे हैं कि पाकिस्तान सबसे ख़तरनाक़ देश है तब अमेरिका उसे मदद क्यों दे रहा है."
मुक़्तदर ख़ान कहते हैं कि बाइडन प्रशासन फिलहाल पाकिस्तान पर पूरी तरह मेहरबान दिखता है.
वो बताते हैं, "पिछले दो हफ़्ते में अमेरिकी ने पाकिस्तान के साथ बिल्कुल आशिकी शुरु कर दी थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के बाद (पाकिस्तान के विदेश मंत्री) बिलावल भुट्टो को वाशिंगटन में कई मीटिंग के मौके मिले.
पाकिस्तान के लिए आईएमएफ़ का क़रीब 1.2 अरब डॉलर का कर्ज़ मंजूर हो गया. एशियन डेवलपमेंट बैंक पैसे दे रहा है. ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान पर डॉलरों की बारिश हो रही है. पाकिस्तान में ये सारी नवाजिशें अमेरिका से आ रही हैं और उसके बाद ये बयान आया है."
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'अमेरिका को डर'
मुक्तदर ख़ान कहते हैं, "समझदारी की बात तो ये रहेगी कि संजीदा लोग इस बयान को गंभीरता से नहीं लें लेकिन बाइडन का जो इनर सर्किल है, उसमें ये राय ज़रूर है कि पाकिस्तान विश्वसनीय और भरोसेमंद देश नहीं है. अमेरिका उसे उसी नज़र से देखता है. आपको पता कि जब लोगों ने पूछा था कि (ओसामा) बिन लादेन तो मारे गए फिर अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सेना क्यों है, बराक ओबामा के प्रशासन के जमाने में जो एक कारण बताया जाता था वो ये था कि पाकिस्तान के जो परमाणु हथियार हैं वो अतिवादियों के हाथ न लग जाएं. तो अमेरिका में ये डर रहा है कि नॉन स्टेट एक्टर्स के हाथ में अगर परमाणु हथियार आ जाएंगे तो वो अमेरिका के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर सकते हैं."
वहीं, विदेश मामलों के जानकार कमर आग़ा को भी लगता है कि जो बाइडन का बयान और अमेरिकी प्रशासन का रुख अलग-अलग दिखता है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अमेरिका ने कुछ दिन पहले ही मदद दी है. आज ये बयान दे रहे हैं. पेंटागन और स्टेट डिपार्टमेंट (विदेश मंत्रालय) में कोई अंतर है क्या?"
साथ ही वे ये भी कहते हैं कि, "अमेरिकी पॉलिसी में कुछ दिक्कत नज़र आती है. मुझे लगता है कि ऐसी बातों से काम नहीं मिलेगा."
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