इस्लामिक स्टेट सीरिया और इराक़ में जेलों पर हमले क्यों करता जा रहा है- विश्लेषण

सीरिया के हसाका शहर में पिछले गुरुवार से संघर्ष हो रहा है

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    • Author, मीना अल-लामी
    • पदनाम, जिहादी मीडिया विश्लेषक, बीबीसी मॉनिटरिंग

हाल ही में इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने उत्तर-पूर्वी सीरिया की उस जेल पर हमला किया जहां सैकड़ों आईएस सदस्य कैद थे. इस हमले को लंबे समय बाद इस समूह की तरफ से किया गया सबसे बड़ा हमला और महत्वाकांक्षी अभियान माना जा रहा है.

लेकिन ख़तरा हर तरफ़ है. आईएस नेतृत्व बार-बार यह संदेश दे रहे हैं कि जेल में बंद जिहादी कैदियों को मुक्त कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. 'हदम अल-अवसर' नारे का इस्तेमाल करते हुए आईएस अपना यह संदेश हर ओर फैला रहा है. इस नारे का अर्थ है, "जेल की दीवारों को तोड़ना"।

इस नारे के साथ ही जुलाई 2013 में आईएस कई जेलों को तो़ड़ने में सफल रहा और इसने उसकी छवि को ऐसे समूह के तौर पर बनाया जो कभी अपने समर्थकों का साथ नहीं छोड़ता.

हसाका प्रांत में बिना किसी आधार, भारी सुरक्षा वाली जेल पर हालिया हमला, समूह को मज़बूत कर सकता है और साथ ही जिहादी समुदाय की नज़र में आईएस एक बार फिर खड़ा हो सकता है.

घुवायरान जेल से इस्लामिक स्टेट के एक वीडियो में चरमपंथी अंतिम सांस तक लड़ने की कसम खाते हैं

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क़ैदियों को रिहा कराना

जिहादी कैदियों को रिहा कराना एक ऐसी डोर है जो आईएस के प्रॉपेगेंडा और संदेशों के साथ ही सीरिया के पूर्वी भाग में चलाए उसके अभियानों का हिस्सा रही है.

साल 2019 में आईएस के कब्जे से आखिरी पूर्वी सीरियाई इलाका बघौज़ भी चला गया. इसके बाद से ही आईएस नेता अपने संदेशों में हमेशा कैदियों को बचाने को अपनी प्राथमिकता बताते रहे हैं. आईएस नेता कैदियों से वादा करते हैं, "हम आपको न भूले हैं और न कभी भूलेंगे.''

दरअसल, सीरिया और इराक़ में कैद आईएस लड़ाकों और उनके परिवार के सदस्यों (महिलाओं और बच्चों) का मुद्दा, समूह के लिए शर्म की बात रही है.

जब आईएस ने पहली बार बघौज़ को खोया तो उसके कई लड़ाकों के साथ-साथ परिवारों को भी घेर लिया गया और उन्हें हसाका प्रांत के अल-होल, अल-रोज और घुवायरन जैसे कुर्द संचालित डिटेंशन कैंपों और जेलों में ले जाया गया.

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इस मुद्दे पर जिहादी प्रतिद्वंद्वियों ने आईएस को खूब शर्मसार किया. अपने लड़ाकों को अकेला छोड़ने और खासतौर पर महिलाओं कैद किया जाना आईएस के "सम्मान" पर धब्बा था.

बघौज़ हाथ से जाने के बाद आईएस के तत्कालीन सरगना अबु बकर अल-बग़दादी की ओर से अप्रैल 2019 में पहली बार संदेश जारी किया गया जिसमें सीरिया में बंधक बनाए गए लड़ाकों का जिक्र नहीं था.

प्रतिद्वंद्वी जिहादियों ने इसे भी आईएस की आलोचना का एक मुद्दा बनाया. अल-क़ायदा के समर्थकों ने उस समय "फ़्री द प्रिज़नर्स" अभियान शुरू किया और आईएस लड़ाकों के परिवारों को बचाने के प्रयास किए. यह ऐसा काम था जिसे आईएस समर्थकों ने समूह के अपमान के तौर पर देखा.

नेतृत्व ने समझी गलती

इस्लामिक स्टेट के नेता अपने संदेशों में कह रहे हैं कि क़ैदियों की रिहाई बहुत ज़रूरी है

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आईएस ने इन सबसे सबक लिया. उसी साल (सितंबर2019) में इसके नेता अबु बक़्र अल-बग़दादी ने एक और संदेश दिया, जिसका एक बड़ा हिस्सा कैदियों को समर्पित रहा और बग़दादी ने अपने लड़ाकों से कहा कि वे जेल से अपने कैदियों को रिहा कराने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता समझें.

कैदियों के लिए बग़दादी के शब्द "हम आपको नहीं भूले हैं" का बाद में आईएस ने अपने संदेशों और ऑनलाइन अभियानों में भी इस्तेमाल किया. उस संदेश में बग़दादी ने समूह के पिछले अभियानों का जिक्र करते हुए प्रसिद्ध "हदम अल-असवर" नारे का इस्तेमाल भी किया था.

