रूस ने आज के दिन किसे हराया था? जानिए क्या है विक्ट्री डे

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- Author, पॉल किर्बी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
पिछले कुछ सालों से रूस में 9 मई को मनाए जाने वाले विजय दिवस ने एक वार्षिक कार्यक्रम का दर्जा हासिल कर लिया है.
इस मौके पर रूस की राजधानी मॉस्को समेत अन्य शहरों में सैन्य परेड आयोजित की जाती है.
ये वो तारीख़ है जब द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर जीत हासिल की गई थी.
व्लादिमीर पुतिन के दौर में विजय दिवस रूसी सेना और सैन्य साज़ो-सामान की ताक़त दिखाने के साथ-साथ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मारे गए रूसी सैनिकों को याद करने का मौक़ा बन गया है.
दूसरे विश्व युद्ध में 2.7 करोड़ सोवियत नागरिक मारे गए थे जो किसी भी देश में होने वाली सबसे अधिक जनहानि थी. रूसी इस युद्ध को ग्रेट पेट्रिओटिक वॉर के रूप में याद करते हैं.
इस साल इस आयोजन का अपना ही महत्व है.
यूरोप को आज़ाद कराने वाले रूस ने महीनों से अपने ही पड़ोसी यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा हुआ है और अब तक उसे ऐसी कोई सैन्य सफलता नहीं मिली है, जिसका वह जश्न मना सके.
कितना अहम है साल 2022 का विजय दिवस
युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाली रेजिमेंट्स रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रपति पुतिन के सामने परेड करेंगी. इस मौक़े पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वेयर से भाषण देंगे जिस पर सबकी निगाहें होंगी ताकि रूस के अगले क़दम का अंदाजा लगाया जा सके.
पुतिन अक्सर इस मौक़े पर अपने इरादे बयां करने वाले संदेश जारी करते हैं.
सोवियत संघ के दौर में विजय दिवस की परेड कभी-कभी हुआ करती थी. साल 1995 में राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने नाज़ी जर्मनी पर जीत की 50वीं वर्षगांठ पर एक बार फिर इस आयोजन में नई जान फूंकी.
इसके बाद व्लादिमीर पुतिन ने साल 2008 में इसे एक वार्षिक आयोजन की शक्ल दी और सैन्य साजो-सामान को दिखाना शुरू किया.
रूसी पहचान बड़े पैमाने पर विजय दिवस की पृष्ठभूमि में गढ़ी गई है, जिसमें स्कूली किताबों और इतिहास की किताबों में रूस को यूरोप के युद्धकालीन मुक्तिदाता के रूप में दिखाया गया है.
ग्लासगो यूनिवर्सिटी के अम्मोन चेस्किन कहते हैं, "किसी सामान्य वर्ष में भी विजय दिवस रूसी ताक़त, पुतिन के नियंत्रण और उनके प्रभाव को दिखाने का मौका होता है. और इस साल इसमें बढ़ोतरी हुई."

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पुतिन क्या घोषणा कर सकते हैं?
युद्ध अभियान ख़त्म किए जाने से जुड़ी घोषणाओं को लेकर जो कयास लगाए जा रहे थे, उनका खंडन किया जा चुका है.
ख़बरें आ रही हैं कि पुतिन इस मौके पर पूर्ण युद्ध का एलान करेंगे या वह इस युद्ध में रूसी पुरुषों के मोर्चे पर जाने का एलान करेंगे.
हालांकि, रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोफ़ ने कहा है कि रूसी सेना किसी तारीख़ विशेष को ध्यान में रखते हुए अपने अभियान में कृत्रिम रूप से बदलाव नहीं करेगी.
यूक्रेन युद्ध में रूस को भारी नुकसान होने की वजह से इस मौके पर बड़े एलान किए जा सकते हैं. हालांकि, पूरी सेना को युद्ध के मैदान में उतारने का फ़ैसला शायद न लिया जाए.
पिछले कुछ हफ़्तों में जॉब वेबसाइट्स पर ऐसे कई विज्ञापन नज़र आए हैं. इनमें मोर्चेबंदी में विशेषज्ञ लोगों के लिए अवसर पैदा होने की बात की गयी है.
लेकिन इस तरह का कदम राष्ट्रपति की लोकप्रियता को झटका दे सकता है और संभवत: 9 मई का दिन ऐसी घोषणा करने का सही वक़्त नहीं होगा.
विशेष सैन्य अभियान
पुतिन ने साल 2014 में क्राइमिया पर क़ब्ज़े के बाद काले सागर के बंदरगाह सेवस्तोपोल पर हज़ारों दर्शकों के सामने अपनी जीत का जश्न मनाया था.
इसके बाद रेड स्क्वैयर में विजय दिवस के मौके पर दिए भाषण में उन्होंने फासिज़्म को हराने की बात कही थी.
सेंटर फॉर पोलिश-रूसी डायलॉग एंड अंडरस्टेंडिंग से जुड़े अर्नेस्ट विस्ज़कीविक्ज़ कहते हैं, "इस साल का प्रमुख उद्देश्य उस जीत का एलान करना था जो कि फरवरी में हो जानी थी. वे सोमवार के लिए एक पीआर स्टंट की तैयारी कर रहे हैं. क्योंकि रूसी नागरिकों को ये दिखना ज़रूरी है कि वे जिस विशेष सैन्य अभियान के बारे में सुन रहे हैं, उससे कुछ हासिल हुआ है."
और यूक्रेन की सरकार अपदस्थ करने का जश्न मनाने की जगह रूसी सरकार को मारियुपोल के ज़्यादातर इलाके पर कब्जे से संतुष्ट होना पड़ेगा.
मारियुपोल शहर भले भी तबाह हो गया हो लेकिन रूस ने लगातार यूक्रेन के डी-नाज़ीफिकेशन और असैन्यीकरण की बात की. अजोव बटालियन को हराने का दावा किया जा सकता है जिसे रूस ने ग़लत ढंग से नाज़ी बल के रूप में दिखाया है.
द्वितीय विश्व युद्ध में जीत का जश्न मनाने के लिए आयोजित होने वाले विजय दिवस के दौरान यह बात प्रतिध्वनित होगी.

