पैसे की सीढ़ी लगाकर कतार पार करते अमीर

    • Author, क्रिस बरन्यूक
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

मेक्सिको के सबसे बड़े बैंकों में से एक बनोर्टे में अगर आपके खाते में खूब सारा पैसा है तो आपको बैंक की 900 शाखाओं में से किसी भी एक शाखा में घुसते ही इसका एहसास हो जाएगा.

बैंक पहुंचकर आप जैसे ही अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप करेंगे, कर्मचारियों को आपके आने का संदेश मिल जाएगा और आप प्राथमिकता में हो जाएंगे.

एक सहायक आपका स्वागत करेगा और आपको किसी भी कतार में खड़े होने की ज़रूरत नहीं होगी.

यह सब वेबटेक की तकनीक से संभव हुआ है. यह कंपनी प्रबंधन की विशेषज्ञ है.

वेबटेक के ग्राहक बेहद ख़ास या अमीर ग्राहकों को प्राथमिकता देने के तरीके चाहते हैं ताकि उनके लिए सेवाओं को अनुकूलित किया जा सके. इसका मतलब है चुनिंदा लोगों के लिए विशेष खातिरदारी.

यह क्रेडिट कार्ड के स्वाइप से हो सकता है, लेकिन वेबटेक दूसरे तरीकों के साथ भी प्रयोग कर रही है.

मिसाल के लिए, इसके लिए ब्लूटूथ का प्रयोग किया जा सकता है, जिससे किसी बेहद अमीर ग्राहक के आते ही बैंक कर्मचारियों के फोन में संदेश पहुंच जाएगा.

वेबटेक के डिप्टी सीईओ टोबियस बेसोन कहते हैं, "तकनीक उपलब्ध है, देखना यह है कि लोग इसे मंजूर करेंगे या नहीं."

पैसे है तो कतार में क्यों लगें

लेकिन एक समस्या है. प्राथमिकता वाली कतार या अतिरिक्त पैसे चुकाकर तुरंत सेवा पाने के तरीके को लेकर सभी लोग उत्साहित नहीं हैं.

इसे अमरीकी अवधारणा माना जाता है, लेकिन यह अब दुनिया भर में फैल रही है.

अगर आपने फास्ट-ट्रैक टिकट या वीआईपी पास खरीदा है तो हवाई अड्डे की सुरक्षा जांच से लेकर संगीत समारोहों तक हर जगह कतार में खड़े होने से बच सकते हैं.

2017 में गार्डियन के स्तंभकार जूलियन बगीनी ने लिखा था कि यह "पैसा बोलता है संस्कृति" हावी होने का संकेत है.

बगीनी ने माना था कि कतार कभी भी उतने समतावादी नहीं रहे जितना समझा जाता है. अमीरों की हमेशा खातिरदारी मिलती रही है.

फिर भी प्राथमिकता वाली कतार का मतलब है कि पैसा वही काम कर रहा है जो कभी वर्ग करता था, यानी समाज को बांटना.

अमरीका के डिज़्नीलैंड या ब्रिटेन के एल्टन टावर्स जैसे थीम पार्क में प्राथमिकता वाली कतार पहले से है. वहां महंगे टिकट खरीदने वाले मेहमान मुख्य कतार में लगने से बच सकते हैं.

बैंकों में, यहां तक कि सेंटा ग्रोटो (क्रिसमस वंडरलैंड) में भी इसके विस्तार का मतलब है कि यह विचार कई देशों में फैल गया है.

कुछ संदर्भों में प्राथमिकता कतार पर कानूनी पेचीदगियां हो सकती हैं. ब्रिटेन के संवैधानिक वकील एंड्र्यू ली स्यूर का कहना है कि सीमा पर पैसे चुकाकर जल्दी प्रवेश पाने का विकल्प यात्रियों के मानव अधिकार सिद्धांतों का उल्लंघन है.

समय बनाम पैसा

शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में व्यवहार विज्ञान की विशेषज्ञ आयलेट फिशबैक का कहना है कि सरकारी सेवाओं को परे रखकर देखिए तो प्राथमिकता वाली कतार में समझदारी दिखती है.

प्राथमिकता वाली कतारें लोगों को यह चुनने का हक देती हैं कि वे आगे बढ़ने के लिए किस संसाधन का इस्तेमाल करना चाहते हैं- समय का या पैसे का.

कई लोगों के लिए समय पैसे से ज़्यादा मूल्यवान है, इसलिए उनके लिए पैसे देकर समय बचा लेना वरदान की तरह है.

जो ग्राहक वास्तव में फास्ट-ट्रैक विकल्प का इस्तेमाल नहीं करते वे भी ग्राहक सेवा के बारे में अच्छी सोच बना लेते हैं- बशर्ते कि मुख्य कतार उनका बहुत अधिक समय न ले.

फिशबैक कहती हैं, "यह अच्छी सेवा का अहसास दिलाता है, भले ही लोग इसका इस्तेमाल न करें."

वह यह भी तर्क देती हैं कि कई स्थितियों में कतार में खड़े होने से किसी उत्पाद या सेवा का मूल्य अधिक लगता है.

कई बार यह काम नहीं करता- कोई नहीं चाहता कि एक पार्सल भेजने के लिए डाकघर में दो घंटे कतार में लगना पड़े.

मनोरंजक कतार

कुछ जगहों पर लोग खुशी-खुशी कतार में लगना पसंद करते हैं. हाल ही में लंदन में हज़ारों लोग ट्रेनर्स जूते खरीदने के लिए रात भर कतार में लगे रहे.

एक जोड़ी जूते की कीमत थी 180 पाउंड और इसे डिजाइन किया था केनी वेस्ट (अमरीकी गायक-संगीतकार) ने.

