नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलिया में रहने की अदालती लड़ाई जीती

टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच के ऑस्ट्रेलिया का वीज़ा रद्द करने के मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जोकोविच को प्रवासन हिरासत केंद्र से छोड़ने को कहा है.

बीते सप्ताह ऑस्ट्रेलियन ओपन में भाग लेने के लिए पहुंचे सर्बियाई टेनिस खिलाड़ी जोकोविच को कोरोना वैक्सीनेशन न होने के कारण वीज़ा रद्द कर दिया गया था.

इसके बाद वो इस लड़ाई को कोर्ट में लेकर गए थे.

उनके वकीलों की जिरह के बाद वीज़ा रद्द करने के मामले को जोकोविच जीत चुके हैं.

जज एंथनी कैली ने जोकोविच के वीज़ा रद्द करने के ऑस्ट्रेलियाई प्राधिकरण के फ़ैसले को 'ख़ारिज' कर दिया.

इसका अर्थ है कि अब उनका वीज़ा वैध है और वो ऑस्ट्रेलिया में दाख़िल हो सकते हैं.

मामला

नोवाक जोकोविक को पिछले सप्ताह ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर प्रवासी हिरासत केंद्र में रखे जाने की घटना से विवाद पैदा हो गया और यह मामला अदालत में पहुंच गया. लोगों में इसे लेकर आक्रोश देखने को मिला.

अधिकतर लोग ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन पर नाराज़ थे, फिर भले ही वो संघीय सरकार हो या विक्टोरिया प्रांत की सरकार.

इस परिस्थिति का जिस तरह से कुप्रबंधन हुआ उसे लेकर अविश्वास की भावना भी पैदा हुई है. माना जा रहा है कि संवाद और राजनीतिक खींचतान में भारी चूक हुई.

जोकोविच को बीते बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचना था. वो यहां बहुत चर्चित खिलाड़ी नहीं हैं और उन्हें लेकर ग़ुस्सा भी था.

एक समय लग रहा था कि ये कहानी सीधी है.

जोकोविच एक विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोविड वैक्सीन का विरोध किया है. उन्हें ऑस्ट्रेलिया में खेलने के लिए कथित तौर पर छूट दी गई थी. हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में सबसे सख़्त कोरोना संबंधी नियम लागू किए हैं.

इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि इस क़दम ने ऑस्ट्रेलिया में आक्रोश पैदा किया. ऑस्ट्रेलिया के आम लोगों को देश में आज़ादी से आवागमन करने के लिए टीका लगवाना अनिवार्य है.

लेकिन जब जोकोविच मेलबर्न एयरपोर्ट पर पहुंचे तो घटनाक्रम नाटकीय हो गया.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने क्या कहा था

जनता के आक्रोश पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बुधवार को कहा कि जोकोविच को छूट देने का फ़ैसला विक्टोरिया की प्रांतीय सरकार का है. जोकोविच ऑस्ट्रेलियाई ओपन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे.

इसके कुछ घंटे बाद ही ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्री केरेन एंड्र्यूज़ ने प्रधानमंत्री से विरोधाभासी बयान दिया और कहा कि 'भले ही टेनिस ऑस्ट्रेलिया और विक्टोरिया सरकार एक बिना टीका लगवाए खिलाड़ी को खेलने की अनुमति दे दे, लेकिन संघीय सरकार देश की सीमाओं पर अपने नियमों को लागू करेगी.'

अगले दिन जब ये पता चला कि 34 वर्षीय जोकोविच का वीज़ा रद्द कर दिया गया है और उन्हें वापस भेजा जाएगा तो प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी पक्ष बदल लिया.

प्रधानमंत्री ने कहा, "नियम नियम हैं."

चौबीस घंटे के भीतर ही प्रधानमंत्री मॉरिसन ने यू-टर्न ले लिया. उन्होंने शुरुआत में कहा था कि सर्बियाई खिलाड़ी नोवाक जोकोविच का ऑस्ट्रेलियाई ओपन में हिस्सा लेना विक्टोरिया की प्रांतीय सरकार का विषय है. इसके बाद उन्होंने संघीय नियमों का समर्थन किया.

इस परिस्थिति के पीछे हो रही राजनीति को नज़रअंदाज़ किया जाना मुश्किल है.

केंद्र सरकार और विक्टोरिया सरकार में खींचतान

प्रांतीय सरकार और संघीय सरकार के बीच तनाव इसलिए हुआ क्योंकि दोनों की इस मुद्दे पर अलग-अलग राय थी.

विक्टोरिया प्रांत चाहता था कि दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी नोवाक जोकोविच इस अहम टूर्नामेंट में हिस्सा लें.

