यूक्रेन संकटः रूस का बाज़ार हमले के बाद लुढ़का, रूबल हुआ कमज़ोर

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गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर रूस ने दक्षिण के अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर बड़े स्तर पर सैन्य हमला शुरू कर दिया है. इसके बाद रूसी शेयर और मुद्रा बाज़ार काफ़ी दबाव में आ गया. हालात यहां तक पहुंच गए कि रूस के केंद्रीय बैंक को, देश की मुद्रा रूबल की ऐतिहासिक गिरावट थामने के लिए आगे आना पड़ा.
मॉस्को में एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों को ये यक़ीन नहीं हो रहा है कि उनका देश यूक्रेन पर हमला कर रहा है. मॉस्को में बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी क़तारें देखी जा सकती हैं. युद्ध के परिणामों से घबराए लोग बैंकों से अपना पैसे निकाल रहे हैं.
रूस के वित्तीय बाज़ार में इस घटनाक्रम के कारण उथल पुथल मची हुई है. अमेरिकी डॉलर और यूरो के मुक़ाबले रूस की करेंसी रूबल दस फ़ीसदी तक गिर गई है. ये इस वक्त अपने सबसे निचले स्तर पर है. मॉस्को एक्सचेंज में रूस की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर आज सुबह बाज़ार खुलने के साथ ही धड़ाम से नीचे गिरे हैं.
सुबह नौ बजे एक यूरो की क़ीमत सौ रूबल से पार हो गई थी. डॉलर भी 90 के ऊपर चला गया था.
अमेरिका पहले ही ये कह चुका है कि युद्ध की सूरत में वो रूस के बैंकों को डॉलर की सप्लाई रोक देगा. इस डर से रूबल शायद और कमज़ोर हो गया.
शेयर बाज़ार इतनी तेज़ी से नीचे की बढ़ा कि दो घंटे के लिए कारोबार रोकना पड़ा. लेकिन बाज़ार दोबारा खुलते ही हज़ार अंक फिर लुढ़का.
दुनिया भर के बाज़ार रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े संघर्ष के कारण घबराए नज़र आ रहे हैं. लेकिन गिरते रूबल को संभालने के लिए रूसी सेंट्रल बैंक भी आगे आया है.
रूबल को बचाने आया सेंट्रल बैंक
रशियन सेंट्रल बैंक ने एक बयान में कहा, "वित्तीय बाज़ार में स्थिरता लाने के लिए बैंक ऑफ़ रशिया ने विदेशी मुद्रा एक्सचेंज मार्केट में हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है. बैंकिंग सेक्टर में अतिरिक्त लिक्विडिटी का प्रावधान किया जा रहा है."
बैंक ने अपने बयान में ये भी कहा है कि वे मौजूद सियासी हालात को देखते हुए किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है.

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उधर सेंट्रल बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज और मुद्रा बाज़ार में ब्रोकरों के शॉर्ट सेल्स पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. इस रोक का मकसद रूबल पर सट्टेबाज़ी के दबाव को कम करते हुए, उसकी गिरावट को रोकना है.
बाक़ी रूसी बैंकों ने फ़िलहाल किसी दिक्कत के बारे में संकेत नहीं दिए हैं. स्बेरबैंक ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए वे अपने ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है.
मेटाली इनवेस्ट बैंक में विदेशी मुद्रा एक्सचेंज के प्रमुख सर्गेई रोमानचुक का मानना है कि डोनबास के हालात वित्तीय बाज़ार के लिए बिल्कुल हैरान करने वाले हैं. इसका किसी को अंदाज़ा नहीं था.
उन्होंने कहा, "बहुत कम लोगों का मानना था कि रूस वाक़ई हमला कर देगा. विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों के दावे के बावजूद ( जो अब सही साबित हुआ है.) यहां इसे मानने के लिए लोग तैयार नहीं थे. ये वित्तीय बाज़ार के लिए बड़ी घटना है. इस बाज़ार की क्षमता अब पहले जैसी नहीं रहेगी. रूस के लोगों को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि अब हम वित्तीय बाज़ार की नज़र कई साल पीछे चले जाएंगे."

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पर्याप्त रिज़र्व लेकिन....
रेनेसां कैपिटल की चीफ़ इकोनॉमिस्ट सोफ़या डोनेट्स कहती हैं, "मुझे तो ये समझ नहीं आया कि आज स्टॉक एक्सचेंज खोला ही क्यों? शायद ये हालात के काबू में रखने के आत्मविश्वास के कारण हुआ है. या इसके विपरीत ये एक रणनीति भी हो सकती है."
रूबल पर बढ़ते दवाब के बारे में विश्लेषकों की अलग-अलग राय है. कुछ को यक़ीन है कि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण रूबल की क़ीमत को 85-90 (प्रति अमेरिकी डॉलर) के बीच रखा जा सकता है.
डोनेट्स कहती हैं, "ये रिज़र्व मुसीबत भरे दिनों के लिए रखे थे. और अब ये दिन आ गए हैं. अगर इस समय हम इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं तो ये अजीब बात होगी. अब रिस्क बहुत अधिक हो गया है. यूक्रेन पर रूस का हमला उम्मीद से कहीं अधिक आक्रामक है."
रूसी बाज़ार में अफ़रातफ़री आज सुबह से शुरू हो गई थी. पुतिन ने सुबह सुबह देश को संबोधित किया जिसके बाद रूसी सेना ने यूक्रेन में सैन्य अभियान छेड़ दिया.
इस ख़बर के आते ही रूसी बाज़ार में हंगामा मच गया. तेल में उछाल आया और वो प्रति बैरल 100 डॉलर से ऊपर चला गया. स्टॉक एक्सचेंज की खुलते ही यूरोप में गैस की कीमत 1400 अमेरिकी डॉलर प्रति हज़ा क्यूबिक मीटर्स से ऊपर चली गई.

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