रूस-यूक्रेन के बीच तुर्की मध्यस्थ तो बना, लेकिन इससे उसको क्या फायदा मिल रहा है?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, अतहुल्पा अमेरिसे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए सात महीने होने को हैं और इस दौरान अगर किसी मुल्क का रुख़ बदला दिखता है तो वो है तुर्की का.
आप कह सकते हैं कि तुर्की दोतरफ़ा खेल खेल रहा है, युद्ध की शुरूआत में तुर्की पश्चिमी देशों का सहयोगी था, लेकिन अभी के वक्त में वो रूस के क़रीब जाता दिख रहा है.
तुर्की नेटो (पश्चिमी देशों का सैन्य गठबंधन) का सदस्य है और पारंपरिक तौर पर यूक्रेन का सहयोगी है. इस साल फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ "विशेष सैन्य अभियान" की घोषणा की उस वक्त यूक्रेन रूस के ख़िलाफ़ था. वो क्राइमिया और डोनबास के इलाक़े पर यूक्रेन के दावे का समर्थक था. इन दोनों इलाक़ों पर रूस समर्थित अलगाववादियों का कब्ज़ा है और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की का कहना है कि वो इन इलाक़ों को एक न एक दिन आज़ाद करवाएंगे.
हालांकि ये भी सच है कि यूक्रेन के लिए तुर्की का समर्थन केवल कूटनीतिक तौर पर नहीं था बल्कि वो सैन्य स्तर पर भी यूक्रेन की मदद कर रहा था. वो यूक्रेन को बेरक्तार TB2 ड्रोन देता है, जो रूसी सेना के लिए ख़तरनाक़ साबित हुए हैं.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त

क्या है बेरक्तार TB2 ड्रोन
इसका आकार एक छोटे प्लेन के बराबर होता है.
ये लेज़र गाइडेड बमों को ले जाने में सक्षम ड्रोन होते हैं.
युद्ध के कुछ शुरुआती हफ़्तों में तुर्की के बेरक्तार ड्रोन ने ख़ूब तारीफ़ बटोरी.
एक बेरक्तार ड्रोन की कीमत 17 लाख पाउंड तक हो सकती है.
मोस्कवा युद्धपोत को डुबोने में भी ड्रोन की खासी भूमिका रही है.
फोर्ब्स के अनुसार जब युद्ध शुरू हुआ उस वक़्त यूक्रेन के पास 30 से भी कम ऐसे ड्रोन थे.

तुर्की अपना रहा "बैलेंस की नीति"
हालांकि रूस के साथ बेहतर आर्थिक संबंध रखने वाला तुर्की रूस के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगाने में पश्चिमी देशों के साथ शामिल नहीं था.
और इस महीने की शुरुआत में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने पूरी दुनिया को उस वक्त चौंका दिया जब उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ पर रूस को "भड़काने की" नीति पर पालन करने का आरोप लगाया.
बेलग्रेद के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा कि रूस से नॉर्ड स्ट्रीम के ज़रिए जर्मनी को होने वाली गैस सप्लाई को रोकने के पुतिन के फ़ैसले को वो समझ सकते हैं.
उन्होंने इस दौरान रूस की तारीफ़ की और कहा कि "किसी को भी रूस को कम कर नहीं आंकना चाहिए.
शुक्रवार को समरकंद में हो रही एससीओ की बैठक के दौरान अर्दोआन ने पुतिन से मुलाक़ात भी की और दोनों नेताओं में आपसी रिश्ते मज़बूत करने को लेकर चर्चा हुई.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र की मदद से तुर्की की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच अहम ग्रेन डील (यूक्रेनी बंदरगाहों पर फंसे अनाज के लिए समझौता) के बाद उसने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के तुर्की "बैलेंस की नीति" अपना रहा है.
मॉस्को में मौजूद रूस-तुर्की संबंधों के जानकार और राजनीतिक विश्लेषक करीम हास कहते हैं, "अमेरिका और पश्चिमी मुल्कों के साथ अपने संबंधों में वो रूस का दांव खेल रहे हैं क्योंकि वो जानते हैं कि वो उनके लिए महत्वपूर्ण सहयोगी हैं. वहीं वो रूस के साथ अपने संबंधों में पश्चिम का दांव खेल रहे हैं."