वहीं संघीय सरकार जोकोविच के देश में दाख़िल होने पर लोगों के आक्रोश का सामना कर रही थी और ये संकेत देना चाहती थी कि वही यह तय करेगी कि कौन देश में आएगा और कौन नहीं.

संघीय सरकार ये भी संकेत देना चाहती थी कि टेनिस स्टार समेत हर किसी को कोविड नियमों का पालन करना ही होगा.

ऑस्ट्रेलिया में इस साल चुनाव भी होने हैं. प्रधानमंत्री मॉरिसन पर कोरोना महामारी को लेकर सरकार की कार्रवाई की वजह से भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

ऑस्ट्रेलिया में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और टेस्ट क्लिनिकों पर भीड़ है.

विश्लेषक मानते हैं कि मॉरिसन ने इस मौके का इस्तेमाल ये दिखाने के लिए भी किया है कि वो देश की सीमाओं से जुड़े मुद्दों पर सख़्त हैं.

लेकिन कोविड नियमों और वीज़ा ज़रूरतों पर सख़्त रुख़ दिखाकर मॉरिसन और उनकी सरकार ने स्थिति को और जटिल कर दिया है.

हर बयान जो दिया जा रहा है, हर जानकारी जो सामने आ रही है उससे और अधिक अनिश्चितता ज़ाहिर हो रही है.

कोर्ट में क्या हुआ अब तक

जोकोविच की क़ानूनी टीम ने उन्हें वापस भेजने के फ़ैसले को सोमवार को अदालत में चुनौती दी.

ऑस्ट्रेलिया की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया ने जोकोविच को चिकित्सा छूट के आधार पर देश में आने का भरोसा नहीं दिया था.

अदालत में शनिवार को उनकी टीम की तरफ़ से पेश दस्तावेज़ों में कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया यात्रा से पहले टेनिस ऑस्ट्रेलिया के दो पैनलों ने जोकोविच को वैक्सीन में छूट दी थी.

यही संस्थान ऑस्ट्रेलिया और विक्टोरिया में टेनिस टूर्नामेंटों का संचालन करती है.

जोकोविच के अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि 16 दिसंबर को कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी वो ऑस्ट्रेलिया में दाख़िल हो सकते हैं. उनसे ये भी कहा गया था कि वो ये मान सकते हैं कि उन्हें ऑस्ट्रेलियाई ओपन में खेलने दिया जाएगा.

वहीं टेनिस ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि उसे मंगलवार तक यह जानकारी मिल जानी चाहिए कि जोकोविच को खेलने की अनुमति मिलेगी या नहीं क्योंकि ऑस्ट्रेलियन ओपन टूर्नामेंट के उनके मैच 17 जनवरी से शुरू होने हैं.

अब कोर्ट ने जोकोविच का वीज़ा रद्द करने के मामले में हुई सुनवाई के दौरान जोकोविच को प्रवासन हिरासत केंद्र से छोड़ने को कहा है.

बीते सप्ताह ऑस्ट्रेलियन ओपन में भाग लेने के लिए पहुंचे जोकोविच को कोरोना वैक्सीनेशन न होने के कारण वीज़ा रद्द कर दिया गया था.

जोकोविच के समर्थन में उठती आवाज़ें

जोकोविच के साथ पिछले कुछ दिनों में जैसा बर्ताव हुआ है, अब लोगों की भावना भी उनकी तरफ़ दिख रही है.

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी निक काइरजियोस जिन्होंने पहले महामारी को लेकर जोकोविच के रवैये की आलोचना की थी, अब उनके बचाव में आ गए हैं. निक ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया ने उनके साथ ख़राब व्यवहार किया है और प्रशासन को और बेहतर काम करना चाहिए.

वहीं मानवाधिकार संगठन भी उनके समर्थन में आ रहे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच से जुड़ी सोफ़ी मैकनील ने कहा है कि जिस तरह का व्यवहार जोकोविच के साथ हुआ है उससे वो परेशान हैं.

वहीं प्रशासन कई अन्य लोगों के वीज़ा की पड़ताल भी कर रहा है. शनिवार को चेक रिपब्लिक की खिलाड़ी रेनेटा वोराकोवा वापस लौट गईं. उनका वीज़ा भी रद्द कर दिया गया था.

ऑस्ट्रेलिया ओपन 17 जनवरी को मेलबर्न में शुरू होगा.

लेकिन देश की सबसे बड़ी और सबसे अहम खेल प्रतियोगिता ने ऑस्ट्रेलिया के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा की है. अब दुनियाभर की निगाहें ग़लत कारणों से ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ हैं.

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