वो 'सेक्स स्कैंडल' जिसकी वजह से ब्रिटेन के मंत्रियों ने छोड़ा बोरिस जॉनसन का साथ

बोरिस जॉनसन

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ब्रिटेन में कल (मंगलवार) को प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार में भूचाल पैदा हो गया जब आधे घंटे के भीतर सरकार के दो बड़े मंत्रियों ने पीएम बोरिस की देश को चलाने की क्षमता पर सवाल उठाते हुए इस्तीफ़ा दे दिया.

ये संकट एक सेक्स स्कैंडल से उपजा है जिसमें दावा है कि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के एक क़रीबी सांसद लिप्त हैं.

वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने अपना इस्तीफ़ा देते हुए कहा कि ब्रिटेन के नागरिक ये उम्मीद करते हैं कि सरकार एक "सही, योग्य और गंभीर" तरीक़े से काम करे.

वहीं स्वास्थ्य मंत्री के पद से हटने का एलान करते हुए साजिद जाविद ने दावा किया कि सरकार "देश के हित में" काम नहीं कर रही है.

इन दोनों इस्तीफ़ों के बाद चर्चा शुरू हो गई कि सरकार भी शायद नहीं टिकेगी, और इसके बाद विरोधियों ने प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा भी माँग डाला.

लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने कहा, "सारी गंदगी, सारी नाकामी के बाद अब ये बात साफ़ है कि कंज़र्वेटिव सरकार गिर रही है."

लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एड डेवी ने कहा कि बोरिस जॉनसन से इस्तीफ़ा माँगते हुए "उनके कार्यकाल को एक ऐसी अराजक सरकार बताया जिसने देश को नाकाम किया है".

ब्रिटिश प्रधानमंत्री से इस्तीफ़े की माँग ऐसे समय आई है जब उनकी सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना किए एक महीना भी नहीं हुआ है जिसमें उनकी ही अपनी पार्टी के 41% सांसदों ने उनके ख़िलाफ़ मतदान किया.

तब बोरिस जॉनसन कोरोना महामारी के दौरान पाबंदियों के बावजूद प्रधानमंत्री आवास में पार्टियाँ करने को लेकर मुश्किल में आए थे.

ऋषि सुनक

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वो सेक्स स्कैंडल जिससे शुरू हुई मौजूदा संकट की शुरुआत

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30 जून को ब्रिटेन के समाचारपत्र 'द सन' ने एक रिपोर्ट छापी जिसमें दावा किया गया था कि सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद क्रिस पिंचर ने लंदन के एक प्राइवेट क्लब में दो मर्दों को आपत्तिजनक तरीक़े से छुआ.

बोरिस जॉनसन ने इसी साल फ़रवरी में पिंचर को पार्टी का डिप्टी चीफ़ व्हिप नियुक्त किया था. 'द सन' की रिपोर्ट आने के बाद पिंचर को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

मगर कुछ ही दिनों के भीतर ब्रिटेन की मीडिया में ऐसी और भी रिपोर्टें आईं. हाल के वर्षों में पिंचर के कथित यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कम-से-कम छह और मामले सामने आए.

पिंचर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया. उन्होंने माफ़ी माँग ली और कहा कि वो जाँच में पूरा सहयोग करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि वो "पेशेवर मेडिकल मदद" ले रहे हैं.

बोरिस जॉनसन

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बोरिस जॉनसन कैसे हैं लिप्त?

बोरिस जॉनसन वैसे तो इस सेक्स स्कैंडल से सीधे सीधे लिप्त नहीं हैं मगर इस स्कैंडल ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है.

एक ओर तो उनके चुनाव पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं इस मामले पर उनकी सरकार के रूख़ की भी आलोचना हो रही है.

1 जुलाई को ब्रिटेन सरकार ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री को पिंचर की नियुक्ति से पहले उन पर लगे किसी आरोप की कोई जानकारी नहीं थी. सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री को पिंचर पर लगाए गए "ख़ास आरोपों" की जानकारी नहीं थी.