कुछ जानकार मानते हैं अर्दोआन दोतरफ़ा रणनीति अपना रहे हैं जिससे उनको आर्थिक और राजनीतिक लाभ हो सकता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
तुर्की का आर्थिक संकट और अर्दोआन की मुश्किलें
बीबीसी से बात करते हुए करीम हास कहते हैं, "अर्दोआन को दो चीज़ों से प्यार है, पहला ताक़त और दूसरा पैसा."
तुर्की गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है और बीते दो दशकों से तुर्की की सत्ता में रहे अर्दोआन की पॉपुलरिटी में हाल के दिनों में गिरावट दर्ज की जा रही है.
बीते 12 महीनों में तुर्की की मुद्रा लीरा की कीमत गिरकर आधी रह गई है जबकि महंगाई बढ़कर 80 फ़ीसद से भी अधिक हो गई है.
तुर्की में जून 2023 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं. ये अर्दोआन के लिए बड़ी चुनौती है और लंबे वक़्त तक सत्ता में रहे अर्दोआन आगे भी अपने पद पर बने रह सकेंगे, ये कह पाना मुश्किल है.
करीम हास कहते हैं, "देश की अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट सके और चुनाव शांतिपूर्ण तरीक़े से हो सकें, इसके लिए चुनाव से पहले अर्दोआन को बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद और विदेशी निवेश चाहिए."

अर्दोआन के सामने मुश्किलें
तुर्की की मुद्रा लीरा लुढ़ककर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.
महंगाई बढ़कर 80 फ़ीसद से भी अधिक हो गई है.
अर्थशास्त्रियों की सलाह है कि बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाएं, लेकिन अर्दोआन ऐसा नहीं चाहते.
आर्थिक मुश्किलों के बीच अर्दोआन की पॉपुलैरिटी कम हो रही है.
विपक्षी पार्टियां भी अकेले मैदान में उतरने की बजाय गठबंधन कर रही हैं और महंगाई को मुद्दा बना रही हैं.
जून 2023 के चुनावों में उनके लिए सत्ता में बने रहने की लड़ाई मुश्किल हो सकती है.

रूस को सहयोगी की ज़रूरत
रही रूस की बात तो, उसे एक सहयोगी की ज़रूरत है ताकि वो जितना हो सके प्रतिबंधों को नज़रअंदाज़ करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपना सामान बेच सके.
करीम हास कहते हैं, "तुर्की ये मौक़ा देख सका है कि वो रूस और पश्चिमी मुल्कों के बीच संबंधों में एक पुल की तरह काम कर सकता है और एक कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स का केंद्र बन सकता है."
वे कहते हैं, "युद्ध शुरू होने के बाद से रूस पर प्रतिबंध लगाए गए और कई पश्चिमी मुल्कों ने उसके साथ व्यापार बंद कर दिया था. लेकिन ऐसी कुछ कंपनियों ने अब इस्तांबुल में अपने लॉजिस्टिक्स सेंटर खोल लिए हैं और रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं."
"और इसी तरह कई रूसी व्यवसायी जो पश्चिमी मुल्कों के साथ बिज़नेस किया करते थे उन्होंने अपने लॉजिस्टिक सेंटर्स अब तुर्की में खोल लिए हैं."
वे कहते हैं, "हम देख रहे हैं कि पश्चिमी मुल्कों के रूस के बाज़ार से बाहर जाने के बाद बनी जगह को लेने के लिए हर दिन तुर्की की कोई न कोई कंपनी रूसी बाज़ार में एंट्री कर रही है."

इमेज स्रोत, Getty Images
व्यापार, निवेश और गैस
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तुर्की और रूस के बीच का व्यापार फलफूल रहा है और दोनों के द्विपक्षीय रिश्ते मज़बूत हो रहे हैं.
