अफ़ग़ानिस्तान: काबुल गुरुद्वारे पर हमले में दो की मौत, तालिबान ने कहा- हमलावर मारे गए

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारा 'करत-ए-परवान' पर एक चरमपंथी हमला हुआ है जिसमें अधिकारियों के अनुसार एक आम नागरिक और एक तालिबान सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई है और सात अन्य लोग घायल हैं.
उन्होंने बताया कि काबुल पुलिस के प्रवक्ता ख़ालिद ज़दरान ने कहा है कि हमला ख़त्म हो गया है और हमलावरों को मार डाला गया है.
ये हमला शनिवार सुबह हुआ. इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल नफ़ी टकूर ने बीबीसी को बताया कि गुरुद्वारे के बाहर कई धमाके हुए जिसके बाद कई हथियारबंद चरमपंथी गुरुद्वारे परिसर के भीतर चले गए.
वहीं गुरुद्वारे के एक स्थानीय अधिकारी गुरनाम सिंह ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि धमाके के वक़्त गुरुद्वारे के भीतर लगभग 30 लोग मौजूद थे. उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि कितने लोग जीवित हैं या मारे गए हैं. तालिबान के लोग हमें भीतर नहीं जाने दे रहे."
ये गुरुद्वारा अफ़ग़ानिस्तान में बचा आख़िरी गुरुद्वारा है. अफ़ग़ानिस्तान में सिख समुदाय के लोगों ने हाल ही में बताया था कि वहाँ अभी केवल 140 सिख रह गए हैं, जबकि 1970 के दशक में वहाँ लगभग एक लाख सिख रहा करते थे.
भारत सरकार ने काबुल में गुरुद्वारे पर हमले की निंदा की है और कहा है कि घटना पर नज़र रखी जा रही है.

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कैसे हुआ हमला
अफ़ग़ान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल नफ़ी टकूर ने बताया कि ये यह हमला स्थानीय समयानुसार क़रीब सुबह साढ़े छह बजे हुआ.
टकूर ने बताया कि हमलावरों ने करत-ए-परवान परिसर में घुसने से पहले वहां मौजूद गार्ड्स पर हैंडग्रेनेड से हमला भी किया, जिसकी वजह से आग लग गई और दो लोग घायल हो गए जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
प्रवक्ता ने बताया कि हमलावर भीड़-भाड़ वाली जगह पर कार बम विस्फोट भी करना चाहते थे.
उनके मुताबिक़, "धर्म और देश के दुश्मन भीड़-भाड़ वाली जगह पर हमला करना चाहते थे लेकिन वे अपने लक्ष्य तक पहुंच नहीं पाए और उससे पहले ही कार में धमाका कर दिया."
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टकूर ने बताया कि हमलावरों को गुरुद्वारे में घेर लिया गया है और जल्दी ही पूरी स्थिति पर काबू पाते हुए इलाक़े को सामान्य करवा लिया जाएगा.
अफ़ग़ानिस्तान के न्यूज़ चैनल टोलो न्यूज़ ने घटना का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें विस्फ़ोटकों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही है.
कुछ प्रत्यदर्शियों ने बताया कि एक के बाद एक कई विस्फोटों की आवाज़ सुनाई दी. धमाकों का धुआँ आसमान में छा गया था.
इसके बाद अफ़गान सुरक्षा बलों ने भी चेतावनी में कई गोलियाँ दागीं. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाक़े को अपने कब्ज़े में ले लिया है.
भारत सरकार ने क्या कहा
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर इस हमले की निंदा की है. उन्होंने लिखा है, "गुरुद्वारा करत-ए-परवान में हुए कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए. हमले के बाद से ही घटनाक्रम पर नज़दीकी नज़र रखी जा रही है. हम लोगों की सलामती के लिए चिंतित हैं. "
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भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस पर बयान जारी किया है. उन्होंने कहा है, " भारत इस हालात पर अपनी नज़र बनाए हुए है और जानकारी मिलने का इंतज़ार कर रहा है."
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बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने दावा किया है कि अफ़ग़ानिस्तान सैनिकों ने काबुल के दो चरमपंथियों को मार गिराया है. इस अभियान में तीन सैनिक भी घायल हुए हैं.
तालिबान के नियंत्रण के बाद से बढ़े हैं हमले- अफ़ग़ान राजदूत
काबुल में हुए हमले से एक दिन पहले भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फ़रीद मामुंदज़े ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद से देश में चरमपंथी हमलों में वृद्धि हुई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अफ़ग़ान राजदूत ने शुक्रवार को एक कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के लोग बीते कुछ सालों के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे हैं. देश को आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षात्मक संकट का सामना करना पड़ रहा है.
राजदूत फ़रीद मामुंदज़े अफ़ग़ानिस्तान में पिछली अशरफ़ गनी सरकार के दौरान भारत में राजदूत नियुक्त किए गए थे.
उन्होंने कहा, "पिछले साल अगस्त में सत्ता परिवर्तन ने देश में जटिल मानवीय संकट, सुरक्षा के संकट और राजनीतिक संकट को जन्म दिया है. मौजूदा पीढ़ी अभी तक के अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है."
उन्होंने तालिबान सरकार पर आरोप लगया कि उनके कई चरमपंथी संगठनों के साथ संबंध हैं.
फ़रीद ने दावा किया कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान के सत्ता नियंत्रण के बाद से देश में चरमपंथी गतिविधियों में वृद्धि हुई है.
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