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अल-अक़्सा मस्जिद: जॉर्डन के पीएम ने पत्थर फेंकने वालों को किया सलाम, इसराइल भड़का
यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद में फ़लस्तीनियों और इसराइली सुरक्षाबलों के बीच झड़प के बाद आख़िरकार हमास और इसराइल के बीच संघर्ष शुरू हो चुका है.
वहीं, दूसरी ओर इसराइल के पड़ोसी देश जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने इसराइल की अल-अक़्सा में नमाज़ियों पर की गई कार्रवाई को 'उकसाने' वाला बताया है और जॉर्डन के प्रधानमंत्री ने विवादित बयान दिया है.
अल-अक़्सा में पुलिस कार्रवाई के बाद इसराइल पर फ़लस्तीनियों ने रॉकेट दागा जिसके बाद इसराइली वायु सेना ने ग़ज़ा पट्टी पर हवाई हमले किए हैं. इसराइल का कहना है कि उसने हथियार बनाने वाली एक फ़ैक्ट्री पर हमला किया था. इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है.
ग़ज़ा पट्टी से दागे गए रॉकेट को इसराइल ने मार गिराया था. ग़ौरतलब है कि बीते साल भी रमज़ान के महीने में हमास और इसराइल के बीच भीषण संघर्ष हुआ था.
हाल में ही अल-अक़्सा मस्जिद में फ़लस्तीनियों के ऊपर की गई पुलिस की कार्रवाई में 170 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
अल-अक़्सा में कार्रवाई पर नाराज़ जॉर्डन
यरुशलम के अल-अक़्सा मस्जिद कंपाउंड में इसराइली सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद जॉर्डन ने इसराइली राजनयिक को तलब किया है और अपनी आपत्ति जताई है. दूसरी ओर जॉर्डन के सांसदों ने इसराइली राजदूत को देश से बाहर निकालने की मांग की है.
सांसदों के एक समूह ने सरकार को ज्ञापन सौंपा और राजदूत को देश से निकालने की मांग की.
इसके अलावा जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने इस मुद्दे को गंभीरता से अरब देशों के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के आगे उठाया है.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक़, किंग अब्दुल्ला ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश से कहा कि इसराइल की अल-अक़्सा की नीति फ़लस्तीनियों के साथ शांति बहाली करने के मौक़े को 'गंभीरतापूर्वक नज़रअंदाज़' करती है.
जॉर्डन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी पेट्रा ने बताया कि किंग अब्दुल्ला ने यरुशलम में इसराइल के 'सभी अवैध और भड़काऊ क़दम' रोकने के महत्व पर ज़ोर दिया जो कि अल-अक़्सा की ऐतिहासिक और क़ानूनी यथास्थिति का उल्लंघन करता है.
उन्होंने कहा, "फ़लस्तीनी प्राधिकरण में इसराइल के एकतरफ़ा क़दम दो-राष्ट्रों के समाधान और व्यापक शांति की संभावना के साथ समझौता कर सकते हैं."
जॉर्डन के पीएम का विवादित बयान
किंग अब्दुल्ला के बयान से इतर जॉर्डन के प्रधानमंत्री बिशेर अल-ख़सवनेह ने बड़ा विवादित बयान दिया है जिसके बाद इसराइल के प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट को भी बयान देना पड़ा है.
जॉर्डन के प्रधानमंत्री ने सोमवार को देश की संसद में यरुशलम में झड़प के दौरान इसराइली सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने वाले फ़लस्तीनियों का समर्थन किया.
पेट्रा समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रधानमंत्री बिशेर ने कहा, "मैं हर फ़लस्तीनी को सलाम करता हूं जो मज़बूती से खड़े रहे और जिन्होंने अपने पत्थर उन यहूदियों पर फेंके जिन्होंने इसराइल की क़ब्ज़े वाली सरकार की सुरक्षा में अल-अक़्सा मस्जिद को नापाक किया."
