इमरान ख़ान ने संसद को क्यों किया भंग? जानिए क्या कह रहे हैं पाकिस्तानी

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति डॉ आरिफ़ अल्वी ने नेशनल असेंबली को भंग कर दिया है. रविवार को इमरान ख़ान ने हैरान करने वाला क़दम उठाते हुए राष्ट्रपति को संसद भंग करने की सलाह दी थी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ आरिफ़ अल्वी ने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के नेशनल असेंबली भंग करने की सलाह को मंज़ूरी दे दी है. ऐसा पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 58 (1) और 48 (1) के तहत किया गया है."
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आज यानी तीन अप्रैल रविवार को इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होने वाली थी. लेकिन पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष क़ासिम सुरी ने इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग को नकार दिया.
उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया. इमरान ख़ान के पास सरकार बचाने के लिए बहुमत नहीं था. उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के भी कई सांसद विपक्षी खेमे में चले गए थे.
342 सीटों वाली नेशनल असेंबली में इमरान ख़ान के 155 सांसद थे. लेकिन कहा जा रहा है कि इरमरान ख़ान के पास अभी 155 सांसद भी नहीं थे. सहयोगी पार्टियों ने पहले ही साथ छोड़ दिया था. संख्या बल में विपक्ष आगे था और अगर अविश्वास मत पर वोटिंग होती तो इमरान ख़ान को हारने का डर था.
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इमरान ख़ान अब संसद भंग करवाकर फिर से चुनाव में जाने की तैयारी कर रहे हैं. पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ 90 दिनों के भीतर पाकिस्तान में नया चुनाव होगा. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज किया तो इमरान ख़ान ने इसका खुलकर स्वागत किया.
उन्होंने बहुत ही संक्षेप में देश को संबोधित करते हुए कहा, "स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव को नकार दिया है, उसके लिए मैं सारी कौम को मुबारकबाद देता हूँ. पाकिस्तान में सरकार बदलने का एक बाहरी एजेंडा था. लोग परेशान थे कि यह ग़द्दारी हो रही है. इस तरह की साज़िश कौम कामयाब नहीं होने देगी. स्पीकर ने संवैधानिक हक़ का इस्तेमाल करते हुए जो फ़ैसला किया है, वह स्वागत योग्य है. मैंने राष्ट्रपति को असेंबलियां भंग करने की सलाह दी है. हम अवाम के बीच जाएंगे और वही फ़ैसला सर्वमान्य होगा."
इमरान ख़ान ने कहा, "कौम चुनाव की तैयारी करें. आगे चुनाव की जो भी प्रक्रिया है, वह अब शुरू हो जाएगी. पाकिस्तान ने आज एक साज़िश को नाकाम कर दिया है."
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पाकिस्तान के कई लोग इमरान ख़ान के इस फ़ैसले को संविधान का उल्लंघन बता रहे हैं. पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट कर कहा, "नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष क़ासिम सुरी ने संविधान के अनुच्छेद पाँच के तहत अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है. इसके बाद इमरान ख़ान ने नेशनल असेंबली भंग करने की घोषणा की. ये सभी फ़ैसले संविधान के उल्लंघन हैं. पीटीआई ने पाकिस्तान को संवैधानिक संकट में धकेल दिया है. यह पाकिस्तान के संविधान के साथ ग़द्दारी है."
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर इमरान ख़ान कहते थे कि वह इस्तीफ़ा नहीं देंगे बल्कि आख़िरी गेंद तक संघर्ष करेंगे. ज़ाहिर है कि इमरान ख़ान राजनीति में आने से पहले एक जाने-माने क्रिकेटर थे और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे थे. हामिद मीर ने इमरान ख़ान के आख़िरी गेंद तक लड़ने वाली टिप्पणी पर तंज़ करते हुए लिखा है, "आख़िरी गेंद तक लड़ने के बजाय इमरान ख़ान विकेट लेकर फील्ड से भाग गए."
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हामिद मीर ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, "पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष अहसान भून ने बिल्कुल ठीक कहा है कि स्पीकर और प्रधानमंत्री ने संविधान का उल्लंघन किया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को सामने आना चाहिए और संकट से पाकिस्तान को निकालना चाहिए. हम मार्शल लॉ नहीं बल्कि लोकतंत्र चाहते हैं."
भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने ट्वीट कर कहा है, "स्थित ठीक नहीं है. हालाँकि चुनाव शायद सही रास्ता है. सभी राजनीतिक पार्टियां इसकी मांग कर रही थीं."
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वहीं जियो न्यूज़ के पत्रकार मुर्तज़ा अली शाह ने एक वीडियो क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा है, "पाकिस्तान के डेप्युटी अटॉर्नी जनरल राजा ख़ालिद ने इस्तीफ़ा देते हुए कहा है, ''इमरान ख़ान सरकार ने पाकिस्तान के संविधान के साथ छेड़छाड़ की है. इमरान ख़ान ने संविधान के साथ जो किया, वैसा किसी तानाशाह ने भी नहीं किया था. जो कुछ भी हुआ, वह अवैध और असंवैधानिक है."
मुर्तज़ा ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, "नेशनल असेंबली भंग किए जाने के बाद पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपने आवास पर बुलाया है."
जिन्ना पर किताब लिखने वाले लेखक यासीर लतीफ़ हमदानी ने ट्वीट कर कहा है, "यह संविधान के ख़िलाफ़ तख़्तापलट से कम नहीं है. मुशर्रफ़ के उलट इमरान ख़ान सिविलियन हैं. मुझे उनके भविष्य को लेकर डर है."
पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने लिखा है, "पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है. इमरान ख़ान ने एक कार्यकारी अथॉरिटी को भंग कर पूरी व्यवस्था को लकवाग्रस्त कर दिया है. केंद्र में अब कोई चीफ़ एग्जेक्युटिव नहीं है और है भी तो पूरी तरह से विवादित है. कोई कैबिनेट नहीं है और न ही पंजाब में कोई मुख्यमंत्री है. एक व्यक्ति ने पूर देश को हाईजैक कर लिया है."
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पाकिस्तान में नया दौर मीडिया के कार्यकारी संपादक मुर्तज़ा सोलांगी ने लिखा है, "विपक्ष संख्या बल के आधार पर इमरान ख़ान को सत्ता से बेदख़ल करने वाला था. इमरान ख़ान के बाग़ी सासंदों की भी ज़रूरत नहीं पड़ती. लेकिन पाकिस्तानी ट्रंप ने अपना नादान ट्रंप कार्ड छोड़ दिया. ख़ुदा बचाए! इमरान ख़ान ने देश से ग़द्दारी की है. यह व्यक्ति असली ग़द्दार है."
हालांकि ऐसा नहीं है कि हर कोई इमरान ख़ान के फ़ैसले का विरोध ही कर रहा है. इमरान ख़ान के फ़ैसले का लोग समर्थन भी कर रहे हैं. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और कप्तान वक़ार यूनुस ने लिखा है, "कप्तान हमेशा आप पर गर्व रहा है. क्या मास्टरस्ट्रोक चला है."
इसके अलावा इमरान ख़ान की पार्टी के नेता भी इस फ़ैसले का समर्थन कर रहे हैं.
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पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ ने ट्वीट कर कहा है, "किसी को भी पाकिस्तान के संविधान के साथ छेड़छाड़ की अनुमित नहीं मिलनी चाहिए. अगर इस आत्ममुग्ध व्यक्ति को सज़ा नहीं मिली तो क़ानून का राज नहीं रहेगा."
कॉपी -रजनीश कुमार
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