ब्रिटेनः बर्मिंघम में भी एक मंदिर के बाहर लेस्टर जैसा प्रदर्शन

- Author, गगन सभरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन से
ब्रिटेन में पिछले दिनों लेस्टर शहर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव और उपद्रव के बाद अब वहां के बर्मिंघम शहर से भी ऐसी ख़बरें आई हैं. शहर के स्मेथविक इलाक़े के दुर्गा भवन मंदिर और कम्युनिटी सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ है.
यह घटना मंगलवार शाम को तब हुई, जब भारत की साध्वी ऋतंभरा के पहले से तय एक कार्यक्रम का विरोध करने के लिए दुर्गा भवन मंदिर के बाहर 200 से अधिक लोग इकट्ठा हो गए.
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि साध्वी ऋतंभरा मुस्लिम विरोधी हैं और अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिराने में उनका हाथ रहा है. प्रदर्शनकारी यह तर्क देते हुए साध्वी ऋतंभरा के मंदिर पहुंचने का विरोध कर रहे थे.
साध्वी ऋतंभरा 1990 के दशक में चर्चा में आईं. वे आरएसएस और बीजेपी की नेता हैं.
पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार, 57 साल की साध्वी ऋतंभरा को 20 से 24 सितंबर के बीच बर्मिंघम, बोल्टन, कोवेंट्री, नॉटिंघम और लंदन के हिंदू मंदिरों का दौरा करना था. उनके इस दौरे का आयोजन उनके द्वारा स्थापित और ब्रिटेन में रजिस्टर्ड संस्था 'परम शक्ति पीठ' ने किया है.
प्रदर्शनकारियों को जब यह बताया गया कि साध्वी ऋतंभरा का कार्यक्रम अब रद्द कर दिया गया है, तब भी वे वहां से जाने को तैयार नहीं हुए. बताया गया है कि इस मंदिर में साध्वी ऋतंभरा को प्रवचन देना था, लेकिन ख़राब स्वास्थ्य का हवाला देकर उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया.

चश्मदीद ने क्या बताया
इस बारे में सोशल मीडिया पर डाले गए कई वीडियो में पुलिस को हेलमेट पहने और हाथों में शील्ड लिए प्रदर्शनकारियों से निपटते और उन्हें दूर धकेलते हुए देखा जा सकता है. इस वीडियो में प्रदर्शनकारियों को उग्र होते देखा जा सकता है. 18 साल के एक युवक को चाकू रखने के संदेह मे गिरफ़्तार किया गया है.
घटनास्थल पर मौजूद सुरेश राजपुरा ने इस बारे में बीबीसी से बात की. उन्होंने बताया, ''आमतौर पर मैं हर मंगलवार को मंदिर जाता हूं. इसलिए मैं तब मंदिर में ही था. जब मैं वहां पहुंचा, तो मंदिर के बाहर मैंने 200 से 250 लोगों को प्रदर्शन करते हुए देखा. वे ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे. मैंने मंदिर के बाहर बहुत से पुलिसकर्मियों को भी देखा जो सड़क के दोनों ओर प्रदर्शनकारियों को क़ाबू में करने की कोशिश कर रहे थे.''
उन्होंने कहा, ''ये बताना थोड़ा मुश्किल है कि प्रदर्शनकारी किस देश के रहने वाले थे, लेकिन वे 'अल्लाह ओ अकबर' का नारा लगा रहे थे.''
सुरेश राजपुरा बताते हैं, ''मैंने कुछ प्रदर्शनकारियों को मंदिर के अधिकारियों और पुलिस की ओर बोतल फेंकते, उन्हें धमकाते और गाली-गलौज देते देखा गया. कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस और मंदिर की ओर पटाखे फेंकते भी देखा गया. सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ.''
उन्होंने आगे कहा, ''इससे स्थानीय लोग बहुत परेशान और चिंतित हैं, क्योंकि ऐसी घटना यहां पहली बार हुई है. लोग चिंतित हैं कि कहीं ऐसी घटना आगे भी न हो जाए.''

