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अफ़गानिस्तान में भूकंप की तबाही और बेसहारा लोग
- Author, अली हमादानी और थॉम पूल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"कुछ हेलिकॉप्टर मदद के लिए आए लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि शवों को उठाने के सिवाय और क्या किया जाए."
ये अनुभव है बुधवार को भीषण भूकंप झेलने वाले अफ़गानिस्तान के लोगों का. भूकंप से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है.
भूकंप मंगलवार आधी रात आया. उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे.
बचावकर्मी कुछ इलाक़ों में नंगे हाथों से ही मलबा ख़ोद रहे हैं ताकि किसी भी तक प्रभावित इलाक़ों तक मदद पहुँचे. पूर्वी अफ़गानिस्तान के ग्रामीण इलाक़े में पहुँचना आसान नहीं. जैसे-जैसे तस्वीर साफ़ होगी मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है.
अहमद नूर कहते हैं, "रात डेढ़ बजे भूकंप आने के कुछ देर बाद ही मैं डरा हुआ था. मैंने अपने दोस्तों को खोजने की कोशिश की. उनमें से कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदार खो दिए. कुछ ठीक हैं लेकिन उनके घर ढह गए."
"आप हर तरफ़ एंबुलेंस साइरन की आवाज़ सुन सकते हैं. मैंने लोगों से बात की. वो बहुत परेशान थे. उन्होंने अपने क़रीबियों को खो दिया. वो बहुत ही तकलीफ़देह स्थिति में हैं."
एक पत्रकार ने कहा, "आप जिस रास्ते जाएंगे, वहाँ आपको अपने क़रीबियों को खोने वालों की चीख-पुकार सुनाई देगी."
बीबीसी को मिली एक तस्वीर में धूल से लिपटी एक तीन या चार साल की बच्ची दिख रही है, जो अपने टूटे-फूटे घर के सामने खड़ी है. वो घबराई है और अभी तक ये नहीं पता कि उसका बाक़ी परिवार कहाँ है, किस हाल में है. बीबीसी इस बच्ची के हालात के बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है.
49 वर्षीय अलेम वफ़ा पकतीका प्रांत पहुँचे हैं ताकि मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद कर सकें.
उन्होंने कहा, "यहां मदद के लिए कोई सरकारी कर्मी नहीं है बल्कि पास के शहरों और गाँवों से ही लोग यहाँ पीड़ितों को बचाने के लिए आ रहे हैं."
"मैं ख़ुद यहाँ सुबह आया हूं और अब तक 40 शव निकाले हैं. उनमें से अधिकांश बच्चे, बहुत छोटे बच्चे थे."
अफ़गानिस्तान के लोग पहले से ही कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. ग़रीबी चरम पर है और देश दशकों से हिंसाग्रस्त है. बीते साल जब तालिबान ने देश की सत्ता संभाली तो कई देशों ने अफ़गानिस्तान को विकास के लिए दी जा रही मदद भी रोक दी.
अफ़ग़ानिस्तान के बारे में जानिए
- तालिबान के हाथ में है अफ़ग़ानिस्तान की कमान
- अमेरिकी सेना ने 20 साल पहले तालिबान को सत्ता से हटाया था
- बीते साल अगस्त में कट्टरपंथी तालिबान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता संभाली
- तालिबान के सत्ता संभालने के बाद से ही देश भीषण खाद्य संकट से जूझ रहा है
भूकंप से और बदहाल हुए अस्पताल
पहले से ही ख़स्ताहाल सुविधाओं के बाद अब इस स्थिति से उबरना आना लगभग असंभव माना जा रहा है.
पकतीका में गयन ज़िले के एक डॉक्टर ने कहा, "भूकंप के पीड़ितों में डॉक्टर और नर्सें भी शामिल हैं."
"भूकंप के पहले भी हमारे पास लोगों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और जगह नहीं थीं और हमारे पास जो भी थोड़ा था, उसे भी भूकंप ने बर्बाद कर दिया. मैं नहीं जानता कि हमारे कितने सहयोगी अब भी ज़िंदा हैं."
सहायता एजेंसियां मदद करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन बुरी संचार व्यवस्था और बारिश के कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं. अब वो ज़रूरतमंदों को भोजन, दवाइयां और आपातकालीन आश्रय पहुँचाने पर ध्यान दे रहे हैं.
यूनिसेफ़ के सैम मॉर्ट ने कहा, "हमने अपनी मोबाइल और हेल्थ एंड न्यूट्रिशन टीम को प्रभावित ज़िलों में भेज दिया है ताकि वे घायलों को प्राथमिक उपचार दे सकें."
उन्होंने कहा, "सहायता के लिए हमने हाइजीन किट, कंबल, टेंट और तिरपाल के साथ ट्रक भेजे हैं लेकिन अभी बारिश इसके रास्ते में अड़चन बन रही है. बारिश की वजह से बचावकार्य में भी बाधा पैदा हो रही है."
"और ये सब उन लोगों के साथ हो रहा है जो पहले से ही भुखमरी झेल रहे हैं, जो ग़रीबी, बीमारी और सूखे की मार झेल रहे हैं."
"ये एक मज़बूत आबादी नहीं है."
तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी
6.1 तीव्रता वाले भूकंप के बाद भारी तबाही के बीच तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी है. इस भूकंप से अभी तक एक हज़ार से अधिक लोगों की जान चली गई है और कम से कम 1500 लोग घायल हुए हैं.
अभी भी मलबे के नीचे अनगिनत लोगों के दबे होने की आशंका है.
भूकंप से अफ़गानिस्तान का पकतीका प्रांत भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. संयुक्त राष्ट्र भी यहाँ मदद पहुँचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है.
भारी बारिश और संसाधनों की कमी की वजह से इस इलाके तक मदद पहुँचाना मुश्किल हो गया है.
भूकंप में बाल-बाल बचे लोगों ने बीबीसी को बताया कि भूकंप के केंद्र के पास गाँव पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं और सड़के, मोबाइल टावर भी उखड़ गए हैं.
बीते दो दशक का सबसे भीषण भूकंप तालिबान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
ये भूकंप खोस्त शहर से 44 किलोमीटर दूर आया और इसके झटके पाकिस्तान और भारत के हिस्सों में भी महसूस किए गए.
तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी अब्दुल कहर बल्खी ने कहा, "सरकार लोगों को उतनी वित्तीय मदद देने में सक्षम नहीं है, जितनी उन्हें ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, "मदद को व्यापक पैमाने पर बढ़ाना होगा क्योंकि ये एक भयावह भूंकप था, जैसा लोगों ने दशकों से नहीं देखा था."
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