तुर्की स्टैटिस्टिक्स ऑफ़िस तुर्क स्टैट से जारी निर्यात डेटा के अनुसार जुलाई 2021 के मुक़ाबले जुलाई 2022 में दोनों के बीच के व्यापार में 75 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
जुलाई 2021 में दोनों के बीच 41.7 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ, जो जुलाई 2022 में बढ़कर 73 करोड़ डॉलर हो गया.
इसी साल अगस्त में पुतिन और अर्दोआन के बीच रूस से सोची में मुलाक़ात हुई थी जिसमें दोनों के बीच ऊर्जा, आर्थिक सहयोग, खेती और पर्यटन के क्षेत्र में हो रहे व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक करने पर सहमति बनी. 2021 में इन क्षेत्रों में दोनों के बीच व्यापार 33 अरब डॉलर का था, ऐसे में इसे बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक करने को महत्वाकांक्षी उद्देश्य माना जा रहा है.
तुर्की की अर्थव्यवस्था को रूस से हो रहे आर्थिक फायदे का एक उदाहरण आकुयू परमाणु प्लांट है. देश के दक्षिण में भूमध्यसागर के तट के पास बन रहे आकुयू परमाणु प्लांट के लिए रूस की एक सरकारी कंपनी 20 अरब डॉलर तुर्की को देगी.
हालांकि कुछ जानकार मानते हैं कि ये ज़रूरत से अधिक पैसा होगा.
ऊर्जा सेक्टर में भी तुर्की मौजूदा स्थिति को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकता है.
तुर्की अपनी ज़रूरत का क़रीब आधा (45 फ़ीसदी तक) पेट्रोल-डीज़ल रूस से लेता है और वो इसमें डिस्काउंट के लिए रूस के साथ चर्चा कर रहा है.
दोनों के बीच इसी साल जनवरी में एक गैस डील हुई है जो अगले चार सालों तक लागू रहेगी. इस गैस डील में कोई प्राइस टैग नहीं है और इसी पर अर्दोआन डिस्काउंट मांगना चाहते हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
कुछ सप्ताह पहले तुर्की इस बात पर राज़ी हो गया था कि वो रूस से ख़रीद रहे रहे गैस के लिए आंशिक रूप से रूबल में पैसे देगा. वो रूस के केंद्रीय बैंक और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए बने स्विफ़्ट सिस्टम के प्रतिद्विंदी मेर पैमेन्ट सिस्टम को अपने देश में लागू करने के लिए राज़ी हो गया है.
युद्ध के शुरू होने के बाद से यूरोपीय संघों के देशों ने पर्यटन के लिए रूसी नागरिकों को वीज़ा देना सीमित कर दिया है, ऐसे में पर्यटन के क्षेत्र में भी तुर्की को रूस से फायदा मिल रहा है क्योंकि रूसी पर्यटक अब अपना रुख़ तुर्की की तरफ कर रहे हैं.
हालांकि तुर्की को इसका लाभ युद्ध शुरू होने के पहले कुछ महीनों से ही मिलना शुरू हो गया था. इस साल के पहले सात महीनों में तुर्की आने वाले रूसी पर्यटकों की संख्या 21 लाख थी. साल 2021 की तुलना में ये 47 फ़ीसदी अधिक थी.
बदल रही अंतरराष्ट्रीय छवि
जर्मन इंस्टीट्यूट फ़ॉर इंटरनेशनल अफ़ेयर्स एंड सिक्योरिटी में विश्लेषक दारिया इशाचेन्को कहती हैं कि रूस और पश्चिमी मुल्कों के बीच जारी तनाव से तुर्की को एक और बात का फायदा मिल रहा है, वो है उसकी "छवि जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व" मिल रहा है. मध्यस्थ के तौर पर भूमिका निभा रहे तुर्की की भू-राजनीतिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को महत्व मिल रहा है.
वे कहती हैं "इसके दो अच्छे उदाहरण आप देख सकते हैं, पहला मार्च में इस्तांबुल में रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल की बैठक और दूसरा, संयुक्त राष्ट्र की मदद से हुआ अनाज समझौता."
