You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ईरान में दंगों के पीछे अमेरिका और इसराइल का हाथ है: आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई
ईरान में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन कई दिनों से लगातार जारी हैं. विरोध में महिलाएं जहां हिजाब को उतार कर आग के हवाले कर रही हैं वहीं प्रदर्शनकारियों की जुबान से 'तानाशाह मुर्दाबाद' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं.
ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के शहर साक़िज़ की रहने वाली कुर्दी महिला महसा अमीनी ने 16 सितंबर को एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था.
महसा अमीनी तीन दिनों तक कोमा में रहीं थीं. उनकी उम्र महज़ 22 साल थी.
चश्मदीदों का कहना है कि तेहरान में अमीनी की गिरफ़्तारी के बाद उन्हें वैन में पीटा गया था लेकिन पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है.
17 दिनों से जारी प्रदर्शन कहीं कहीं उग्र रूप भी ले रहे हैं. कथित पुलिस की मार से महसा अमीनी की आवाज़ भले की शांत हो गई हो लेकिन उसकी गूंज ने ईरान सरकार के कानों में दर्द कर दिया है.
दुनियाभर में महिलाओँ की आज़ादी को लेकर ईरान से सवाल पूछे जा रहे हैं. ईरान की उस मोरैलिटी पुलिस को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिसके ऊपर हिजाब से जुड़े नियमों का पालन करवाने की ज़िम्मेदारी है.
अमेरिका और इसराइल को बताया ज़िम्मेदार
अब ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने महसा अमीनी की मौत के बाद देश में जारी अनिश्चितता के लिए अमेरिका और इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया है. ख़ामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बोले हैं.
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, "मैं साफ़ तौर पर कहता हूं कि इन दंगों और असुरक्षा के पीछे अमेरिका और इसराइल का हाथ है. उन्होंने इसके लिए विदेशों में रह रहे कुछ देशद्रोही ईरानियों और अपने पेड एजेंट की सहायता ली."
ईरान में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर उन्होंने सवाल उठाए हैं. ख़ामेनेई ने एक दूसरे ट्वीट में कहा कि लड़की की मौत एक दुखद घटना थी जिसने हमें भी दुखी किया.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने बिना सबूत या जांच के, सड़कों को ख़तरनाक बना दिया है. कुरान, मस्जिद, बैंक और लोगों की कारों में आग लगाना, महिलाओँ से हिजाब हटाए जा रहे हैं. ये सब सामान्य कृत्य नहीं हैं. इन्हें योजना के तहत किया गया.
सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने कहा कि कुछ लोग ये कहने के ख़िलाफ़ हैं कि कुछ ख़ास घटनाओं की योजना दुश्मन मुल्क ने बनाई थी. वे अमेरिका और इसराइल की ख़ुफिया सेवाओं की मदद के लिए खड़े होते हैं. वे इसके लिए गलत विश्लेषण और बयानबाज़ी भी करते हैं ताकि इससे इनकार किया जा सके कि ये दुश्मन मुल्क ने किया है.
आख़िर में उन्होंने कहा कि, "दंगे दुनिया भर में होते हैं. फ्रांस का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां समय समय पर बड़े पैमाने पर दंगे होते रहते हैं, लेकिन क्या कभी अमेरिका के राष्ट्रपति ने यूरोपीय दंगाइयों का समर्थन किया है, या कभी कोई घोषणा की हो कि हम आपके साथ खड़े हैं? क्या अमेरिकी मीडिया ने उनका समर्थन किया है, क्या ऐसा कोई रिकॉर्ड हमारे पास है?"
शुक्रवार को देश के ख़ुफिया मंत्रालय ने बताया कि इस मामले में फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और पोलैंड सहित नौ विदेशी नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया है.
महसा अमीनी के परिवार ने क्या कहा?
बीबीसी फ़ारसी सेवा के साथ एक इंटरव्यू में महसा अमीनी के पिता अमज़द अमीनी ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी.
पिता अमज़द अमीनी का कहना है कि उनका 17 साल का बेटा आराश वहीं पर था और उसे बताया गया कि पुलिस ने महसा को पीटा था.
उन्होंने बताया, "मेरे बेटे ने उनसे महसा को न ले जाने की गुज़ारिश की, लेकिन उसे भी मारा-पीटा गया. उसके कपड़े फाड़ दिए गए. मैंने उन्हें कहा कि मुझे सिक्योरिटी अफ़सर के बॉडी कैम का फ़ुटेज दिखाएं. लेकिन उन्होंने कहा कि उसकी बैटरी ख़त्म हो गई है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)