झरनों और झीलों का पानी पीना कितना सुरक्षित है?

    • Author, टिम स्मेडले
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

"यहां बैठे सभी लोग पानी पीते हैं, लेकिन क्या आप इसके लिए ज़्यादा पैसे देना चाहेंगे?"

जनवरी 2018 में अमरीकी टेलीविज़न के कॉमेडी सर्किट में "कच्चे पानी" का मखौल उड़ाया जा रहा था. उस रात 'दि लेट शो' में स्टीफ़न कोल्बर्ट की बारी थी.

वह कहे जा रहे थे - "ठीक है अच्छी ख़बर है, क्योंकि सिलिकॉन वैली में अगला बड़ा स्टार्ट-अप क्रेज कच्चे पानी का होगा."

"वह पानी जिसे साफ़ नहीं किया गया है, जिसे शोधित नहीं किया गया है, जिसे कीटाणु रहित नहीं किया गया है. उस पानी को पीना पागलपन लगता है."

सैन फ्रांसिस्को के टेक्नोलॉजी हब में लिव वाटर जैसी कंपनियां झरनों से लाए गए अशोधित पानी का एक बोतल 36.99 डॉलर में बेच रही थीं.

न्यूयॉर्क टाइम्स में भी इस पानी के प्रति बढ़ती दीवानगी का मज़ाक़ उड़ाया गया.

इस अख़बार ने लिखा कि स्टार्ट-अप कंपनियां "असली पानी" के फ़ायदों को बढ़ा-चढ़ाकर बता रही हैं.

लेकिन सभी लोग इस पर हंस नहीं रहे थे. कुछ इसे गंभीरता से ले रहे थे.

कौन सा पानी सही है?

पीने का पानी बहुत सारे नियम-क़ायदों में बंधा है और अशोधित पानी को ख़रीदने और बेचने का बाज़ार अब भी बहुत छोटा है.

लेकिन Findaspring.com वेबसाइट के मुताबिक़ क़ुदरती पानी एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है और लोग ख़ुद के जंगली जल स्रोतों की तलाश कर रहे हैं.

लोगों ने दुनिया भर में हज़ारों प्राकृतिक कुओं और झरनों की सूची और उनका नक्शा बनाया है जहां का पानी पीया जा सकता है.

वैसे यह वेबसाइट एक डिस्क्लेमर ज़रूर देती है कि पीने से पहले लोग सभी झरनों के पानी की जांच कर लें, लेकिन इस वेबसाइट के संस्थापक डेनियल विटलिस का वीडियो दावा करता है कि "क़ुदरती पानी पीने के लिए इंसान जैविक रूप से उतने ही अनुकूलित हैं जितने की जानवर."

यह दावा भी किया गया है कि "हम संवर्धित कार्बोहाइड्रेट्स के लिए जितने अनुकूलित हो चुके हैं उतना संवर्धित पानी के लिए नहीं हुए हैं."

विटलिस की बातों से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखने वाले लोग भी हैं. उनके वीडियो के ठीक नीचे एक यूज़र की टिप्पणी है- "याद रखें कि कुछ झरने ई-कोलाई (बैक्टीरिया) से दूषित हो सकते हैं."

"हम कई साल तक मिलेसबर्ग (ओहियो) के झरने का पानी पीते रहे, फिर ऊपर पहाड़ी पर मवेशियों का एक बाड़ा बन गया. हम में से तीन लोग बीमार पड़ गए."

पीछे ले जाने वाला क़दम

वैल कर्टिस लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में हाइजीन की प्रोफेसर और पर्यावरण स्वास्थ्य समूह की निदेशक हैं.

'रॉ वाटर' मूवमेंट को लेकर उनकी भी चिंताएं हैं. वह कहती हैं, "मुझे यह पीछे ले जाने वाला क़दम लगता है."

"हमने इस क्षेत्र में बहुत प्रगति की है. पानी को साफ़ करके और अच्छी स्थिति में उसकी आपूर्ति करके हमने प्रदूषण की समस्या को सुलझाया है."

"हमने क्लोरीन और फ्लोरीन मिलाकर पानी को बेहतर बनाया है, कीड़ों को ख़त्म किया है और दांतों की सेहत सुधारी है."

वह पूछती हैं, "क्या आप सच में पाषाण युग में लौटना चाहते हैं?

