यूक्रेन पर हमले से ठीक पहले पुतिन और जिनपिंग के बीच हुई थी ये डील

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- Author, मॉनिटरिंग सर्विस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुए दो महीने से ज़्यादा का समय बीत चुका है. इस बीच ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.
पश्चिमी देशों की तमाम कंपनियों ने रूस से अपना व्यापार समेट लिया है. चीन की कुछ कंपनियों ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं.
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मज़बूत बने हुए हैं.
चीन 24 फरवरी से पश्चिमी देशों की ओर से पुतिन की निंदा करने एवं रूस पर अमेरिका के साथ मिलकर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का दबाव झेल रहा है. चीन ने अब तक इस दबाव के आगे घुटने नहीं टेके हैं.
हालांकि, रूस में बढ़ते व्यापारिक जोख़िमों की वजह से ड्रोन बनाने वाली डीजेआई एवं दूरसंचार क्षेत्र की ख़्वाबे जैसी कुछ मुख्य चीनी कंपनियों ने कथित रूप से रूस से अपना व्यापार समेट लिया है.
चीन के पेमेंट सिस्टम यूनियनपे ने भी प्रतिबंधित रूसी बैंकों को कार्ड जारी करना बंद कर दिया है.
इसके साथ ही चीनी अधिकारी एवं कंपनियां रूस में पश्चिमी कंपनियों के निकलने की वजह से पैदा हुए आर्थिक खालीपन को दिलचस्पी से देख रहे हैं.
रूस और चीन के बीच व्यापार एवं चीन को रूसी गैस के निर्यात में भी लगातार बढ़त देखी जा रही है.
इससे संकेत मिलते हैं कि यूक्रेन युद्ध की वजह से बदले वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय हालातों को देखते हुए शुरुआती सामंजस्य के बाद दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते मज़बूत रहेंगे.

बैंक और अमेरिकी प्रतिबंध
3 मार्च को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक ख़बर छपी थी कि चीन समर्थित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक यूक्रेन युद्ध के चलते रूस और बेलारूस से जुड़ी अपनी सभी व्यावसायिक गतिविधियों को स्थगित करके उनकी समीक्षा कर रहा है.
ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका) द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक ने भी इसी दिन एक मिलता-जुलता बयान जारी किया.
इस बयान में कहा गया कि वह अनिश्चितताओं और प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए "रूस में सभी नए लेनदेन को स्थगित रखेगा."
दुनिया में सबसे ज़्यादा नागरिक ड्रोन बनाने वाली चीनी कंपनी डीजेआई ने बीती 26 अप्रैल को एलान किया है कि वह रूस और यूक्रेन में अपनी सभी गतिविधियों को स्थगित करेगा.
डीजेआई ने इस क़दम के लिए अलग-अलग न्यायिक क्षेत्रों में काम करने के लिए पर्याप्त अनुमतियों की कमी को ज़िम्मेदार ठहराया है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक़, डीजेआई पर रूसी सेना की मदद करने का आरोप लगाया गया है और यूरोपीय रिटेलर मीडियामार्क्ट ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया है.
इससे पहले अमेरिका ने डीजेआई पर शिनजियांग प्रांत में मुसलमान अल्पसंख्यकों पर नज़र रखने के मामले में कथित संलिप्तता की वजह से प्रतिबंध लगाया था.
इसकी वजह से 2021 में डीजेआई का वैश्विक मार्केट शेयर 74 फीसद से घटकर 54 फीसद रह गया था.
नेटईज़ आईटी ब्लॉगर Amtbbs.org ने बीती 18 अप्रैल को मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि ख़्वाबे ने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए नए ऑर्डर रोक दिए हैं और रूस में अपने कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेज दिया है.
ख़्वाबे जासूसी से लेकर तमाम दूसरे आरोपों की वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करती रही है.

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यूनियनपे ने रूसी बैंकों को कार्ड जारी करना बंद किए
दुनिया में सबसे ज़्यादा कार्ड जारी करने वाली कंपनी चीनी पेमेंट सिस्टम यूनियनपे पिछले कुछ समय से रूस में अपना व्यापार बढ़ा रहा था. लेकिन बीच अप्रैल में यूनियनपे ने रूसी बैंकों को कार्ड जारी करना बंद कर दिया.
एक चीनी ब्लॉगर ने अज्ञात रूसी न्यूज़ रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, "नए प्रतिबंधों के जोख़िम की वजह से चीनी पेमेंट सिस्टम ने प्रमुख रूसी बैंकों के साथ सहयोग करने का जोख़िम नहीं उठाया है. यूनियनपे ने रूसी पक्ष को निजी स्तर पर सहयोग ख़त्म करने के फ़ैसले की सूचना दे दी है."
बीती 13 अप्रैल को रूस के सरकारी अख़बार स्पुतनिक के चीनी भाषा संस्करण में एक ख़बर छपी थी जिसमें बताया गया था कि रूस में अमेरिकी कार्ड कंपनियां वीज़ा एवं मास्टरकार्ड के ऑपरेशन बंद होने के बाद यूनियनपे कार्ड की मांग काफ़ी बढ़ गयी है.
इसमें बताया गया था कि लगभग 5 लाख यूनियनपे कार्ड जारी किए गए हैं जो कि पिछली मार्च की तुलना में 10 गुना ज़्यादा हैं.
चीनी सरकार से जुड़े न्यूज़ आउटलेट गुआंचा के टिप्पणीकार शिफांग शुओ ने स्पुतनिक की आलोचना करते हुए बताया है कि यूनियनपे ने कार्ड जारी करना बंद कर दिए हैं और यूनियनपे उन बैंकों के साथ अभी भी काम कर रहा है जिन पर प्रतिबंध नहीं लगे हैं.
उन्होंने कहा है कि "संबंधित पक्षों ने रूस पर लगे प्रतिबंधों का रास्ता निकालने के लिए एक ख़ास योजना बनाई है."

