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अमेरिका का एक शहर जहां पानी जहरीला हो गया है
- Author, लियोमन लीमा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिका के मिशिगन के अधिकारियों ने कुछ ही सप्ताह पहले एक अपातकालीन घोषणा में बंटन हार्बर के शहरियों से कहा है कि वो घरों तक नलों से पहुंचने वाले जल का इस्तेमाल खाना बनाने, सब्जियां धोने और ब्रश करने के लिए न करें.
अमेरिकी शहर शिकागो से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित बेंटन हार्बर में कम से कम पिछले तीन सालों से हालात ऐसे रहे हैं कि सप्लाई के पानी के इस्तेमाल का मतलब रहा है बीमारी को दावत देना.
आख़िर नल से आने वाला जल इतना ज़हरीला कैसे है, दरअसल इस पानी में सीसे की मात्रा काफ़ी ज़्यादा हो गई है.
बेंटन हार्बर कम्यूनिटी वाटर काउंसिल के चेयरमैन रेवेरेंड एडवर्ड पिंकने ने बीबीसी वर्ल्ड को बताया, "2018 से ही पाया गया कि इलाक़े की जल आपूर्ति में सीसे की मात्रा बहुत अधिक है- ख़तरनाक के स्तर से बहुत ज़्यादा. लेकिन इसके उपयोग पर अबतक रोक नहीं लगाई गई थी."
साल 2018 में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक़ इलाक़े के पानी में सीसे की मात्रा 22 पार्टस प्रति अरब मौजूद थी, जो जनवरी से जून, 2021 के दौरान बढ़कर 24 पार्टस प्रति अरब हो चुकी है.
हालांकि कुछ घरों में इसकी मात्रा 400 से 889 पार्टस प्रति अरब भी देखी गई है. यहां यह ध्यान रखना होगा कि अमेरिका में पेयजल में 15 पार्ट्स प्रति बिलियन से ज़्यादा सीसा होने को असामान्य माना जाता है.
मिशिगन में वाटर क्वालिटी के एक्सपर्ट इलिन वारेन बेटानज़ो बताते हैं, 'इंसान के इस्तेमाल के लिए मुहैया पानी में सीसे की मौजूदगी पर सख़्त पाबंदी है इसलिए कहा जा सकता है कि बेंटन हार्बर में पाया जानेवाला स्तर बेहद चिंताजनक है.'
ये मात्रा यहां से तीन घंटे की दूरी पर मौजूद पड़ोसी शहर फ्लिंट से बहुत ही अधिक है जहां सीसे की पानी में मात्रा 20 पार्टस प्रति अरब (2014-15) पाई गई है और जो दुनियाभर में सुर्खियां बना था.
पिंकने कहते हैं, "यह ऐसी समस्या है जिसके बारे में हम सबको सोचना होगा. हम दुनिया के सबसे अमीर देश हैं, लेकिन यहां ऐसी जगहें भी हैं जहां पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है. हमारे पास ऐसी जल आपूर्ति है जिसका इस्तेमाल ब्रश करने के लिए नहीं कर सकते हैं, हम अपने बच्चे के लिए दूध तक नहीं तैयार कर सकते हैं. ऐसा लगता है कि हम किसी पिछड़े देश में रह रहे हैं."
सीसे की समस्या
अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक पानी में सीसे की मात्रा ज़्यादा होने से गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ती हैं, साथ साथ बच्चों के मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है. इसके अलावा व्यस्क लोगों में भी स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं.
बेंटन हार्बर में अधिकारियों ने लोगों के बीच फिल्टर वितरित किए हैं, पानी को शुद्ध करने की सुविधा बेहतर बनाई है लेकिन अब यहां के लोगों का जीवन बोतल बंद पानी पर निर्भर हो चुका है. ऐसी स्थिति में अधिकारियों में इस बात की चर्चा भी चल रही है कि क्या फ़िल्टर कारगर साबित नहीं हुए.
हालांकि स्थानीय मीडिया, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और एक्सपर्ट, सबका यही मानना है कि सरकार इन लोगों को पीने लायक़ पानी की सुविधा मुहैया कराने में कामयाब नहीं हुई है और ना ही उपलब्ध पानी को शुद्ध बनाने की कारगर तकनीक ही विकसित हो सकी है.
फ्लिंट शहर में सबसे पहले इस समस्या को चिह्नित करने वाले बेटानज़ो बताते हैं, "हमलोगों ने लगातार छह बार निगरानी के दौरान सीसे की मात्रा की ज़्यादा पाया, लेकिन इससे लोगों के बचाव के रास्ते तलाशने में हमने मुस्तैदी नहीं दिखाई. ना तो लोगों को ज़ागरुक किया और ना ही उन्हें बता पाए कि इसे पीना हानिकारक है."
मिशिगन स्वास्थ विभाग ने बीबीसी मुंडो को बताया कि वो लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ शहर की पाइपलाइन्स को बदल रहे हैं.
