अल-ज़वाहिरी की मौत के बाद अब कौन संभालेगा अल-क़ायदा की कमान

अल-ज़वाहिरी

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, मीना अल-लामी
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के नेता अयमन अल-ज़वाहिरी के अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी हमले में मारे जाने की ख़बर आने के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

अमेरिका ने 31 जुलाई को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक ड्रोन हमले में अल-ज़वाहिरी को मार दिया था.

अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए ने आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन चलाया था जिसमें अल-ज़वाहिरी की मौत हुई थी.

मौत की पुष्टि होने के बाद ही इस सवाल पर चर्चा होने लगी है कि अब अल-क़ायदा में अल-ज़वाहिरी की जगह कौन लेगा.

लेकिन, अभी तक इसे लेकर साफ़तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. अल-क़ायदा कभी भी सार्वजनिक तौर पर संगठन के प्रमुख की घोषणा नहीं करता है.

वीडियो कैप्शन, Cover Story: अल-ज़वाहिरीः अल-क़ायदा के नेता की पूरी कहानी

अल-ज़वाहिरी के तीन डिप्टी थे

लेकिन, मिस्र के सयैफ अल-अद्ल वो नाम हैं जिनकी अल-ज़वाहिरी के डिप्टी और उत्तराधिकारी के तौर पर पिछले कई सालों से चर्चा बनी हुई है.

अक्टूबर 2017 में अल-कायदा के वरिष्ठ नेता अबु-अल-क़सम अल-उर्दूनी ने कहा था कि अल-ज़वाहिरी के तीन डिप्टी थे, सभी मिस्र के रहने वाले थे लेकिन उनमें से दो की मौत हो गई थी. अबु-अल-क़सम उस दौरान सीरिया में थे.

सैफ़ अल-अद्ल के साथ अबु अल-खैर अल-मसरी और अबु मुहम्मद अल-मसरी अल-जवाहिरी के डिप्टी के तौर पर काम कर रहे थे.

इनमें से अबु अल-खैर की साल 2017 में सीरिया में मौत हो गई थी. वहीं, अबु मोहम्मद की ईरान में रहने के दौरान अगस्त 2020 में हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद सैफ़ अल-अद्ल को ही सार्वजनिक तौर पर अल-ज़वाहिरी का डिप्टी माना जाता था. अल-क़ायदा के किसी नेता या शीर्ष समर्थक ने इन दावों को खारिज नहीं किया है.

वीडियो कैप्शन, आशंकाएं जताई जा रही हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी से अल-क़ायदा को बल मिला है.

जिहादी गतिविधियां

कुछ जिहादियों के बयानों के मुताबिक अल-अद्ल और अल-मसरी अल-क़ायदा के उन पांच बड़े नेताओं में शामिल हैं जिन्हें साल 2015 में अल-क़ायदा के साथ हुई कैदियों की अदला-बदली में ईरान की जेल से रिहा किया गया था.

इनमें से तीन सीरिया चले गए जहां वो मारे जाने तक जिहादी गतिविधियां करते रहे. बाकी दो डिप्टी ईरान में थे. इनमें सिर्फ़ अल-अद्ल जिंदा हैं जो संभव है कि वो हाउस अरेस्ट में हों या उन पर यात्रा प्रतिबंध लगे हों.

अल-क़ायदा ने सार्वजनिक तौर पर अल-अद्ल को डिप्टी नेता के तौर पर संबोधित नहीं किया. यहां तक कि संगठन उनकी मौजूदा स्थिति और जगह के बारे में बताने से बचता है.

अल-अद्ल अलक़ायदा के प्रोपेगेंडा में बहुत कम दिखाई दिए हैं. अफ़ग़ानिस्तान के आर्काइव में उनकी कुछ तस्वीरे हैं. वो छद्म नाम के साथ लेख भी लिखते हैं जिससे उनकी सही पहचान का पता नहीं चलता.

