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सिंगापुर के जंगल में 30 साल से क्यूं रह रहा है एक शख़्स?
- Author, पीटर हॉस्किन्स
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, सिंगापुर
सिंगापुर का नाम सुनते ही ज़हन में आलीशान-आसमान छूती इमारतें आती हैं. मगर इन गगनचुंबी इमारतों के बीच एक शख्स ऐसे भी हैं, जो शहर की हर सुविधा को छोड़कर घने जंगल को अपना घर बना चुके हैं.
ओ गो सेंग से मिलते ही जो पहली चीज़ आपको पसंद आएगी वो हैं उनकी आंखों की चमक. सेंग की उम्र भले ही 79 साल है लेकिन दिखने में वो अपने से आधी उम्र वालों को टक्कर देते हैं.
इस महीने की शुरुआत में, ओ गो सेंग के जंगल में रहने की ख़बर सिंगापुर में वायरल हुई. बहुत से लोग ये जानकर हैरानी जता रहे थे. कुछ लोगों ने सवाल किया कि उन्हें कोई मदद क्यों नहीं दी गई और कुछ ये हैरानी जता रहे थे कि कैसे सेंग पर बीते 30 सालों से किसी का ध्यान ही नहीं गया.
क्रिसमस के बाद वायरल हुई सेंग की कहानी
इस सबकी शुरुआत हुई क्रिसमस पर, जब सेंग को कुछ अधिकारियों ने रोका. उस समय पाया गया कि सेंग बिना लाइसेंस के ही सामान बेच रहे हैं. महामारी की वजह से बाज़ारों में फूल बेचने का काम बंद होने की वजह से सेंग खुद की उगाई पत्तेदार सब्ज़ियां और मिर्ची बेच रहे थे.
सेंग का मानना है कि एक ग्राहक ने करीब एक सिंगापुरी डॉलर के सामान को लेकर हुई बहस के बाद उनकी शिकायत की होगी. सेंग और पुलिस अधिकारियों की बहस के दौरान एक चैरिटी वर्कर वहां से गुज़र रही थी. उसने देखा कि अधिकारी सेंग की सब्ज़ियां ज़ब्त किए हुए थे.
विवियन पैन कहती हैं कि उन्हें सेंग की ओर से ग़ुस्सा आया. वो कहती हैं, "मैं नहीं चाहती थी कि सेंग उस दिन ख़ाली हाथ घर लौटें. लेकिन मैं जानती हूं कि कानूनन, वो सड़क पर कुछ बेच नहीं सकते."
विवियन ने इस पूरे वाकये का वीडियो बनाया और उसे फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया, जहां से ये तुरंत ही वायरल हुआ. इसके बाद सेंग की समस्या के बारे में स्थानीय सांसद को अवगत कराया गया. लेकिन तब सांसद लियांग एंग वा को पता लगा कि सेंग की कहानी इससे कहीं बड़ी है.
जंगल में जीवन
सेंग, सनगेई तेंगाह नाम के गांव में अपने परिवार के साथ पले-बढ़े. हालांकि, 1980 के दशक में ऊंची इमारतों के लिए इस गांव को उजाड़ दिया गया. अधिकांश गांववासियों को सरकार की ओर से नए घर मिले, लेकिन सेंग ये घर पाने में विफल हो गए.
हालांकि, सेंग के भाई को सरकारी फ़्लैट मिल गया था और उन्हें वहां रहने का न्योता भी मिला, लेकिन सेंग ने ऐसा नहीं किया क्योंकि वो परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते थे. इसलिए, सेंग वापस अपने पुराने घर के पास एक जंगल में चले गए. यहां उन्होंने लकड़ी, बांस और तिरपाल से बने एक अस्थायी घर में रातें बितानी शुरू कर दीं.
इस अस्थायी घर की तरफ़ बढ़ते समय आपनो दरवाज़े के पास राख़ दिखेगी, जो सेंग के ख़ाना बनाने के बाद जमा होती है. बीच में सेंग का कुछ सामान रखा है और पिछले हिस्से में सेंग सोते हैं. सेंग के टेंट के पास एक बगीचा है, जहां वे सब्ज़ियां उगाते हैं. पेड़ों और बाड़ के बीच कपड़े बंधे हैं, जिससे सब्ज़ियों की सुरक्षा होती है.
उनके टेंट के ऊपर विशाल कटहल का पेड़ पर्याप्त छाया देता है, जो उन्हें सिंगापुर की प्रचंड गर्मी और उमस के बीच भी राहत देता है.
सेंग कहते हैं कि अकेलापन उनके लिए कभी कोई समस्या नहीं रही. वो अपने बगीचे की देख़बाल में ही खु़द को व्यस्त रखते हैं. उन्होंने बताया कि जंगल में उपजाऊ भूमि ने उनके इस अकेलेपन को आसान बनाया.
