UAE ने इसराइल के बहिष्कार का 48 साल पुराना क़ानून किया ख़त्म

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद ने शनिवार को 1972 के 'इसराइल बहिष्कार क़ानून' को समाप्त करने का एक फ़रमान जारी किया जिसके तहत इसराइल के साथ यूएई के किसी भी वित्तीय और वाणिज्यिक संबंध पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, शेख ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद ने अपने फ़रमान में लिखा है कि 'इसराइल का बहिष्कार करने के लिए वर्ष 1972 में बना संघीय क़ानून नंबर-15 समाप्त किया जाता है.'

ये फ़रमान क्यों मायने रखता है: दरअसल, यह घोषणा अमरीका और इसराइल सरकार के प्रतिनिधिमंडल के अबू धाबी पहुँचने से 48 घंटे पहले की गई है. यहाँ अमरीका, संयुक्त अरब अमीरात और इसराइल के बीच एक सौदा कराने की कोशिश में है जिसके ज़रिये दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य किया जा सके.

अमरीका और इसराइल सरकार का प्रतिनिधिमंडल इसराइली विमान सेवा की उड़ान संख्या एआई-971 से अबू धाबी पहुँचने वाला है. बताया गया है कि इसराइल की राजधानी तेल अवीव से संयुक्त अरब अमीरात की यह पहली फ़्लाइट होगी.

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'औपचारिक और प्रतीकात्मक महत्व'

शेख ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद के ताज़ा फ़रमान के अनुसार, "यूएई में रहने वाला कोई व्यक्ति और वहाँ की कोई कंपनी अब इसराइल में रहने वाले किसी व्यक्ति या स्थानीय व्यापारी और निकाय के साथ वाणिज्यिक और वित्तीय समझौते कर सकते हैं."

शेख ने यह भी कहा है कि यूएई में अब हर प्रकार के इसराइली सामान और उत्पादों को लाने और बेचने की अनुमति होगी.

विश्लेषकों की नज़र में शेख के इस ताज़ा फ़रमान का एक 'औपचारिक और प्रतीकात्मक महत्व' है, मगर बीते दो दशकों से भी अधिक समय से इसराइल और यूएई के बीच अनौपचारिक व्यापार और व्यापारिक संबंध बढ़ रहे थे.

इसराइली अधिकारियों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में कम से कम 500 इसराइली कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात में व्यापारिक सौदे किए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता

इसराइल और यूएई ने 13 अगस्त को बताया था कि दोनों देश अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में एक समझौता करने जा रहे हैं जिसके ज़रिए दोनों देशों के बीच राजनयिक और व्यापारिक ताल्लुक़ात बेहतर करने की कोशिश की जाएगी.

कहा जा रहा है कि इसराइल और यूएई के बीच इस समझौते से मध्य-पूर्व की राजनीति का पूरा क्रम बदलने वाला है.

इसराइल के विदेश मंत्री गबी अश्केनाज़ी ने कहा है कि "यूएई ने शांति की दिशा में एक बड़ा क़दम उठाया है जो क्षेत्र में स्थिरता लाने का काम करेगा. इससे दोनों देशों के लिए पर्याप्त आर्थिक और व्यावसायिक मौक़े पैदा होंगे."

माना जा रहा है कि दोनों देश आधिकारिक तौर पर कई समझौतों को अमली जामा पहना सकते हैं.

इसराइल के चैनल 13 टीवी ने कहा है कि 'द्विपक्षीय व्यापार शुरू में प्रति वर्ष चार अरब अमरीकी डॉलर का हो सकता है, लेकिन जल्द ही यह आँकड़ा तीन से चार गुना हो सकता है.' हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने ऐसे किसी आँकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

'उनका पैसा, हमारा तजुर्बा'

इसराइल के कृषि मंत्री एलन शूस्टर ने कहा कि "इसराइल उन संभावित संयुक्त-परियोजनाओं पर काम कर रहा है जो 'तेल के मामले में समृद्ध' संयुक्त अरब अमीरात की खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाए. जैसे इसराइल यूएई की मदद करेगा कि वो कैसे रेगिस्तान में खेती करे और खारे पानी को पीने लायक बनाए."

एलन शूस्टर ने हाल ही में एक इसराइली एफ़एम चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि "उनके पैसे और हमारे तजुर्बे के साथ, दोनों देश एक अच्छा लंबा सफ़र तय कर सकते हैं."

दोनों देशों के अधिकारी कह चुके हैं कि वो रक्षा, चिकित्सा, पर्यटन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम करने वाले हैं.

दोनों देशों के बीच अभी तक आधिकारिक हवाई संपर्क नहीं रहा. इस वजह से फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं कि जब सोमवार को इसराइली विमान तेल अवीव से उड़ान भरेगा, तो क्या वो सऊदी अरब के ऊपर से होते हुए संयुक्त अरब अमीरात पहुँचेगा - क्योंकि सऊदी अरब के इसराइल से कोई आधिकारिक संबंध नहीं हैं.

मई में, एतिहाद एयरवेज़ का एक मालवाहक विमान संयुक्त अरब अमीरात से तेल अवीव (इसराइल) गया था, जिसमें फ़लस्तीनियों के लिए कोरोना महामारी से लड़ने की सामग्री थी, और इसे यूएई से इसराइल के लिए पहली आधिकारिक फ़्लाइट कहा गया था.

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