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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में गुस्से में क्यों हैं ये लोग?
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में कई बार उग्र प्रदर्शन हुए हैं.
इसकी शुरुआत इस साल 25 जुलाई से तब हुई जब कश्मीरी राष्ट्रवादी दलों के एक समूह ने बिजली कटौती और सरचार्ज के विरोध में रावलकोट ज़िले में धरना-प्रदर्शन शुरू किया.
प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि बिजली के बिल में जबरन टैक्स जोड़े जा रहे हैं, साथ ही बिजली कटौती भी बढ़ी है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस इलाक़े से बड़े पैमाने पर बिजली पैदा करने के बावजूद भी इलाक़े के लोगों को इसका कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है.
पुलिस झड़प के बाद ये प्रदर्शन हिंसक हो गए. भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और 20 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी से लोग नाराज़ हो गए और क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन का दायरा और बढ़ गया. इसमें वकील, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और मुख्यधारा के राजनीतिक दल भी शामिल हो गए.
प्रदर्शन की असल वजह क्या है?
वहाँ मौजूद लोगों का कहना है कि इस संघर्ष की असल वजह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लोगों में भविष्य को लेकर चिंता है.
दरअसल, ऐसी चर्चाएं हैं कि पाकिस्तान की सरकार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के अंतरिम संविधान में संशोधन करके इस पर पूरी तरह नियंत्रण करने की योजना बना रही है.
साल 2018 में पाकिस्तान ने मुज़फ्फ़राबाद को आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में स्वायत्तता दी थी. 2018 से पहले इस क्षेत्र में 'आज़ाद जम्मू कश्मीर काउंसिल' का भी दख़ल था. इस काउंसिल के मुखिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते थे. इसके पास कई विभागों का प्रशासनिक नियंत्रण रहता था जैसे कर वसूली, पर्यटन और प्राकृतिक संसाधन.
यहाँ रहने वाले कश्मीरियों का मानना है कि पाकिस्तान एक बार फिर संविधान में संशोधन करके 2018 में लाए गए बदलावों को पलटना चाहता है.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाली एक स्थानीय महिला कहती हैं, ''साल 2019 में जम्मू-कश्मीर में वो (भारत) जो कर चुके हैं, वो अगर हमारे साथ हुआ, तो हम रौंद दिए जाएँगे, हमारा अपना कुछ नहीं रहेगा.''
जैसा कि आप जानते हैं, पाँच अगस्त 2019 के दिन भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म करके उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के पूर्व प्रधानमंत्री फ़ारूक़ हैदर कहते हैं, ''शायद हिंदुस्तान-पाकिस्तान ने आपस में ये तय कर लिया है कि जो (हिस्सा) तुम्हारे पास है, वो तुम्हारे पास है, जो हमारे पास है वो हमारे पास है, धीरे-धीरे इसी लाइन ऑफ़ कंट्रोल को इंटरनेशनल बॉर्डर बना दिया जाएगा. ये कभी भी नहीं होगा. ये मुमकिन नहीं है कि जो अधिकार हमें मिले हुए हैं, उन्हें वापस कर दें. हम कोई सूबा नहीं है, जो हमें सूबों के बराबर लाना है.''
पाकिस्तानी प्रशासन वाले कश्मीर को विशेष दर्जा हासिल है जहाँ स्थानीय सरकार के प्रमुख को प्रधानमंत्री कहा जाता है और उसे देश के चार प्रांतों - पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और ख़ैबर पख्तूनख्वाह में नहीं गिना जाता.
हालांकि, इस प्रांत में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ की अगुवाई वाली सरकार ऐसे किसी भी क़दम से इनकार कर रही है. यहाँ के योजना, बिजली और विकास मंत्री चौधरी अब्दुल राशिद का दावा है कि बिजली की समस्या सुलझाई जा रही है और प्रदर्शन में गिरफ़्तार लोगों को भी रिहा कर दिया गया है.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का अपना झंडा, राष्ट्रगान, विधानसभा, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उच्च न्यायालय, यहां तक कि अपना चुनाव आयोग और टैक्स वसूल करने का सिस्टम भी है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से यह पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है.
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