सेंग का कहना है कि जंगल में रहने का सबसे बुरा पहलू यहां के चूहे हैं. ये चूहे किसी न किसी तरह से उनके तंबू में घुसकर कपड़े काट देते हैं. सेंग ने मौका मिलने पर छोटी-मोटी नौकरियां भी की.
सिंगापोर में बेघर?
कभी-कभी सेंग अपने जमा किए पैसों से नाव के ज़रिए इंडोनेशिया के एक छोटे से द्वीप बाटम जाया करते थे. यहीं उनकी मुलाक़ात मैडम तसिच से हुई. दोनों की एक बेटी भी है.
हर सप्ताह बाटम जाने के बावजूद सेंग हमेशा सिंगापुर में अपने जंगल के टेंट में वापस रहने को आते. सेंग के परिवार वालों की तरह ही उनकी पत्नी और बेटी, जो अब 17 साल की हो चुकी हैं, को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि सेंग किन हालात में रह रहे हैं.
उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि जब कोई सेंग से पूछता था कि वो कहां रहते हैं, तो वो जवाब देते "बगीचे में".
कोरोना महामारी की वजह से सेंग की बाटम की यात्राएं बंद हो गईं, क्योंकि सिंगापुर ने बड़े पैमाने पर अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था और सिर्फ़ उन्हें ही यात्रा की इजाज़त थी जो कोरोना जांच और क्वॉरंटीन में रहने के लिए पैसे चुकाएं.
हालांकि, सेंग ने अभी तक अपने परिवार को आर्थिक मदद भेजना जारी रखा है. वो हर महीने अपने परिवार को 500-600 सिंगापुरी डॉलर भेजते हैं.
सिंगापुर में बेघर होना बहुत ही दुर्लभ है. दुनिया की जिन जगहों पर सबसे ज़्यादा अमीर रहते हैं, उनमें से एक सिंगापुर भी है. विश्व बैंक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शहर का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) प्रति व्यक्ति लगभग 60,000 डॉलर है.
"इस साल पहली बार देखा टीवी"
स्थानीय सांसद की टीम की सहायता से इसी साल फ़रवरी में सेंग को नया घर मिला है. सांसद का कहना है कि उनकी टीम आगे भी सेंग की मदद करना जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि सेंग को इंडोनेशिया में रह रही उनकी पत्नी और बेटी से मिलवाने में भी सहायता की जाएगी.
सेंग को जो घर मिला है वो एक बेडरूम वाला फ़्लैट है, जिसमें उनके साथ एक और शख्स रहता है. घर में फिलहाल उतना सामान नहीं है. इस फ़्लैट में फ़्रिज, टेलीविज़न, केतली और वॉटर हीटर जैसे कुछ सामान हैं, जो लोगों ने दान में दिए हैं.
सेंग को इनमें से सबसे ज़्यादा वॉटर हीटर पसंद है. उन्हें जंगल में अपने टेंट के पास तालाब के पानी की आदत थी और अब उन्हें नल का पानी बेहद ठंडा लगता है. सेंग अब ड्राइवर का पेशा अपना चुके हैं. उनका काम विदेशी कामगरों को एक से दूसरी जगह पहुंचाना है. वो कहते हैं कि इन सबके बीच वो कभी-कभी पेड़-पौधों पर भी ध्यान दे देते हैं.
तीन दशक से भी अधिक समय बाद पहली बार ऐसा हुआ जब सेंग ने सिंगापुर में अपने परिवार के साथ लुनर ईयर मनाया.
वो हंसते हुए कहते हैं, "मैंने बहुत सारा ख़ाना खाया! बहुत सी ऐसी चीज़ें थीं, जिनका स्वाद सालों से चख़ा तक नहीं था. ये सब बहुत ही अच्छा था. मैंने तीस सालों बाद पहली बार टीवी देखा. मुझे बहुत आनंद आया."
हालांकि, सेंग अब फ़्लैट में रहते हैं लेकिन उन्हें अभी भी जंगल में मिलने वाली आज़ादी याद आती है. वो हॉकिन (चीन की एक भाषा) में कहते हैं, "मैं वहां सालों रहा, इसलिए स्वाभाविक है कि मैं जंगल को याद करूं. अब भी मैं हर दिन जंगल जाता हूं. रोज़ सुबह 3 बजे उठता हूं, तैयार होता हूं और फिर अपनी सब्ज़ियों को देखने जाता हूं. ये सब मैं अपने रोज़मर्रा के काम शुरू करने से पहले ही कर लेता हूं."
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