इन अभियानों में इराक के जेलों पर छापे मारकर सैकड़ों कैदियों को रिहा कराया गया था.

तब से कैदी लड़ाके आईएस नेतृत्व की ओर से जारी किए गए सभी संदेशों का एक अहम हिस्सा बन गए हैं.

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अल-बग़दादी के अनदेखे और अनसुने उत्तराधिकारी अबु इब्राहिम अल-हाशमी अल-कुराशी, जिन्होंने बग़दादी की मौत के बाद अक्टूबर 2019 में आईएस का नेतृत्व संभाला, ने भी अपने संदेशों में कैदियों को प्रमुखता से बढ़ावा देना जारी रखा. अल हाशमी के ये संदेश प्रवक्ता की ओर से प्रचारित-प्रसारित किए गए.

अल-कुरैशी के जनवरी 2020, मई 2020, अक्टूबर 2020 और जून 2021 में जारी किए गए संदेशों में समूह के सारे लड़ाकों से कहा गया था कि वे आईएस कैदियों को रिहा कराने के लिए दोगुने प्रयास करें और उनपर ख़ास ध्यान दें जो सीरिया में बंद हैं.

एक अस्वाभाविक कदम उठाते हुए अल कुरैशी ने जून 2021 के अपने संदेश में उन समर्थकों को वित्तीय पुरस्कार देने का वादा किया, जो आईएस सदस्यों और उनके परिवारों को सज़ा देने में शामिल जांचकर्ताओं, न्यायाधीशों, वकीलों, जेलरों आदि को मौत के घाट उतारेंगे.

लेकिन कैदियों की यह परवाह आईएस अपने खूंखार चरमपंथी गुट बनने से पहले से ही करता रहा है.

आईएस के पूर्ववर्ती, तथाकथित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक़, जो उस समय अल-क़ायदा की एक शाखा के तौर पर काम करता था, अकसर कैदियों के लिए आवाज़ बुलंद करता रहा.

यह मुद्दा न सिर्फ समर्थकों के लिए तैयार किए प्रॉपेगेंडा का हिस्सा हुआ करता था बल्कि वह इराक के सुन्नियों से भी कैदियों को रिहाई के लिए अपील करता था. आईएस अकसर जेल में चरमपंथी गतिविधियों के आरोप में बंद महिला और पुरुष लड़ाकों के समर्थन में हमलों की धमकी देता था.

ऑनलाइन अभियान

इस्लामिक स्टेट के संदेशों के बाद उनके समर्थकों ने पिछले साल इंटरनेट पर क़ैदियों के लिए दो अभियान शुरू किए

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अगस्त 2020 में, आईएस ने अपने सदस्यों को कहा कि कैदियों को मुक्त करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

दरअसल, आईएस उस महीने की शुरुआत में पूर्वी अफ़गानिस्तान की एक जेल पर अपने हमले की सफलता को भुनाने की कोशिश में जुटा था.

इस हमले की वजह से कई कैदी जेल से भाग निकले थे. इसके तुरंत बाद समूह के समर्थकों ने ऑनलाइन हैशटैग अभियानों में इस संदेशों फैलाने के लिए प्रॉपेगेंडा करना शुरू कर दिया.

जनवरी 2021 में, अपने साप्ताहिक अखबार अल-नाबा के ज़रिए आईएस ने अपना नारा ''हम आपको भूले नहीं हैं'' बुलंद किया.

इसके बाद आईएस लड़ाकों ने दो हफ्तों तक ऑनलाइन प्रॉपेगेंडा चलाया. आईएस समर्थक मीडिया संगठनों ने समूह के समर्थन में पोस्टरों, वीडियो और संदेशों की बाढ़ ला दी जिनमें एक ओर कैदियों के साथ एकजुटता दिखाई गई तो वहीं दूसरी तरफ आईएस समर्थकों को इन कैदियों को रिहा करने के लिए उकसाया गया.

2021 के इस संदेश में कुर्द जेलों में इस्लामिक स्टेट के बंदियों की रिहाई की बात की जा रही है

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आईएस समर्थकों ने उसी साल अप्रैल में एक बार फिर यह अभियान चलाया लेकिन इस बार उनका फ़ोकस कैदी महिलाएं थीं. इन अभियानों में पुरुषों को हमले के लिए उकसाने के लिए रणनीति के तौर पर उन्हें शर्मसार किया गया.

जिस तरह ये अनौपचारिक अभियान लंबे समय तक चले उससे यह संकेत मिले कि संभवतः आईएस की ओर से ही चलाए गए थे. इन अभियानों में अकसर अरबी भाषा के हैशटैग और नारों का इस्तेमाल किया जाता था.

पूर्व में जेल पर किए गए हमले

इस्लामिक स्टेट ने अगस्त 2020 में जलालाबाद की जेल पर हुए हमले का फ़ायदा उठाने की कोशिश की है

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आईएस ने अपने कब्ज़े वाले इलाकों में जेलों पर कई सफल हमले किए. इनमें से सबसे ज़्यादा चर्चा उस हमले की हुई थी जो साल 2013 में आईएस ने इराक़ की जेल पर किया था. इस हमले के बाद दो बड़ी जेलों से कथित तौर पर सैकड़ों कैदी भागे थे, जिनमें से कई दोबारा आईएस में शामिल हो गए.

