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UAE से दोस्ती के बाद इसराइल ने सऊदी अरब पर बोला
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ फ़लस्तीन क्षेत्र से जुड़ा समझौता होने के बाद यूएई के न्यूज़ चैनल स्काई न्यूज़ अरबिया को एक ख़ास इंटरव्यू दिया है.
इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने उन कारणों की चर्चा की है जिसकी वजह से ये समझौता संभव हो सका. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस समझौते से इसराइली अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा.
अमरीका की माँग पर समझौता
बीते दिनों इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक ख़ास समझौता हुआ है जिसके तहत इसराइल ने वेस्ट बैंक के कुछ हिस्से को अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया को फ़ौरी तौर पर रोक दिया है.
अबु-धाबी स्थित न्यूज़ चैनल स्काई न्यूज़ अरबिया को दिए अपने इंटरव्यू में इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भरोसा जताया है कि अन्य अरब देश भी इस समझौते की दिशा में क़दम बढ़ाएंगे.
नेतन्याहू ने कहा है कि ट्रंप सरकार ने उन्हें बताया है कि इस समय की सबसे बड़ी ज़रूरत शांति का विस्तार करना है और फ़िलहाल वेस्ट बैंक को लेकर जारी काम रोकने को कहा है.
वे कहते हैं, “ये एक अमरीकी अनुरोध था कि कुछ समय के लिए इसराइली क़ानून को लागू करना बंद कर दिया जाए और हम सहमत हो गए. अमरीकियों ने हमें बताया है कि वे शांति के माहौल का विस्तार करना चाहते हैं और इस समय ये हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि शांति को आगे बढ़ाया जाए.”
नेतन्याहु ने इस पूरे इंटरव्यू के दौरान अंग्रेजी में बात की लेकिन उनकी बातचीत को अरबी में डब करके पेश किया गया है.
अमरीका से भी आई टिप्पणी
अमरीकी राष्ट्रपति के सलाहकार और दामाद जेरेड कशनर ने सोमवार को प्रेस से बात करते हुए कहा है कि अमरीका कुछ समय के लिए वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने की नीति को लेकर इसराइल का समर्थन नहीं करेगा.
वो कहते हैं, “इसराइल हमारे साथ इस बात पर राज़ी हुआ है कि वे हमारी सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ेंगे. कुछ समय के लिए हम इस पर अपना राज़ीनामा देने की योजना नहीं बना रहे हैं. क्योंकि इस समय हमारा ध्यान नए शांति समझौते को लागू करवाने पर है.”
वहीं, नेतान्याहु ने संयुक्त अरब अमीरात की तारीफ़ करते हुए भरोसा जताया है कि अन्य अरब देश भी इस दिशा में कदम उठाते हुए इसराइल के साथ समझौता करेंगे.
अर्थव्यवस्थाओं को भारी फ़ायदा
नेतान्याहु कहते हैं कि इस समझौते से दोनों देशों को बहुत फायदा होगा और इसराइल संयुक्त अरब अमीरात के फ्री ज़ोन इलाकों से आयात करने की योजना भी बना रहा है.
यूएई में फ्री ज़ोन वे इलाके हैं जहां विदेशी कंपनियां आसान नियमों के साथ काम कर सकती हैं और जहां विदेशी निवेशकों को कंपनियों में पूर्ण मालिकाना हक़ लेने की इजाज़त है.
इस समझौते को मध्य पूर्व में शांति के लिए अहम बताते हुए नेतान्याहु ने संभावना जताई है कि ये समझौता आख़िरकार फलस्तीन क्षेत्र के लोगों के साथ भी शांति की ज़मीन तैयार करेगा.
दुबई और तेल-अवीव के बीच सीधी उड़ान
इससे पहले नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इसराइल यूएई और तेल अवीव के बीच सीधी हवाई उड़ान शुरू करने की दिशा में भी काम कर रहा है जो कि सऊदी अरब के ऊपर से उड़कर जाएगी.
परिवहन मंत्री मिरि रेगेव के साथ बेन गुरुअन एयरपोर्ट पहुंचकर नेतान्याहू ने इस समझौते से होने वाले संभावित लाभों को लेकर भी चर्चा की.
उन्होंने कहा, “हम सऊदी अरब के आसमान से होते हुए तेल अवीव और दुबई के बीच फ़्लाइट शुरू करने पर काम कर रहे हैं.”
और कहा कि उन्हें भरोसा था कि ये समझौता हो जाएगा.
वे कहते हैं, “ये इसराइली उड्डयन उद्योग और इसराइली अर्थव्यवस्था को बदलकर रख देगा क्योंकि दोनों पक्षों को पर्यटन और भारी निवेश मिलेगा.”
संयुक्त अरब अमीरात को बताया लोकतंत्र
नेतन्याहू ने यूएई को एक लोकतंत्र की संज्ञा भी दे डाली जबकि फ्रीडम हाउस के मुताबिक़, संयुक्त अरब अमीरात दुनिया के सबसे कम स्वतंत्र मुल्कों में से एक है.
नेतन्याहू ने कहा, “ये समझौता यूएई और इसराइल को एक साथ लेकर आएगा. दोनों ही देश लोकतंत्र हैं और काफ़ी विकसित हैं.”
इसराइल के सऊदी अरब के साथ औपचारिक रिश्ते नहीं हैं और इसराइली विमानों को सऊदी अरब के आसमान में उड़ने की इजाज़त नहीं है.
हालांकि, कुछ मामलों, विशेषत: सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग की ख़बरें आती रहती हैं.
नेतन्याहू ने कहा, “यूएई इसराइल के तकनीक क्षेत्र में भारी निवेश करना चाहता है.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यूएई की फ्री ज़ोन में बनने वाला सस्ता सामान भी इसराइली उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा.
उन्होंने कहा, “इसराइली अर्थव्यवस्था को इससे जो बढ़त मिलेगी, उससे हर नागरिक को फ़ायदा होगा”
ओमान ने दिए संकेत
इसके साथ ही सोमवार को ओमानी विदेश मंत्री यूसुफ़ बिन अलावी की अपने इसराइली समकक्ष गाबी एश्केनाज़ी से फ़ोन पर बात हुई है.
ये पहला मौक़ा है जब दोनों राजनयिकों के बीच इस तरह की बातचीत हुई हो.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, संयुक्त अरब अमीरात के बाद इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के क़रार करने वाले पहले कुछ देशों में ओमान भी शामिल हो सकता है.
ओमान ने शुक्रवार को कहा था कि उसने इसराइल और पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीराता के बीच रिश्ते सामान्य करने के लिए किए गए समझौता का समर्थन किया है और आशा जताई कि ये क़दम इसराइल और फलस्तीन क्षेत्र के बीच दीर्घकालिक शांति स्थापित करने में मदद करेगा.
इसराइली राष्ट्रपति रिवलिन ने इस समझौते के बाद संयुक्त अरब अमीरात के नेता को इसराइल आने का न्योता दिया है.
संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायेद नाह्यान को भेजा गया रिवलिन का आमंत्रण पत्र अरबी भाषा में लिखा गया था.
इस आमंत्रण पत्र में लिखा था कि “इसराइल और यरूशलम” की यात्रा करें और माननीय मेहमान बनें.
जहां एक ओर इसराइल पूरे यरूशलम को अपनी राजधानी मानता है. वहीं, अरब देश पूर्वी यरूशलम को फ़लस्तीन क्षेत्र की भविष्य की राजधानी के रूप में देखते हैं.
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