स्ट्रीटवियर ब्रांड इस तरह नये उत्पाद को बाज़ार में उतारने से पहले उसमें दिलचस्पी पैदा करते हैं और लोग उसे हाथों-हाथ खरीदने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं.

विंबलडन लॉन टेनिस टूर्नामेंट के इंतज़ार में घंटों बिता देना न सिर्फ मनोरंजक होता है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव का स्रोत भी है.

प्राथमिकता कतार के बारे में सोच रहे किसी भी व्यवसाय को यह सोचना होगा कि किसी ब्रांड विशेष के लिए यह कितना सही होगा- क्या लोग उस तक तुरंत पहुंच चाहते हैं? या यह खरीदारी के पूरे अनुभव को कमतर और जटिल बना देगा?

बाज़ार विश्लेषक मिंटेल के एसोसिएट डायरेक्टर निक कैरोल का कहना है कि किराने की दुकानों पर लगी कतारें ग्राहकों में खीझ पैदा करती हैं.

किराना दुकान की कतार

सुपरमार्केट में खरीदारी करने वाले 24 फीसदी लोग वहां इंतज़ार करने में लगने वाले समय से नाखुश हैं. ऐसी जगहों पर कतार से बचने के लिए कई तरकीबें अपनाई जा रही हैं.

कैरोल कहते हैं, "सेंसबरी (ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी सुपरमार्केट चेन) ने स्मार्टफोन के जरिये सेल्फ-बास्केट स्कैनिंग को आगे बढ़ाया है. इसमें लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है."

16 से 34 साल के आधे लोग सोचते हैं कि किराने की दुकानों पर ऐसी टेक्नोलॉजी होनी चाहिए.

जिस तरह 10 या कम आइटम खरीदने वाले ग्राहकों के लिए अलग कतार बनाई जाती है, उसी तरह यह भी ग्राहकों के प्रवाह को सुधारने का एक तरीका है.

लेकिन असल मसला तब खड़ा होता है जब लोग किसी व्यवस्था में तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए पैसे का भुगतान कर सकते हैं. कई लोगों को इसी से चिढ़ है.

क्या यह अवधारणा समाज को दो स्तरों में बांटती है? ऐसा लगता है कि इसका जवाब "हां" है- लेकिन जैसा कि बगीनी कहते हैं कि समाज हमेशा से दो-स्तरीय रहा है.

क्या नकद पैसे का वर्ग की जगह ले लेना समस्या है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप पूछ किससे रहे हैं.

एमआईटी के डिक लार्सन कहते हैं, "ये सिर्फ़ बाज़ार की ताकतें हैं जो धीरे-धीरे कई चीजों पर नियंत्रण कर रही हैं."

डिक लार्सन कतार में इंतज़ार के विशेषज्ञ हैं और डॉक्टर क्यू के उपनाम से मशहूर हैं.

कतार में खड़े होने का अनुभव

किसी कतार में खड़े लोगों के अनुभव ज़रूरी नहीं कि इसमें लगे समय के बारे में ही हो. इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इंतज़ार के दौरान क्या हुआ.

युद्ध बाद के अमरीका में न्यूयॉर्क की कई गगनचुंबी इमारतों में लिफ्ट के पास आईने लगा दिए गए थे. लोगों को शिकायत रहती थी कि लिफ्ट के लिए उन्हें बहुत इंतज़ार करना पड़ता है.

आईने लग जाने के बाद दफ़्तरों के कर्मचारी और होटलों के मेहमान ख़ुद को निहार सकते थे. इससे लिफ्ट के इंतज़ार का समय तो नहीं बदला, लेकिन लंबे इंतज़ार की शिकायतें घट गईं.

कतार में खड़े होकर इंतज़ार करना तभी अनुचित लग सकता है यदि उस समय का अनुभव परेशानी भरा हो.

इसे देखने का एक और तरीका भी है. सोचिए कि कतार में लगना ही पुराने जमाने की बात है.

आज तकनीक उपलब्ध है और ग्राहक क्या चाहते हैं, कब चाहते हैं, इसकी समझ भी है. ऐसे में एक दिलचस्प सवाल यह उठता है कि किसी को लाइन में लगकर इंतज़ार क्यों करना चाहिए?

जमाना बदल गया है

बाज़ार विश्लेषक कंपनी गार्टनर की वाइस प्रेसिडेंट टिफ़ैनी फाउंटेन एप्पल शॉप्स का उदाहरण देती हैं, जहां टूटे आईपॉड या मैक को टेक्नीशियन को दिखाने के लिए ग्राहकों को पहले समय लेना पड़ता है.

टिफ़ैनी कहती हैं, "यह भी एक तरह की फ़ास्ट-ट्रैकिंग है लेकिन यहां एहतियात है- स्टोर पर पहुंचने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि वहां कतार न हो."

किराने की दुकान में खरीदारी करते हुए सामान की स्कैनिंग करना हो या बैंक जाने की जगह ऑनलाइन भुगतान करना हो, कतार में खड़े होकर कोई काम पूरा करना अब पुराना लगता है.

कतार शायद कभी ख़त्म न हों और कुछ जगहों पर लोग उसका आनंद भी उठाते रहेंगे, लेकिन हम सब इस हक़ीक़त से भी वाक़िफ़ हैं कि कतार में लगना कई बार निरर्थक होता है.

यदि कोई कारोबार या सेवा ख़ुद को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर ले तो हमें देर तक कतार में लगने की ज़रूरत न हो.

हो सकता है कि प्राथमिकता वाली कतार या फास्ट-ट्रेक लेन सिर्फ़ पैसे बनाने की तरकीब हो. लेकिन ये योजनाएं हमारी उस धारणा की प्रतिक्रिया हैं कि हमेशा कतार में लगना मूर्खों का काम है.

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