रूस-यूक्रेन के बीच तुर्की में हुआ अहम समझौता, अर्दोआन हुए ख़ुश

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- Author, फ्लोरा ड्रूरे
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच दोनों देशों में एक ''मिरर'' समझौता हुआ है, जिसके तहत यूक्रेन से काला सागर के ज़रिए अनाज का निर्यात हो सकेगा.
इसे फ़ैसले से युद्ध के बीच यूक्रेन में पड़े हुए लाखों टन अनाज को निर्यात किया जा सकेगा.
रूस ने कहा है कि वह समुद्र के रास्ते अनाज की ढुलाई करने वाले मालवाहक जहाजों पर हमले नहीं करेगा. वह उन बंदरगाहों पर भी हमले नहीं करेगा, जहाँ से अनाज की सप्लाई हो रही है.
संयुक्त राष्ट्र ने इसे ऐतिहासिक समझौता क़रार दिया है.
समझौते के तहत यूक्रेन भी कुछ शर्तें मानने को तैयार हो गया है. इसके तहत उसे खाद्यान्न सप्लाई ले जाने वाले जलपोतों की जाँच की अनुमति देनी होगी. जाँच के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं इनके ज़रिए हथियारों की सप्लाई तो नहीं की जा रही है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस समझौते को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा है कि यह युद्ध ख़त्म करने की दिशा में एक अहम क़दम है. अर्दोआन ने कहा कि शांति कायम करने तक वह चुप नहीं बैठेंगे.
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24 फ़रवरी को रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दुनिया भर में शुरू हुए खाद्यान्न संकट के चलते लाखों लोगों पर भूख का ख़तरा मंडराने लगा था.
यूक्रेन के नेटो में शामिल होने की संभावना के चलते रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया था जिसके बाद से दोनों देशों के बीच जंग जारी है.
हालांकि, रूसी हमले के पाँच महीने बाद भी यूक्रेन ने रूस के साथ सीधा समझौता करने से इनकार कर दिया था. साथ ही चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह के ''उकसावे'' का ''तुरंत सैन्य जवाब'' दिया जाएगा.
इसलिए ये समझौता रूस या यूक्रेन में नहीं बल्कि तुर्की में हुआ. समझौते के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि एक मेज़ पर भी नहीं बैठे. पहले रूस के रक्षा मंत्री सेर्गेई शाइगु ने और फिर यूक्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर मंत्री ओलेकसांद्र कुब्राकोव ने 'मिरर' समझौते पर हस्ताक्षर किए.
मिरर समझौता वो होता है, जिसमें किसी प्रस्ताव को बिना किसी बदलाव के स्वीकार कर लिया जाता है.

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अनाज का संकट
इस समझौते के होने में दो महीने का समय लगा है और ये 120 दिनों यानी चार महीनों तक लागू रहेगा. इसे लेकर समन्वय और निगरानी का काम तुर्की के शहर इस्तांबुल में किया जाएगा. यहाँ संयुक्त राष्ट्र, तुर्की, रूस और यूक्रेन के अधिकारी काम करेंगे.
अगर दोनों पक्षों की सहमति बनती है तो इस समझौते को और आगे बढ़ाया जा सकता है.
यूक्रेन के अनाज का निर्यात रुकने से दुनिया भर में गेंहू से बने उत्पादों जैसे ब्रेड और पास्ता का संकट पैदा हो गया था. ये उत्पाद और महंगे हो गए थे. इसके अलावा खाना पकाने के तेल और उर्वरकों के दाम भी बढ़ गए थे.
अमेरिका ने रूस से इस पर ज़ल्दी फ़ैसला लेने की अपील की थी. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी का कहना था कि ये समझौता ''दुनिया में सबसे कमज़ोर स्थिति में रह रहे लोगों को और अधिक असुरक्षा और कुपोषण की स्थिति में जाने से रोकने के लिए'' ज़रूरी है.
रूस के रक्षा मंत्री शाइगु ने पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि इस समझौते से आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए समाधान मिल सकता है.
उन्होंने कहा, ''मैं सिर्फ़ यूक्रेन के बंदरगाहों से कृषि उत्पादों के निर्यात शुरू करने की बात नहीं कर रहा बल्कि रूसी बंदरगाहों से भी कृषि उत्पादों और उर्वरकों के निर्यात को लेकर भी स्पष्ट रूप से इस दिशा में काम कर रहा हूँ.''

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राजनयिकों के मुताबिक इस समझौते के तहत इन बातों पर सहमति बनी है-
- समझौते के तहत रूस और यूक्रेन अनाज ले जाने वाले जहाजों को ब्लैक सी में सुरक्षित गलियारा देने के लिए राज़ी हो गए हैं.
- रूस समुद्र के रास्ते अनाज की ढुलाई करने वाले मालवाही जहाजों पर हमले नहीं करेगा. वह उन बंदरगाहों पर भी हमले नहीं करेगा, जहाँ से अनाज की आपूर्ति हो रही है.
- इन जहाजों के रास्ते में अड़चन न आए इसके लिए इनके साथ यूक्रेन का सुरक्षा दस्ता चलेगा. यह दस्ता समुद्र में बिछाई बारूदी सुरंग से बचने में मदद करेगा. अगर रास्ते में बिछाई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा तो यह काम कोई तीसरा देश करेगा.
- हथियारों की सप्लाई के रूस के डर को देखते हुए तुर्की संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से इन अनाज ले जा रहे जहाजों की जांच करेगा.
- काला सागर के ज़रिए रूसी अनाज और उर्वरक के निर्यात को सुविधा प्रदान की जाएगी.