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नाज़ियों के ख़िलाफ़ खड़ा होने का दावा
विश्लेषण करने वाली संस्था रिडल रसिया के सह-संस्थापक ओल्गा इरिसोवा कहते हैं, "रूसी शहरों और क्षेत्रीय राजधानियों में हम विजय दिवस के प्रतीकों को देख सकते हैं. सामान्य रूप से इन प्रतीकों में 9 मई 1945 का जिक्र होता था लेकिन इस साल ये 1945/2022 है. ऐसे में वे लोगों को ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे (रूसी सरकार) एक बार फिर नाज़ियों के ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं."
मारियुपोल शहर में सुरक्षा से जुड़े ख़तरों की वजह से किसी तरह की विजय दिवस परेड नहीं होगी.
इस क्षेत्र में रूस समर्थित नेता डेनिस पुशिलिन ने कहा है कि परेड के लिए तब तक इंतज़ार करना होगा जब तक मारियुपोल उनके तथाकथित डोनेत्स्क पिपुल्स रिपब्लिक का हिस्सा नहीं बन जाता.
हालांकि, जश्न मनाए जाने के लिए कुछ सामान्य कार्यक्रमों का आयोजन होगा. और उन्हें रूसी टेलीविज़न की कवरेज़ में मुख्यता से दिखाया जा सकता है.
इस शहर में 9 मई से पहले कई बड़ी हस्तियां आ चुकी हैं.
इनमें रूस के टीवी स्पिन डॉक्टर व्लादिमीर सोल्वियोफ़ और राष्ट्रपति के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ सर्गेई किर्येन्को के नेतृत्व में आया दल शामिल है.

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विजय दिवस परेड में क्या दिखेगा?
रेड स्क्वैयर पर होने वाली परेड सैन्य साजो-सामान दिखाने का एक ज़रिया भी है. ये रूसी सरकार के लिए अपने नये हथियार दिखाने का मौका है.
साल 2015 में विक्ट्री डे परेड के मौके पर अरमाटा टी-14 टैंक दिखाया गया था.
लेकिन यूक्रेन के साथ युद्ध में नज़र न आने की वजह से इस पर सबकी निगाहें होंगी. क्योंकि यह अभी भी युद्ध के लिए तैयार नहीं है.
यूक्रेन का कहना है कि उसने इस युद्ध के दौरान रूस के 1000 से ज़्यादा टैंक नष्ट कर दिए हैं जोकि अपेक्षाकृत रूप से कम आधुनिक थे.
बीबीसी रूसी सेवा के विश्लेषण के मुताबिक़, साल 2021 की तुलना में इस बार कम सैनिक और कम सैन्य साजो-सामान नज़र आएंगे. इसके बाद भी लगभग दस हज़ार सैनिक और 129 तरह के सैन्य उपकरण नज़र आएंगे.
इस दौरान रूस का सबसे नया टैंक टी-80बीवीएम और पंतशिर-एस1 एंटी-एयरक्राफ़्ट मिसाइल सिस्टम दिख सकता है. हवा में रूसी वायु सेना का प्रदर्शन पहले जैसा रहेगा जिसमें 77 विमान और हेलिकॉप्टर शामिल होंगे.
रूसी एयरफोर्स इस युद्ध के दौरान अपनाए गए विवादित प्रतीक अंग्रेजी भाषा के अक्षर Z की फॉर्मेशन आसमान में दिखाएगी. रेड स्क्वैयर के आसमान में पिछले कुछ दिनों से इसकी तैयारी भी की जा रही है.

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विदेशी मेहमानों का न आना
इस साल विदेशी मेहमान नहीं आएंगे. रूस सरकार के मुताबिक़, इसकी वजह 77वीं वर्षगांठ को अहम आयोजन न होना है.
ओल्गा इरिसोव कहते हैं कि विजय दिवस के मौके पर जो भी संदेश जारी किए जा रहे हैं, उन्हें रूसी जनता को ध्यान में रखते हुए गढ़ा गया है.
रूसी सरकार द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ियों के ख़िलाफ़ भीषण संघर्ष की कहानियों की वजह से लोगों में प्रबल भावनाएं जगाने में सफल हो गए हैं क्योंकि ज़्यादातर रूसी लोगों ने अपने परिवार के किसी शख़्स या रिश्तेदारों को द्वितीय विश्व युद्ध में खोया है.
इस मौके पर रूस के कई शहरों में कार्यक्रम होंगे. लेकिन पड़ोसी देशों में 9 मई का महत्व कम होता जा रहा है.
यूक्रेन ने इस युद्ध में भारी नुकसान झेला है. एक हालिया ओपिनियन पोल में सामने आया है कि इस दिन को जीत के बजाय उन लोगों की याद में मनाया जाना चाहिए जिन्होंने इस युद्ध में अपनी जान गंवाई है.
क़ज़ाख़स्तान ने लगातार तीसरे साल अपनी सैन्य परेड को रद्द कर दिया है और लातविया ने इसे यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों को याद करने वाले दिन के रूप में मनाने का एलान कर दिया है.
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