युद्ध के कारण काले सागर के बंदरगाहों में रखा अनाज विश्व बाज़ार तक पहुंच नहीं पा रहा था, और इस कारण कई जगहों पर खाद्य संकट पैदा हो गया था. अनाज समझौता होने के बाद इस अनाज को अब यूक्रेन से बाहर निकाला जा रहा है.
हालांकि करीम हास मानते हैं कि तुर्की की इस भूमिका का फ़ायदा पश्चिमी मुल्कों को भी हो रहा है.
वे कहते हैं, "अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन चाहते हैं कि रूस से बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए और उसके साथ बातचीत इस्तांबुल में हो, न कि बेलारूस और कज़ाख़स्तान में या फिर रूस के प्रभाव वाले किसी और देश में."
दूसरी तरफ़ वे कहते हैं कि अर्दोआन रूस के क़रीब जाकर पारंपरिक तौर पर अपने सहयोगी रहे पश्चिमी देशों को भी चेताना चाहता है.
करीम हास कहते हैं, "वो आर्थिक, कूटनीतिक और राजनीतिक मदद की अपनी कोशिश में अमेरिका और यूरोपीय मुल्कों के साथ मध्यस्थ के तौर पर अपनी स्थिति भी मज़बूत करना चाहते हैं. उनके लिए ये ज़रूरी है कि वो पश्चिम के नेताओं के साथ दिखें."
ये ख़ासकर इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है कि तुर्की में मानवाधिकारों के हालात को लेकर और सीरिया में अमेरिका समर्थित कुर्द विद्रोहियों को लेकर अमेरिका और पारंपरिक तौर पर यूरोपीय देशों के तुर्की के बीच के रिश्तों की मज़बूती कम होने लगी थी. (तुर्की इन कुर्द विद्रोही लड़ाकों के ख़िलाफ़ अभियान चला चुका है).

इमेज स्रोत, Getty Images
संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत
हालांकि दारिया इशाचेन्को मानती हैं कि दोनों तरफ़ का खेल खेलने के अपने नुक़सान भी हो सकते हैं, ख़ासकर इस लिहाज़ से कि रूस की महत्वाकांक्षा उसके लिए तनाव का कारण बन सकती है.
वे कहती हैं, "रूस काले सागर तक अपना विस्तार करना चाहता है और तुर्की के लिए ये गंभीर चिंता का विषय बन सकता है."
वे कहती हैं कि तुर्की के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना तो ज़रूरी है लेकिन उसके लिए ने बल्कि काले सागर में बल्कि मध्यपूर्व और पूर्वी भूमध्यसागर, एजियन सागर और कॉकेसस में भी अपने भू-राजनीतिक हितों की रक्षा करना भी बेहद ज़रूरी है.
करीम हास कहते हैं, "न तो वो रूस की छांव में उसका छेटा भाई बनकर रहना चाहेंगे, न नेटो से बाहर निकलना चाहेंगे या न ही पश्चिमी मुल्कों से अपने रिश्ते बिगाड़ना चाहेंगे."
तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने हाल में यूक्रेन को हथियार देने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना की है. हालांकि तुर्की ख़ुद रूस से लड़ने के लिए यूक्रेन को आधुनिक हथियार दे चुका है.
यूक्रेन को हाइमार्स और दूसरे अत्याधुनिक हथियार देने को लेकर इशाचेन्को कहती हैं कि इससे युद्ध की दिशा यूक्रेन के पक्ष में बदल सकती है.
वे कहती हैं, "तुर्की हथियार देने का विरोध क्यों कर रहा है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि तुर्की और पश्चिमी मुल्क इस युद्ध का क्या परिणाम चाहते हैं."
"पूरी तरह से रूस की हार तुर्की के हित में नहीं होगी क्योंकि तुर्की दोनों पक्षों के बीत संतुलन बना कर चल रहा है और ऐसे हुआ वो एक पक्ष का समर्थन खो सकता है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