लेकिन लिव वाटर की वेबसाइट का होमपेज (जो Findaspring.com से जुड़ा है) दावा करता है कि इंसान ने अपने अस्तित्व के 99 फीसदी हिस्से में झरनों का असंवर्धित पानी पिया है."

बीबीसी कैपिटल ने लिव वाटर और विटलिस दोनों से साक्षात्कार के लिए संपर्क किया, लेकिन वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुए.

विटलिस वह सब ख़ुद भी करते हैं जिसके बारे में वह बातें करते हैं. 29 हज़ार फॉलोवर्स वाला उनका इंस्टाग्राम अकाउंट शिकार और (पानी की) तलाश की तस्वीरों से भरा हुआ है.

वाइल्डफ़ेड (WildFed) नाम का उनका ऑनलाइन शो "उभरती हुई आधुनिक निर्वाह संस्कृति" और "स्थानीय भोजन की तलाश" को बढ़ावा देता है.

क़ुदरती चीजें बेहतर

उनके विचार में क़ुदरती चीज़ें हमेशा सबसे बेहतर होती हैं और पुश्तैनी जड़ों की ओर लौटना ही मक़सद है.

कर्टिस का कहना है कि कुछ विज्ञान पैलियो डाइट (पाषाण युग जैसा आहार) का समर्थन करता है, लेकिन साफ़ पानी के बारे में स्पष्ट नीति होनी चाहिए.

"हमारे पूर्वज टाइफाइड, हैजा, जिआर्डिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बड़ी संख्या में मरे भी हैं." पाषाण युग के पूर्वजों की जीवन प्रत्याशा बहुत कम थी.

क़ुदरती पानी में लाभदायक बैक्टीरिया होने से आंतों की सेहत अच्छी रहने के दावे के बारे में कर्टिस का कहना है कि ऐसा हो सकता है, लेकिन उनमें हानिकारक बैक्टीरिया भी हो सकते हैं.

विटलिस के वीडियो में दावा है कि नल का पानी एंटीबायोटिक पदार्थों से दूषित होता है... (और) क्लोरीन और फ्लोराइड स्नायुतंत्र के लिए ज़हर हैं. कर्टिस इसे भी ख़ारिज करती हैं.

वह कहती हैं, "पानी में फ्लोराइड और क्लोरीन की जितनी मात्रा होती है, उससे कोई नुक़सान नहीं होता."

"इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि पानी में दवाइयों जैसे कि एंटीबायोटिक्स के बहुत थोड़े से अवशेष हमारी सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं."

अलास्का का पानी

गैलेन ज़िंक ने 2018 में सिलिकॉन वैली में नौकरी छोड़ी और "आत्मनिर्भरता" और "पोषण संबंधी आत्म-अनुकूलन" के लिए दक्षिणी अलास्का के एक सुदूर द्वीप चले गए.

कर्टिस के बताए ख़तरों और चेतावनियों के बारे में जानते हुए भी वह स्थानीय जलधारा का पानी पीते हैं.

ज़िंक को यह सेहत के लिए अच्छा लगता है.

वह कहते हैं, "यहां यह बहुत आम है. इसमें प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पाया गया है. क़ुदरती पानी पीने से सेहत सुधरती है."

वह भी दावा करते हैं कि "क़ुदरती पानी पीने से त्वचा चिकनी हो जाती है."

ज़्यादा आबादी, गंदा पानी

ज़िंक और कर्टिस दोनों एक बात पर सहमत हो सकते हैं. जहां इंसानी आबादी कम है, ऐसे ग्रामीण वातावरण में सुरक्षित जल स्रोत होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.

अलास्का के प्रिंस ऑफ़ वेल्स आइलैंड पर रहने वाले ज़िंक कहते हैं, "साफ़ हवा और पानी के लिए मुझे इतनी दूर यहां आना पड़ा."

प्रिंस ऑफ़ वेल्स द्वीप की आबादी तीन हज़ार है जो 2,230 वर्ग मील (5,776 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में बिखरी हुई है. यहां थोड़ी बहुत खेती होती है और कोई उद्योग नहीं है.

ज़िंक मानते हैं, "अगर आप कहीं भी इंसानी आबादी के क़रीब रहते हैं तो सतही जल (नदी, तालाब, झील वगैरह) दूषित होगा."

समय और पैसे बचाने की कोशिश में ऑनलाइन बताए गए झरनों से पानी पी लेना शायद बहुत से लोगों के लिए सही विकल्प नहीं है.