जुलाई 2013 में बग़दाद के पश्चिम में अबू ग़रेब जेल और इसके उत्तर में अल-ताजी जेल पर हमले हुए जिसमें कथित तौर पर 500 से अधिक कैदियों को छुड़ा लिया गया. यह हमले अलग बग़दादी के ''जेल की दीवारें तोड़ दो'' वाले अभियान के तहत किए गए, जो ठीक एक साल पहले यानी जुलाई 2012 में शुरू किया गया था.

समूह ने एक साल बाद 2014 में इराक पर कब्ज़े का ऐलान किया. उस समय जेल से रिहा कराए गए कुछ हाई-प्रोफ़ाइल कैदियों को आईएस नेतृत्व में अहम ज़िम्मेदारियां दी गईं.

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जेल पर सफल हमलों ने आईएस के "जेल की दीवारें" तोड़ने वाले नारे को और मज़बूत किया. अगस्त 2020 में आईएस चरमपंथियों ने पूर्वी अफ़गानिस्तान के जलालाबाद की सेंट्रल जेल पर हमला कर दिया और कथित तौर पर सैकड़ों कैदियों को रिहा कराया.

इसके दो माह बाद, अक्टूबर 2020 में, आईएस लड़ाकों ने कांगो के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में कांगबयी सेंट्रल जेल पर छापा मारा. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले की वजह से कम-से-कम 900 क़ैदी जेल से भागने में कामयाब रहे थे.

घुवायरान जेल हमला

घुवायरान जेल के इस वीडियो में सीरियाई एसडीएफ़ बंधकों को दिखाया गया

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साल 2019 में बघौज़ खोने के बाद से आईएस सीरिया में कैदियों को छुड़ाने के लिए छोटे-छोटे हमले करते रहा जो सिर्फ सांकेतिक थे. हालांकि, घुवायरान जेल पर उसने 20 जनवरी से हमला शुरू किया था और इस ख़बर को लिखे जाने तक यह हमला जारी था.

हाल के सालों में यह इसलिए भी बड़ा हमला है क्योंकि दुश्मन के इलाके में घुसकर आईएस ने कुर्द-नियंत्रित प्रांत में भारी सुरक्षा व्यवस्था वाली जेल पर अटैक किया है. यहां आईएस का कोई आधार नहीं है और उसके पास सीमित समर्थन है.

बीते साल, सीरिया में आईएस ने जिन 288 हमलों का जिम्मा लिया, उनमें से सिर्फ 22 ही हसाका प्रांत में थे. यह क्षेत्र अमेरिका समर्थित कुर्दों की सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस द्वारा नियंत्रित किया जाता है.

आईएस ने अभी तक जेल पर हमले के अलग-अलग चरण दिखाने के मकसद से पांच छोटे वीडियो जारी किए हैं. इनमें चरमपंथियों के जेल में घुसने, इमारत के अंदर से रिकॉर्डिंग करने, जेल की दीवार गिराकर बचने का रास्ता बनाने जैसे कई फुटेज शामिल हैं.

अगस्त 2020 में आईएस ने बताया था कि उसने वास्तव में कुछ हमले सिर्फ इसलिए किए ताकि बाद में उन्हें आईएस कैदियों को मुक्त कराने को सौदे के लिए इस्तेमाल किया जा सके.

सीरिया के हसाका शहर में पिछले गुरुवार से संघर्ष हो रहा है

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इसी बयान में आईएस ने यह भी कहा कि उसके कुछ मामलों में उन कैदियों के साथ समन्वय भी शामिल है जो आईएस की बाहरी मदद लेकर जेल के अंदर दंगे करते हैं.

आईएस के हालिया हमले से यह संकेत मिलते हैं कि बाहरी कार्रवाई को जेल के अंदर की गतिविधियों के साथ समन्वित किया गया था. 20 जनवरी के दिन जब हमला शुरू हुआ, तो स्थानीय मीडिया सूत्रों ने कुर्दिश अधिकारियों के हवाले से कैदियों के बीच "विद्रोह" और "दंगों" की बात की थी, जो आईएस के हमले के समय से मेल खाता था.

आईएस ने 22 जनवरी को दावा किया कि उसने हमले से अब तक 800 कैदियों को छुड़वाया है और सुरक्षाबलों के 200 से अधिक जवानों को मारा है, जिसमें एक सीनियर स्टाफ भी शामिल है. आईएस ने स्थानीय लोगों से कहा है कि वे रिहा कराए गए कैदियों को आश्रय दे, जिसका संभवतः यह अर्थ है कि जेल से कई लोग भाग रहे हैं.

अगर आईएस यह हमला नहीं रोकता और कई भागे हुए चरमपंथियों को दोबारा पकड़ा नहीं गया तो यह हमला समूह की स्थिति में महत्वपूर्ण मज़बूती को दिखाएगा.

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