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पश्चिमी कंपनियों का जाना एक अवसर
चीनी अधिकारी और मीडिया पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों को चीनी कंपनियों के लिए एक अवसर की तरह भी देख रहे हैं.
रूस में चीनी राजदूत झांग हनहुई ने बीती 22 मार्च को स्थानीय व्यापारियों के साथ एक बैठक में चीनी व्यवसायों से आग्रह किया है कि वे "मौजूदा संकट में महत्वपूर्ण अवसर का लाभ उठाकर" रूसी बाजार में पैदा हुए खालीपन को भरें.
निजी स्वामित्व वाली मीडिया कंपनी नेटईज़ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार तोनग्यान तियानशिया ने एक अनाम रूसी विशेषज्ञ के हवाले से कहा है कि चीन युआन पर आधारित एकीकृत अंतरराष्ट्रीय निपटान एवं समाशोधन प्रणाली क्रॉस-बॉर्डर इंटर-बैंक पेमेंट्स सिस्टम (सिप्स) को विस्तार दे सकता है और रूस की सदस्यता उसे स्विफ़्ट के ख़िलाफ़ समान स्तर पर लड़ने का मौका दे सकती है.
हाल ही में पश्चिमी मीडिया में कुछ ख़बरें आयी थीं जिनमें बताया गया है कि चीन ने ऊर्जा क्षेत्र की अपनी तीन बड़ी कंपनियों चाइना नेशनल ऑफ़शोर ऑयल कॉरपोरेशन, चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और सिनोपेक को रूस के साथ अपने व्यावसायिक संबंधों की समीक्षा करने को कहा है.
लेकिन वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी ख़बरें देने वाले एक स्वतंत्र न्यूज़ आउटलेट Caus.com ने बीती 22 मार्च को समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से लिखा है कि इन तीनों कंपनियों ने रूस के सखालिन-1 प्राकृतिक गैस एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट में शेल की हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए संयुक्त रूप से बातचीत शुरू कर दी है.
इस मुद्दे को किंघई रेडियो एवं टेलीविज़न स्टेशन का अंतरराष्ट्रीय मामलों पर आधारित ब्लॉग सतर्कता के साथ आशाभरी नज़रों से देखता है क्योंकि ब्लॉग ने संभावित भारी मुनाफ़े के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार में चीन की हिस्सेदारी बढ़ने के अवसर का ज़िक्र किया है.
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मज़बूत बने रहेंगे चीन और रूस के रिश्ते
वहीं, दूसरी ओर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया है कि रूस ने साल 2021 के पहले चार महीनों के मुकाबले 2022 के शुरुआती चार महीनों में चीन को साठ फीसद ज़्यादा गैस निर्यात की है.
एससीएमपी के मुताबिक़, यूक्रेन युद्ध से ठीक पहले फरवरी में चीन और रूस ने पुतिन और शी जिनपिंग के बीच मुलाक़ात के दौरान 117.5 अरब अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी डील की है.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी कस्टम विभाग के आंकड़ों को साझा करते हुए कहा है कि साल 2022 की पहली तिमाही में चीन और रूस के बीच व्यापार 28.7 फीसद बढ़ा है. हालांकि, शुरुआती दो महीनों में व्यापार बढ़ने की दर 38.5 फीसद कम हुई है.
अख़बार ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि पश्चिमी देशों की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद शुरुआती स्तर पर जो सामंजस्य बिठाने की कोशिश की गयी, उसकी वजह से व्यापार बढ़ने की दर में कमी आई है और ये अस्थिरता कुछ समय में ख़त्म हो जाएगी.
चीन-रूस क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था शोध संस्थान के अध्यक्ष सोंग कुई ने ग्लोबल टाइम्स को बताया है कि "इस साल भी चीन और रूस का कारोबार मज़बूत रहेगा और एक ट्रिलियन युआन के आगे जाएगा."
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