इसके बाद भी उनके कई मंत्रियों ने यही बात दोहराई.

मगर, 4 जुलाई को प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि बोरिस जॉनसन को ऐसे आरोपों की जानकारी थी जिनसे निपटा गया या जिनपर औपचारिक शिकायत नहीं हुई. प्रवक्ता ने साथ ही कहा कि पिंचर की नियुक्ति को रोकना उचित नहीं समझा गया क्योंकि ये आरोप साबित नहीं हुए थे.

उसी दिन दोपहर में बीबीसी ने बताया कि बोरिस जॉनसन को 2019-20 में ही पिंचर के विरुद्ध लाई गई एक औपचारिक शिकायत के बारे में बताया गया था जब वो विदेश मंत्री थे. इस शिकायत पर आगे जाकर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई थी जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि दुर्व्यवहार हुआ था.

बाद में बोरिस जॉनसन ने बीबीसी से कहा- "मेरे पास एक शिकायत आई थी, मगर वो बहुत पुरानी बात है, और बस ज़ुबानी तौर पर कहा गया था...मगर ये कोई बहाना नहीं है, मुझे उस पर कार्रवाई करनी चाहिए थी."

प्रधानमंत्री ने पिंचर की नियुक्ति को एक ग़लती बताया और कहा कि उन्होंने बहुत बुरा व्यवहार किया है जिसके लिए उन्होंने पीड़ित लोगों से माफ़ी माँगी है.

क्रिस पिंचर

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आगे क्या हो सकता है?

बीबीसी के राजनीतिक संपादक क्रिस मैसन का विश्लेषण

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बीबीसी के राजनीतिक संपादक क्रिस मैसन का कहना है कि यह सब कुछ सच को लेकर है. कई तरह के आरोप और सवाल हैं. सरकार ने जिस तरीक़े से चीज़ों को हैंडल किया है, क्या उस पर लोग भरोसा करेंगे? पिंचर स्कैंडल से कई चीज़ें बदली हैं. कोरोना महामारी के लॉकडाउन में पार्टी का आयोजन हुआ और इसमें बोरिस जॉनसन भी शामिल हुए थे.

विवादों पर सरकार के जवाब बदलते रहे हैं. पहले बचाव में जो तर्क दिए गए वे बड़े हास्यास्पद थे. बोरिस जॉनसन एक महीने पहले ही अविश्वास प्रस्ताव जीते थे. जॉनसन के आलोचक नेतृत्व बदलने की मांग कर रहे हैं. बोरिस जॉनसन के जाने-माने आलोचक एंड्रूयू ब्राइडेन ने स्काई न्यूज़ से कहा है कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नियम में बदलाव की ज़रूरत है.

पिंचर स्कैंडल के कारण ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिति गंभीर हो गई है. शीर्ष के दो मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है और अभी यह सिलसिला थमेगा नहीं. इसमें और भी नाम जुड़ सकते हैं.

जून महीने में हुए उपचुनाव में पार्टी की हार से बोरिस जॉनसन पर और दबाव बढ़ा है. इस हार के कारण कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख ओलिवर डॉडेन को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. प्रधानमंत्री कार्यालय को उम्मीद है कि चीज़ें संभल जाएंगी. बोरिस जॉनसन के पास अब भी विदेश, गृह, रक्षा और व्यापार मंत्री हैं. याद रखना चाहिए कि गॉर्डन ब्राउन भी मंत्री के इस्तीफ़े के बाद बच गए थे क्योंकि बाक़ी कैबिनेट की वफ़ादारी उनके साथ थी.

लेकिन बोरिस जॉनसन की कैबिनेट में और भी जूनियर मंत्री उनके ख़िलाफ़ हैं और वे सुनक की राह पकड़ सकते हैं. इससे पहले टेरीज़ा मे को भी पार्टी में वोटिंग का सामना करना पड़ा था. वह जीत गई थीं लेकिन छह महीने में ही ब्रेग्ज़िट के कारण इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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