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बांग्लादेशी ब्लॉगर अभिजीत रॉय के हत्यारों का सुराग़ देने पर अमेरिका देगा 50 लाख डॉलर
बांग्लादेश में साल 2015 में अमेरिकी ब्लॉगर अभिजीत रॉय की हत्या के मामले में दो भगोड़े दोषियों की जानकारी देने वाले को अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के रिवॉर्ड फ़ॉर जस्टिस प्रोग्राम ने सोमवार को ट्वीट करके बताया कि सैयद ज़िया उल हक़ उर्फ़ 'मेजर ज़िया' और अकरम हुसैन की जानकारी देने वाले को 50 लाख डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा.
ट्वीट में लिखा है, "2015 में बांग्लादेश में अमेरिकियों पर हमला करने वालों की जानकारी देने के लिए 50 लाख डॉलर तक का ईनाम. ढाका, बांग्लादेश में आतंकियों ने अभिजीत रॉय की हत्या कर दी थी और उनकी पत्नी राफ़िदा अहमद को घायल कर दिया था. अगर आपको इस जघन्य अपराध के ज़िम्मेदार लोगों की जानकारी है तो हमें नीचे दिए गए नंबर पर मैसेज करें."
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के विभाग के इस ट्वीट में एक पोस्टर भी है जिसमें इस हत्या की घटना और इस मामले का विवरण है.
पोस्टर में क्या लिखा है?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जो पोस्टर ट्वीट किया गया है उसमें लिखा है कि "26 फ़रवरी 2015 को जब अभिजीत रॉय और उनकी पत्नी राफ़िदा बोन्या अहमद ढाका पुस्तक मेले से लौट रहे थे तो अल क़ायदा से जुड़ेआतंकवादियों ने रॉय की हत्या कर दी और उनकी पत्नी को घायल कर दिया.
"इस हमले में भूमिका के लिए बांग्लादेशी कोर्ट ने छह लोगों को दोषी ठहराया है और सज़ाएं दी हैं. इनमें से दो अभियुक्त सैयद ज़िया उल हक़ उर्फ़ मेजर ज़िया और अकरम हुसैन ट्रायल की शुरुआत से फ़रार हैं."
"अगर आपको हक़, हुसैन या किसी और भी व्यक्ति के बारे में मालूम है जो इस हमले में शामिल था तो उसकी जानकारी नीचे दिए गए नंबर पर हमें सिग्नल, टेलीग्राम या व्हाट्सऐप के ज़रिए दें. आप इनाम के पात्र हो सकते हैं.
क्या है मामला
पेशे से बायो-इंजीनियर, ऑनलाइन एक्टिविस्ट अभिजीत रॉय बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी नागरिक थे जिनकी 26 फ़रवरी 2015 को ढाका में चरमपंथियों ने हत्या कर दी थी. उनको ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था लेकिन उन्होंने वहाँ दम तोड़ दिया.
इस घटना में उनकी पत्नी भी बुरी तरह ज़ख़्मी हुई थीं. इस घटना के बाद अभिजीत के पिता और प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रोफ़ेसर अजय रॉय ने शाहबाग़ पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया था.
इस हमले की ज़िम्मेदारी दो संबंधित समूहों ने ली थी जिनमें एक अंसारुल्लाह बांग्ला टीम और भारतीय उपमहाद्वीप में अलक़ायदा (AQIS) ने ली थी. ये दोनों संगठन अलक़ायदा से प्रेरित थे.
घटना के चार साल बाद छह मार्च 2019 को पुलिस ने चार्जशीट दायर की जिसको न्यायिक प्राधिकरण ने अगले महीने स्वीकार किया और फिर अगस्त में इस मामले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू हुआ.
ट्रायल के दौरान कोर्ट ने 28 गवाहों को सुना था जिनमें अजय रॉय भी शामिल थे. 9 दिसंबर 2019 को अजय रॉय की मृत्यु हो गई.
इस मामले में इस साल फ़रवरी में छह लोगों को दोषी ठहराया गया जिनमें से पांच लोगों को मौत की सज़ा और एक को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई.
हालांकि इनमें से दो दोषी और साज़िशकर्ता सैयद ज़िया उल हक़ उर्फ़ मेजर ज़िया और अकरम हुसैन फ़रार हैं.
सेना से बर्ख़ास्त मेजर सैयद ज़िया उल हक़, अंसार अल इस्लाम के चरमपंथी अकरम हुसैन, अबू सिद्दीक़ सुहैल, मुज़म्मिल हुसैन और अराफ़ात रहमान को मौत की सज़ा दी गई.
वहीं एक अन्य दोषी शफ़ी उर रहमान फ़राबी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी. हालांकि, हत्या के मामले में अमेरिका की जांच अभी भी जारी है.
बांग्लादेश में ब्लॉगरों की हत्या
बांग्लादेश में साल 2016 तक धर्मनिरपेक्ष और ख़ुद को नास्तिक कहने वाले छह ब्लॉगर और प्रकाशक मारे जा चुके थे, अभिजीत रॉय भी इनमें से एक थे.
बांग्लादेश में बीते 40 साल से 'एकुशे फ़ेब्रुआरी' (इक्कीस फरवरी) पुस्तक मेले का आयोजन होता आ रहा था.
साल 2016 में पुस्तक मेले के आयोजकों ने लेखकों और प्रकाशकों को सलाह दी थी कि वे ऐसी किताबें मेले में न रखें, जिनसे लोगों की 'धार्मिक भावनाएं आहत' होती हों.
बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामिस्ट गुट नास्तिक लेखकों के लिए मौत की सज़ा की मांग को लेकर लामबंद हैं.
अभिजीत रॉय की हत्या से पहले 2013 में ब्लॉगर राजीव हैदर की हत्या हुई थी. वे पहले ऐसे ब्लॉगर थे जिनकी बांग्लादेश में हत्या की गई थी.
दो साल बाद, अभिजीत की हत्या के साथ ही ब्लॉगर-लेखकों की हत्या का सिलसिला शुरू हो गया था.
अभिजीत की हत्या के एक महीने बाद ब्लॉगर वशीकुर रहमान बाबू की हत्या 30 मार्च को कर दी गई.
साल 2015 में इस तरह से पांच ब्लॉगर, लेखक-प्रकाशकों की हत्याएं हुई थीं. इन हत्याओं की ज़िम्मेदारी विभिन्न चरमपंथी गुटों ने ली थी.
रहमान बाबू की हत्या के बाद अप्रैल में ब्लॉगर नज़ीमुद्दीन समद और समलैंगिक अधिकारों पर ज़ोर देने वाली पत्रिका रूपबन के संपादक जुल्हाज़ मन्नान की हत्या हुई.
इसके बाद होली आर्टिज़न बेकरी में एक जुलाई को चरमपंथी हमला भी हुआ था. इस हमले के दौरान ब्लॉगरों की हत्या की ज़िम्मेदारी चरमपंथी गुटों ने ली थी.
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