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संयुक्त राष्ट्र ने क्या कहा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीबीसी की ओरला ग्यूरिन से कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के प्रमुख के तौर पर इस समय पर उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण काम किया है. उन्होंने इस्तांबुल में मौजूद लोगों से कहा, ''काले सागर में ये उम्मीद की किरण दिखाई दी है.''
यूक्रेन के दो करोड़ टन अनाज के निर्यात का रास्ता खुलने की संभावना से ही शुक्रवार को गेहूं के दामों में दो प्रतिशत की कमी देखी गई है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अपने संबोधन में पुष्टि की है कि देश के पास इस समय बेचने के लिए 10 अरब डॉलर का गेंहू है.
हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि रूस ''उकसावे की कार्रवाई कर सकता है और यूक्रेन सहित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को नाकाम करने की कोशिश कर सकता है. लेकिन, हमें संयुक्त राष्ट्र पर भरोसा है.''
उन्होंने कहा कि समझौते की सुरक्षा करना संयुक्त राष्ट्र के ऊपर है.
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने माना है कि अगर रूस इस समझौते को तोड़ता है तो संयुक्त राष्ट्र के पास उसे दंडित करने का कोई तरीक़ा नहीं है. लेकिन, ऐसा करना पूरी तरह अस्वीकार्य होगा और ''पूरा अंतराष्ट्रीय समुदाय बेहद सख़्ती से इसका जवाब देगा''.
रूसी रक्षा मंत्री शाइगु ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मीडियो को भरोसा दिलाया कि 'समझौते के तहत रूस पर "दायित्व है" और वो भी "इस बात का फ़ायदा नहीं उठाएंगे कि बंदरगाह खोले जा रहे हैं और रास्ते साफ़ हैं".
रूस ने हमेशा यूक्रेन के बंदरगाहों को बंद किए जाने की बात से इनकार किया है. वह यूक्रेन पर समुद्र में बारूदी सुरंगे बिछाने का आरोप लगाता है और रूस का आयात धीमा करने के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों को ज़िम्मेदार बताता है.
अफ्ऱीका के अख़बारों में छपे एक लेख में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ''इन आधारहीन'' आरोपों के लिए पश्चिमी देशों और यूक्रेन को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने इस पूरे मामले में अफ़्रीकी देशों के संतुलित रुख अपनाने की तारीफ़ की.
हालांकि, यूक्रेन का कहना है कि रूसी नौसेना उसके अनाज और अन्य सामान के समुद्र के रास्ते निर्यात को रोक रही है. उन्होंने रूस पर अनाज चुराने का आरोप भी लगाया.

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अफ़्रीकी देशों को बड़ी राहत
बीबीसी की एने सॉय के मुताबिक़ रूस-यूक्रेन के बीच हुए इस समझौते से हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में आने वाले देशों को बड़ी राहत मिलेगी. ये इलाक़ा फ़िलहाल सूखे की चपेट में है, जिससे खाद्य संकट पैदा हो गया है. वहीं, कोरोना महामारी और यूक्रेन-रूस युद्ध ने इस संकट को और बढ़ा दिया है.
अमेरिकी डिवलपमेंट एजेंसी की अधिकारी समांथा पावर ने कहा कि ये समझौता इस इलाक़े के संकट को हल करने में एक अहम कड़ी साबित होगा.
इस समझौते में अहम भूमिका निभाने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा कि ये समझौता युद्ध ख़त्म करने की दिशा में पहला क़दम हो सकता है.
उन्होंने कहा, ''हम यूक्रेन और रूस के साथ जो संयुक्त क़दम उठा रहे हैं, वो संभवता शांति के रास्ते पर ले जाएगा.''
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासचिव इसे लेकर कुछ कम सकारात्मक दिखे. उन्होंने कहा, ''इस समय शांति प्रक्रिया के लिए कोई स्थितियां नज़र नहीं आतीं.''

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बीबीसी के डिप्लोमैटिक संवाददाता पॉल एडम्स का विश्लेषण
एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि युद्ध कर रहे दो देशों के बीच इस तरह का समझौता होना असाधारण है.
राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा कि ये क़दम युद्ध के अंत की ओर ले जा सकता है.
लेकिन, इस सबके बावजूद किसी बड़े समझौते के आसार बहुत कम नज़र आते हैं. हाल के दिनों में रूस ने युद्ध तेज़ करने के इरादों के संकेत दिए हैं जबकि यूक्रेन में इस बात पर चर्चा है कि वो कब और कहाँ इन हमलों का जवाब दे सकता है.
पश्चिमी देशों से मिले हथियारों से यूक्रेन को एक नई उम्मीद मिली है. गुरुवार को ब्रिटेन की खुफ़िया एजेंसी एम16 के प्रमुख रिचर्ड मूरे ने कहा कि रूसी हमले जल्द ही अपनी ऊर्जा और गति खो देंगे जिससे यूक्रेन को जवाबी कार्रवाई का मौक़ा मिलेगा.
ऐसे में लगता है कि सिर्फ़ राष्ट्रपति अर्दोआन ही इस समझौते को शांति प्रक्रिया की तरफ़ बढ़ता कदम मान रहे हैं.
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