सरकार ने पहले अनुमान लगाया था कि अगर आवश्यक बजट आवंटन हो जाता है तो ये काम पांच साल में पूरा हो जाएगा लेकिन अब इसे दो साल में पूरा करने की योजना है, .
पर्यावरण संबंधी एक्सपर्ट और संस्थाओं का कहना है कि फ़्लिंट और बेंटन हार्बर, सिर्फ़ दो शहरों की स्थिति ऐसी नहीं है, ये अमेरीका में एक ज़िंदा बम के समान है जो कभी भी फट सकता है.
स्वंयसेवी संस्था नेचुरल डिफेंस काउंसिल के मुताबिक़ अमेरिका के 50 प्रांतों में अभी भी एक करोड़ 28 लाख सीसे की पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है जिनके माध्यम से घरों में पानी पहुंचाई जाती है.
इनमें से कुछ शहरों में स्थिति बेंटन हार्बर से भी अधिक गंभीर है. अनुमान है कि सिर्फ दो प्रतिशत स्पालई लाइन्स ऐसी है जिनमें सीसा मौजूद नहीं है.
उत्तरपूर्व अमेरिकी और मध्य पश्चिम अमेरिका में ठंडक इतनी ज़्यादा होती है कि पानी का पाइप जम जाता है, सीसे वाले पाइप लचीले होते हैं, लिहाज़ा उनका इस्तेमाल ज़्यादा उपयुक्त होता है.
लेकिन कि सीसे की पाइप से सीसा धीरे धीरे पानी में घुलने लगता है, ये पता नहीं चलता क्योंकि इसका कोई स्वाद या गंध नहीं होता है. इसलिए सीसे के मिश्रण होने पर लोग उसकी शिकायत नहीं कर पाते हैं. जबकि लोहे की पाइप का लोहा अगर पानी में मिले तो उसका पता जल्दी चल जाता है.
शुरुआती दिनों में यह माना जाता रहा था कि सीसे की मात्रा अगर ज़्यादा हो तभी वह हानिकारक हो सकता है लेकिन अब यह साबित हो चुका है कि सीसे की मात्रा कितनी भी कम क्यों ना हो वह हानिकारक ही है.
इसी वजह से 1986 से अमेरिका में इन पाइपों के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई है लेकिन इसी दौरान शिकागो जैसे शहरों में गोदाम पर पड़े सभी पाइपों का इस्तेमाल क़ानून के लागू होने से पहले कर लिया गया.
हालांकि बहुत सारे लोगों को उम्मीद है कि हालात अब सुधर जाएंगे क्योंकि सीसे वाली पाइपों को हटाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 45 अरब डॉलर की योजना को अपनी कार्ययोजना में शामिल किया है, लेकिन अब तक इस योजना को स्वीकृति नहीं मिली है.
वहीं दूसरी ओर बेंटन हार्बर के लोगों को भी यह नहीं मालूम है कि दो साल में पाइप बदलने की योजना के लिए पैसा कहां से आएगा.
वैसे लोगों को राहत दिलाने के लिए स्थानीय अधिकारी बोतल बंद पानी मुफ्त में वितरित कर रहे हैं, लेकिन आम लोगों का कहना है कि उपयोग के लिए यह पानी काफी नहीं है.
समस्या कहीं ज़्यादा बड़ी है
पिंकने कहते हैं कि इस इलाके में सुविधाओं की कमी है. यहां रहने वाले अधिकांश ग़रीब हैं और काले हैं.
एक्टिविस्ट भी इस पहलू से इनकार नहीं करते हैं. एक्टिविस्टों का कहना है कि बेंटन हार्बर से सटा हुआ इलाका है सेंट जोसेफ़ वहां भी ग़रीबी है लेकिन 85 प्रतिशत नागिरक गोरे है, इस इलाके के पानी में सीसा नहीं है.
पिनकने कहते हैं, मसला पार्यावरणीय नस्लवाद का है, क्योंकि ये लोग काले लोगों के साथ ऐसा ही करते आए हैं. बेंटन हार्बर प्रशासन कई बार इन आरोपों को ख़ारिज कर चुका है.
बेटानज़ो अमेरिका और मिशिगन में पानी की उपलब्धता पर काफी अध्ययन कर चुके हैं, उनका मानना है कि इस तरह का भेदभाव काले लोगों के साथ हुआ है.
वे बताते हैं, 'पुराने शहरों जहां ज़्यादा गोरे लोग रहते हैं वहां सीसे वाले पाइप हटाए जा चुके हैं. ऐसे में काले लोगों पर इसका असर ज़्यादा दिख रहा है. ऐसे में अहम यह है कि काले लोगों के समुदाय वाले इलाक़े से सीसे की पाइप को हटाना चाहिए नहीं तो यह मुद्दा पर्यावरणीय न्याय हासिल करने जैसा बन जाएगा.'
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