शुरुआत में उनके फ़ायदों को महसूस करना आसान है, लेकिन फिर धीरे-धीरे खर-पतवार नाशक रसायनों का ज़हर आप में समाता रहता है.

Findaspring.com पर तलाशने पर मुझे इंग्लैंड में 56 झरने मिले. इनमें से कई शहरी इलाक़ों में थे. पांच झरने तो लंदन में मिले.

कर्टिस की सलाह है कि इनके पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण कराई जाए और पानी के नमूने हर मौसम में लिए जाएं.

"ट्रेंड्स इन माइक्रोबायोलॉजी" जर्नल की संपादक गेल टीटज़ेल कहती हैं, "कीटाणु और रासायनिक संक्रमण की जांच के लिए हर बार पानी का परीक्षण कराने की ज़रूरत है."

नगरपालिका और बोतलबंद पानी का पहले ही परीक्षण होता है और वे सुरक्षित साबित हो चुके हैं.

बीमारियों का ख़तरा

"यह कच्चे अंडे की तरह है- अंडे को पकाकर या पानी को संशोधित करके आप उनमें बीमारियों के जो भी कारक हैं उनको ख़त्म करते हैं."

कई बोतलबंद मिनरल वाटर ब्रांड सीधे प्राकृतिक झरनों से पानी लेते हैं. इस पर टीटज़ेल का कहना है कि बोतलबंद पानी के बारे में नियम-क़ायदे हैं ताकि उनमें ख़तरनाक रोगाणु या केमिकल न हों.

नये अध्ययन से पता चला है कि 90 फीसदी बोतलबंद पानी के ब्रांड और 12 देशों में 83 फीसदी नल के पानी के नमूनों में प्लास्टिक के सूक्ष्म कण पाए गए हैं, जिनको माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है.

सबसे ज़्यादा 94 फीसदी प्लास्टिक संक्रमण अमरीका में नल के पानी में पाया गया. तो क्या कच्चे पानी की मांग आधुनिक पानी की गुणवत्ता की बाजिव चिंताओं का जवाब नहीं है?

टीटज़ेल को फ़िक्र है कि इसके कारण क़ुदरती पानी के उत्साही लोग अशोधित जल के ख़तरे को कम करके आंक सकते हैं.

"पीने के पानी में माइक्रोप्लास्टिक संक्रमण का और अध्ययन होना चाहिए, लेकिन हम जानते हैं कि जहां पीने के पानी को शोधित करने की सुविधा नहीं है वहां बच्चों की मृत्यु दर ज़्यादा है और इसका बड़ा कारण पानी से होने वाले डायरिया रोग हैं."

दूसरों की भी सोचें

अगर लोग अशोधित पानी पीना चाहते हैं तो क्या मुक्त समाज में यह उनकी पसंद नहीं है?

कर्टिस इसे टीकाकरण विरोधी आंदोलन की तरह बताती हैं. "मैं अक्सर बीमार नहीं पड़ती क्योंकि आप हमेशा गंदा पानी नहीं पीते."

"अगर आप गंदा पानी पीकर बीमार पड़ेंगे तो आप मेरे लिए और अपने सहकर्मियों के लिए जोखिम होंगे."

एक मिसाल देखिए- पानी पीने वाले को ई-कोलाई (बैक्टीरिया) मिलता है. वह कॉमन वॉशरूम जाता है या स्टाफ कैफेटेरिया में खाना छूता है और बैक्टीरिया को (आगे) पास करता है.

"अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको ज़िम्मेदारी लेनी होगी कि आप न सिर्फ़ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी जोखिम का स्रोत हो सकते हैं."

कोल्बर्ट के दि लेट शो ने यह निष्कर्ष निकाला कि "पोखरों का पानी पीने से नुक़सान भी हो सकता है."

ज़िंक जैसे लोगों को यह बात बुरी लग सकती है जो दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहते हैं और जिनकी पसंद स्थानीय जानकारियों पर निर्भर है.

आइसलैंड में 88 फीसदी नल का पानी भी रासायनिक रूप से अशोधित ग्लेशियर का होता है.

लेकिन अलास्का या आइसलैंड की बात अलग है. वे सचमुच बहुत दूर हैं. शहरों में रहने वाले लोगों के लिए तो नल का पानी ही सबसे सुरक्षित और स्वस्थ विकल्प है.

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