संभव है कि आधिकारिक अल-क़ायदा मीडिया और संदेशों में अल-अद्ल का ज़्यादा ज़िक्र इस शर्मिंदगी से बचने के लिए भी किया जाता है कि संगठन का शीर्ष नेता शिया बहुल ईरान में मौजूद हैं, जिसे जिहादी अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं.

वीडियो कैप्शन, तालिबान की वापसी से अल क़ायदा को मिल सकती है संजीवनी

इस्लामिक स्टेट के समर्थक

अल-क़ायदा से अलग हुए जिहादियों ने हाल के सालों में अक्सर कहते रहे हैं कि अल-क़ायदा में अल-ज़वाहिरी की बजाए अल-अद्ल ही फ़ैसले लेते हैं. इन जिहादियों में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के समर्थक भी हैं

अगर वो अब भी ईरान में हैं तो अल-क़ायदा के लिए नेता के तौर पर उनके नाम की घोषणा करना चुनौती होगा क्योंकि उनकी अधिकार और आदेशों पर सवाल उठ सकता है.

मुख्यधारा के मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक और नाम को लेकर चर्चा बनी हुई है और वो हैं मोरक्को के अब्द अल रहमान अल-मघरेबी जिन्हें अल-क़ायदा का पुराना सदस्य माना जाता है.

लेकिन, ऐसा नहीं देखा गया है कि अल-क़ायदा में उनकी भूमिका और उत्तराधिकार को लेकर जिहादियों के बीच वर्तमान में या हाल के सालों में चर्चा हुई हो.

अल-अद्ल

इमेज स्रोत, www.fbi.gov

इमेज कैप्शन, अल-अद्ल

अल-अद्ल नहीं तो कौन?

हाल के सालों में अल-क़ायदा के कई नेता ड्रोन हमलों में मारे गए हैं जिसके चलते अल-क़ायदा के पास कम विकल्प बचे हैं. अगर विकल्प और कम होते हैं तो अल-क़ायदा अपनी क्षेत्रीय शाखाओं की तरफ़ देख सकता है.

साल 2013 में अल-क़ायदा की यमन शाखा (एक्यूएपी) के पहले नेता नासिर अल-वुहायशी को अल-ज़वाहिरी का डिप्टी बनाने को लेकर बड़े स्तर पर ख़बरे आई थीं. ये एक असामान्य बात थी.

हालांकि, अल-क़ायदा ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा सार्वजनिक तौर पर नहीं की थी. लेकिन, इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय शाखाओं के नेताओं को नेतृत्व के लिए चुना जा सकता है.

पर अल-वुहायशी नेतृत्व में नहीं आए थे क्योंकि 2015 में अमेरिकी ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई थी.

अल-क़ायदा के बड़े नेताओं में शामिल हैं संगठन की बंद हो चुकी सीरियाई शाखा के प्रमुख हुर्रास अल-दिन. वह 'पुराने अल-क़ायदा' के अफ़ग़ानिस्तान काल के दौरान के नेता हैं लेकिन, उनका लोकप्रिय सार्वजनिक प्रोफाइल नहीं है.

वीडियो कैप्शन, तालिबान और अल-क़ायदा के रिश्ते का सच?

'नुसरा फ्रंट'

अबु हुम्माम अल-सुरी (उर्फ फारुक़ अल-सुरी) अल-क़ायदा की पूर्व सीरियाई शाखा 'नुसरा फ्रंट' में वरिष्ठ सैन्य नेता थे.

उनका 1990 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान और बाद में इराक़ और सीरिया में सैन्य प्रशिक्षक के तौर पर प्रभावी जिहादी करियर रहा था.

अल-क़ायदा की साल 2014 की पूर्व नेता ओसामा बिन-लादेन पर बनाई गई बायोग्राफ़ी के मुताबिक़, अबु हुम्माम की लादेन समेत अल-क़ायदा अधिकारियों के साथ संबंध थे. इनका भी लोकप्रिय प्रोफ़ाइल नहीं है.