बिशेर के बयान के बाद इसराइल के प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट ने वीडियो संदेश जारी किया और जॉर्डन के प्रधानमंत्री के बयान की निंदा की.
बेनेट ने कहा, "मैं उन बयानों को गंभीरता के साथ देखता हूं जो इसराइल को उस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हैं जिसका हम शिकार हो रहे हैं. कुछ पत्थरबाज़ी को बढ़ावा दे रहे हैं."
उन्होंने कहा, "वो भड़काने वालों को एक तरह का पुरस्कार दे रहे हैं और उनमें भी हमास को जो कि यरुशलम में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है. हम यह होने नहीं देंगे."
इन अलग-अलग बयानों के सामने आने के बाद इसराइल और जॉर्डन के बीच तनाव गहरा गया है. जॉर्डन अल-अक़्सा मस्जिद का संरक्षक है और उसकी बहुसंख्यक आबादी फ़लस्तीनी है.
हारेत्ज़ वेबसाइट के मुताबिक़, इसराइली विदेश मंत्री ने बयान जारी किया है जिसमें उसके राजनयिक के बुलाने पर आपत्ति जताई गई है.
बयान में कहा गया है कि जॉर्डन 'यरुशलम में शांति बहाली की कोशिशों की अनदेखी कर रहा है और त्योहार की छुट्टियों की पवित्रता का उल्लंघन करने वालों को प्रोत्साहन दे रहा है.'
साथ ही इस बयान में जॉर्डन के प्रधानमंत्री की विवादित टिप्पणी की आलोचना की गई है. इसमें कहा गया है कि बिशेर परिस्थिति को 'भड़का' रहे हैं और 'फ़ेक न्यूज़ फैला रहे हैं.'
अल-अक़्सा मस्जिद में क्या हुआ
अल-अक़्सा मस्जिद कंपाउंड जो कि यहूदियों के लिए भी काफ़ी पवित्र माना जाता है, उसमें शुक्रवार को झड़पें शुरू हुई थीं.
ये झड़पें मुसलमानों के रमज़ान महीने और यहूदियों के पासोवर त्योहार की छुट्टियों के दिन हुआ.
700 यहूदी इसराइली पुलिस की सुरक्षा में विवादित पवित्र जगह पर गए थे जिसके एक दिन बाद दंगा पुलिस ने जबरन फ़लस्तीनियों को मस्जिद के हिस्से से हटाया था.
हारेत्ज़ डेली वेबसाइट ने 18 अप्रैल को बताया था कि एक सप्ताह लंबे यहूदी त्योहार के दौरान पहली बार यहूदियों का समूह उस जगह गया था.
यरुशलम क्यों है दुनिया का सबसे विवादित स्थल?
यरुशलम इसराइल-अरब तनाव में सबसे विवादित मुद्दा भी है. ये शहर इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों में बेहद अहम स्थान रखता है.
पैग़ंबर इब्राहीम को अपने इतिहास से जोड़ने वाले ये तीनों ही धर्म यरुशलम को अपना पवित्र स्थान मानते हैं.
यही वजह है कि सदियों से मुसलमानों, यहूदियों और ईसाइयों के दिल में इस शहर का नाम बसता रहा है. हिब्रू भाषा में येरूशलायीम और अरबी में अल-क़ुद्स के नाम से जाना जाने वाला ये शहर दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है.
शहर के केंद्र में एक प्राचीन शहर है जिसे ओल्ड सिटी कहा जाता है. संकरी गलियों और ऐतिहासिक वास्तुकला की भूलभुलैया वाले इसके चार इलाक़े- ईसाई, इस्लामी, यहूदी और आर्मिनियाई- को परिभाषित करते हैं.
इसके चारों ओर एक किलेनुमा सुरक्षा दीवार है जिसके आसपास दुनिया के सबसे पवित्र स्थान स्थित हैं. हर इलाक़े की अपनी आबादी है.
कॉपी - मोहम्मद शाहिद
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