इमेज स्रोत, Getty Images
अपील
मंगलवार शाम को हुए विरोध-प्रदर्शन के पहले स्मेथविक के 'अब्राहमिक फाउंडेशन' के 'प्रमुख इमाम' मौलाना नासिर अख़्तर ऑनलाइन जारी हुए एक वीडियो में लोगों से शांति का आह्वान करते दिखे. उन्होंने लोगों से कहा कि अपने घर पर रहें और उस विरोध-प्रदर्शन में शामिल न हों.
मौलाना नासिर अख्तर, लोगों से कह रहे थे कि वे प्राप्त सूचनाओं को सत्यापित करें और उन्हें जांच लें. उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर को जैसे ही वक्ता यानी साध्वी ऋतंभरा की विवादास्पद पृष्ठभूमि का पता चला, वैसे ही यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया.
इस तरह मौलाना नासिर अख़्तर जैसे धार्मिक नेताओं और पुलिस की अपील के बावजूद लोग प्रदर्शन करने सड़क पर उतरे.
स्मेथविक और सैंडवेल के कई धर्मों के लोगों को मिलाकर बनी 'फेथफुल फ्रेंड्स' नामक संस्था ने दुर्गा भवन मंदिर के हिंदू ट्रस्टियों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है.
संस्था की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया, ''हमें यह देखकर बहुत दुख हुआ है कि स्मेथविक में बीती रात कुछ लोगों ने वहां के दुर्गा भवन मंदिर के बाहर पहले से तय एक कार्यक्रम का विरोध किया. घटनास्थल पर वक्ता के कार्यक्रम को रद्द करने वाला बयान पहले ही भेजा जा चुका था.''
बयान के अनुसार, ''मंदिर में आने वाले वक्ता और इसे लेकर होने वाले विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हमारी चिंताओं पर विचार करने के लिए सभी धर्मों के नेताओं ने मंदिर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मुलाक़ात भी की थी.''
इस बयान में आगे कहा गया, ''हम सभी धर्मों के बीच बातचीत करने को प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि मतभेदों को हल करने का यह सबसे अच्छा तरीका है और इसके लिए सैंडवेल में काम करना जारी रखेंगे. कुछ ही लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि हिंसा असहमति से निपटने का तरीक़ा है.''
इसके अनुसार, ''हम उन सभी का शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने कल रात शांति बनाए रखना चाहा. सैंडवेल में कई सालों से कायम बेहतरीन और सामंजस्यपूर्ण संबंधों को बहाल करने और बनाए रखने के लिए हम प्रयासरत हैं.''
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इलाक़े के स्थानीय काउंसलर अहमद बोस्तान ने भी अपने ट्विटर पोस्ट में स्मेथविक की इस घटना की निंदा की है.
उन्होंने लिखा, ''स्मेथविक में आज रात जो घिनौना दृश्य देखा गया, वह हमारे शहर की सद्भाव वाली और समृद्ध विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करता.. और जिनके इरादे बुरे हैं उनसे क़ानून सख़्ती से निपटेगा. हमारे यहां के विभिन्न समुदाय इस कट्टरता के खि़लाफ़ मजबूती से साथ मिलकर खड़े हैं और घृणा फैलाने वालों की यहां कोई जगह नहीं.''
वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने बीबीसी को बताया कि उसे मंदिर में पहले से तय कार्यक्रम के सुनियोजित विरोध की जानकारी थी. पुलिस के अनुसार, वह घटनास्थल और आसपास के इलाक़ों पर नज़र बनाए रखेंगे.
बीबीसी ने इस बारे में विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर तेज़ी से प्रसारित हो रहे एक व्हाट्सएप मैसेज को देखा है. इसमें अगले कुछ दिनों में नॉटिंघम, कोवेंट्री, इलफोर्ड और दक्षिण-पूर्व लंदन के विभिन्न मंदिरों और हिंदू केंद्रों के बाहर होने वाले ऐसे ही विरोध प्रदर्शनों का ब्यौरा है.''

लेस्टर की घटना
ब्रिटेन के लेस्टर शहर में बीते शनिवार को हिंदू और मुसलमान युवाओं के बीच झगड़े के बाद तनाव पैदा हो गया था.
इस तनाव की शुरुआत 28 अगस्त को भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए क्रिकेट मैच से हुई थी.
इंग्लैंड के पूर्वी मिडलैंड्स में स्थित लेस्टर शहर की आबादी में लगभग 37 फ़ीसद लोग दक्षिण एशियाई मूल के हैं. इनमें से ज़्यादातर भारतीय मूल के हैं.
शनिवार को एक-दूसरे पर हमला करते दोनों पक्षों के युवाओं को रोकने के दौरान 16 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
इस हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया पर फैल रही अफ़वाहों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है.
इस सिलसिले में रविवार को 21 साल के यूसुफ़ नाम के एक युवक को एक साल की जेल की सज़ा हुई है. बताया गया कि वो सोशल मीडिया से प्रभावित होकर चाकू लेकर एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे. यूसुफ़ ने कोर्ट में माना था कि सोशल मीडिया पर चल रही ख़बरों की वजह से ही ऐसा किया था.
लेस्टर पुलिस ने सोशल मीडिया से प्रभावित एक और प्रदर्शनकारी को जेल भेज दिया है.
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