ज़रूरी नहीं कि अल-सुरी उम्मीदवार हों लेकिन अगर अल-क़ायदा में बिन लादेन के दिनों के उन अनुभवी नेताओं की सूची बनाएं जिन्हें बड़ी भूमिका दी जा सकती है, तो इनका नाम आता है.

एक और पुराने नेता एक्यूएपी के अधिकारी इब्राहिम अल-क़ासी (उर्फ खुबैब अल-सुदानी) हैं जिन्होंने पिछले साल 500 पन्नों की एक किताब प्रकाशित की थी.

वीडियो कैप्शन, तालिबान के कब्ज़े पर अल क़ायदा ने दी बधाई, मुसलमानों से क्या कहा?

अल-क़ायदा का इतिहास

इस किताब में अल-क़ायदा के अंदरूनी लोगों की नज़र से अल-क़ायदा का इतिहास बताया गया था. हाल के सालों में उन्होंने अल-क़ायदा की ओर से हमलों के लिए बुलाया गया है.

उनके अलावा एक्यूएपी के ख़ालिद बतारफ़ी, अल-क़ायदा की उत्तरी अफ़्रीकी शाखा (एक्यूआईएम) के अबु उबेदाह अल-अन्नाबी, सोमालिया में अल-शबाब के अहमद उमर दिरिये और माली में अल-क़ायदा के इयाद घाली भी उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं.

साल 2020 में अल-क़ायदा ने अपने कई शीर्ष नेताओं को खोया ता जिससे संगठन कमज़ोर पड़ा.

उस साल अल-क़याद के यमन के नेता क़ासिम अल-रायमी जनवरी में अमेरिकी हमले में मारे गए थे. उत्तरी अफ़्रीका में अलेजीरियन नेता (एक्यआईएम) अबेल मलिक द्रोकदेल जून में माली में फ्रांसीसी सेना के अभियान में मारे गए थे.

पुराने नेता अबु अल-क़ासम अल-उरदुनी के जून में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने की ख़बरे थीं.

वीडियो कैप्शन, तालिबान, आईएसआईएस और अलक़ायदा, दोस्त हैं या दुश्मन?

इस्लामिक स्टेट में उत्तराधिकार

उनके डिप्टी नेता अबु मुहम्मद अल-मसरी की अगस्त में ईरान में हत्या कर दी गई थी. उनके सेंट्रल मीडिया प्रमुख और विचारक हुसाम अब्द अल-रौफ़ की अक्टूबर में अफ़ग़ानी सेना के हाथों मौत हो गई थी.

अल-क़ायदा को लगे इन बड़े झटकों के कारण उसे अंडरग्राउंड होना पड़ा ताकि जो बचा है उसे सुरक्षित किया जा सके. इसके चलते अल-क़ायदा अपने लड़ाकों से संपर्क रखने की क्षमता सीमित हो गई थी.

उत्तराधिकार को लेकर अल-क़ायदा की मुश्किलों के बावजूद संगठन इस मामले में ज़्यादा देर करना या किसी अनजान चेहरे को चुनना नहीं चाहेगा.

वरना अल-क़ायदा को अपने प्रतिद्वंद्वी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट से आलोचना का सामना करना पड़ सकता है. जुलाई में अपने आख़िरी संदेश में अल-ज़वाहिरी ने इस्लामिक स्टेट में उत्तराधिकार को लेकर बात की थी.

इसमें उन्होंने इस्लामिक स्टेट के नेतृत्व को लेकर निशाना साधाते हुए उनके नेताओं को 'अबु अल-अननोन', 'अबु अल-मसकद' और 'अबु अल-हाइडिंग' कहा था, यानी ऐसे लोग जिनके बारे ज़्यादा जानकारी नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)